रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान बनाने वाली एफएमसीजी कंपनियों का आकर्षण शेयर बाजार के निवेशकों के बीच घट रहा है। एनएसई एफएमसीजी सूचकांक का हिस्सा रही इन कंपनियों का प्राइस-टु-अर्निंग्स (पीई) अनुपात छह साल के निचले स्तर पर आ गया है। एफएमसीजी सूचकांक अब अपने पिछले 12 महीने की कमाई के 38.8 गुना पर कारोबार कर रहा है जो पिछले साल मार्च के आखिर में पिछली कमाई के 43.9 गुना से काफी कम है। यह मार्च 2020 तिमाही के बाद से इस क्षेत्र का सबसे कम मूल्यांकन अनुपात है। मार्च 2020 में कोविड 19 लॉकडाउन की वजह से एफएमसीजी का पीई अनुपात घटकर 37.3 गुना पर आ गया था।
इसकी तुलना में बीते एक साल में सेंसेक्स का मूल्यांकन काफी हद तक अपरिवर्तित रहा है। यह बेंचमार्क सूचकांक फिलहाल 21.55 गुना पीई पर कारोबार कर रहा है जो मार्च 2025 के अंत में 21.58 गुना पीई से थोड़ा कम है। कोविड के समय मार्च 2020 के अंत में सेंसेक्स का 12 महीने पीछे की कमाई के आधार पर पीई घटकर 19.6 गुना रह गया था।
बेंचमार्क सूचकांक के मुकाबले एफएमसीजी शेयरों के मूल्यांकन प्रीमियम में तेजी से गिरावट आई है। एफएमसीजी शेयर अभी सेंसेक्स के मौजूदा मूल्यांकन के मुकाबले 80 फीसदी प्रीमियम पर हैं जो पिछले साल मार्च के आखिर में 103.4 फीसदी के प्रीमियम से कम है। हालांकि एफएमसीजी सूचकांक का मौजूदा मूल्यांकन प्रीमियम करीब 80 फीसदी है जो 10 साल के औसत प्रीमियम के बराबर है।
यह विश्लेषण एनएसई एफएमसीजी सूचकांक में शामिल 13 प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों के नमूनों पर आधारित है। हमारे विश्लेषण से जिन दो कंपनियों को बाहर रखा गया है, उनमें वरुण बेवरिजेज और पतंजलि फूड्स शामिल हैं।
एफएमसीजी कंपनियों के मूल्यांकन अनुपात में तेज गिरावट की वजह उनके बाजार पूंजीकरण में बड़ी गिरावट और पिछले साल कमाई में अपेक्षाकृत तेज बढ़ोतरी रही।
हमारे नमूने में शामिल एफएमसीजी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले साल मार्च के आखिर से अब तक 7.5 फीसदी कम हुआ है जबकि इसी दौरान सेंसेक्स में 7.1 फीसदी की गिरावट आई है। इसकी तुलना में असाधारण लाभ और हानि को समायोजित करने के बाद (पिछले 12 महीनों के आधार पर) इन कंपनियों का कुल शुद्ध लाभ इस अवधि के दौरान 5.8 फीसदी बढ़ा है जबकि पिछले 12 महीनों में बेंचमार्क सूचकांक की प्रति शेयर आय (ईपीएस) में 1.4 फीसदी की वृद्धि हुई है।
एफएमसीजी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बीते शुक्रवार को घटकर 18.95 लाख करोड़ रुपये रहा जो मार्च 2025 के आखिर में 20.49 लाख करोड़ रुपये और सितंबर 2024 में 25.56 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर था। इसके साथ ही एफएमसीजी क्षेत्र का बाजार पूंजीकरण अपने सबसे ऊंचे स्तर से करीब 26 फीसदी कम हुआ है। इसकी तुलना में सेंसेक्स में दिसंबर 2025 के आखिर में सर्वोच्च स्तर से लगभग 16 फीसदी की गिरावट आई है।
दूसरे शब्दों में साल 2024 की आखिरी तिमाही और 2025 की शुरुआत में हुई बिकवाली के बाद 2025 की दूसरी छमाही में बाजार में व्यापक सुधार हुआ था मगर एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों की कीमतें अब भी संघर्ष कर रही हैं और हाल के हफ्तों में कई अलग-अलग शेयरों ने नए निचले स्तरों को छुआ है।
विश्लेषक इसकी वजह उपभोक्ता मांग में नरमी और एफएमसीजी क्षेत्र से निवेशकों की कम उम्मीदों को मानते हैं। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के मुख्य कार्याधिकारी और संस्थापक जी चोकालिंगम ने कहा, ‘एफएमसीजी क्षेत्र अब ‘रक्षात्मक’ क्षेत्र की तरह काम नहीं कर रहा है और कमजोर बाजार में भी इसका प्रदर्शन उम्मीद से कम रहा है। इस क्षेत्र की ज्यादातर कंपनियां कमाई में तेजी लाने में नाकाम रही हैं। इसीलिए अब मैं इन्हें एफएमसीजी के बजाय ‘स्लो मूविंग कंज्यूमर ग्रोथ’ (एसएमसीजी) कहता हूं।’
चोकालिंगम के अनुसार एफएमसीजी कंपनियों को न केवल उपभोक्ता मांग में कमी का सामना करना पड़ रहा है बल्कि क्षेत्रीय ब्रांडों और प्राइवेट लेबल से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ रहा है। इस वजह से स्थापित एफएमसीजी कंपनियों को अपनी बाजार हिस्सेदारी गंवानी पड़ी है और उनके मार्जिन पर भी असर पड़ा है।
निवेशक अब नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा और सामान्य विनिर्माण जैसे नए वृद्धि वाले क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि एफएमसीजी क्षेत्र का पिछले 12 महीने की कमाई के आधार पर पीई अनुपात अब कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रक्षा पूंजीगत उत्पाद, औद्योगिक कंपनियों, हेल्थकेयर, रियल्टी और सीमेंट जैसे अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम हो गया है। हालांकि एफएमसीजी कंपनियों का मूल्यांकन अभी भी वाहन, बिजली और गैस, आईटी, खनन एवं धातु, बैंकिंग वित्त और बीमा तथा तेल एवं गैस जैसे क्षेत्रों से अधिक है।