विदेशी निवेशक इस समय भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं और बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ग्लोबल रिसर्च का मानना है कि यह सिलसिला अगले साल तक भी जारी रह सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि एशिया के दूसरे बाजार, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े शेयर, भारत की तुलना में ज्यादा बेहतर कमाई और सस्ते वैल्यूएशन दे रहे हैं। यही कारण है कि ग्लोबल निवेशकों का झुकाव भारत से ज्यादा ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों की तरफ बढ़ रहा है।
BofA के इंडिया रिसर्च हेड अमीश शाह का कहना है कि भारत में कंपनियों की कमाई के अनुमान लगातार घट रहे हैं। दूसरी तरफ AI से जुड़े बाजारों में कंपनियों की कमाई बढ़ रही है और वहां के शेयरों को लेकर निवेशकों का भरोसा भी मजबूत बना हुआ है। उनका मानना है कि विदेशी निवेशकों की भारत में वापसी जल्दी होती नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि 2026 में वापसी की संभावना काफी कम है और यह वापसी शायद 2027 या 2028 तक टल सकती है।
2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार दुनिया के कमजोर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शामिल रहा है। बाजार में गिरावट के साथ-साथ रुपये की कमजोरी ने भी विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि विदेशी निवेशक अब तक करीब 23 अरब डॉलर की बिकवाली कर चुके हैं। निवेशकों को फिलहाल उन बाजारों में ज्यादा मौका दिख रहा है जहां AI सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और कंपनियों की कमाई मजबूत दिखाई दे रही है।
हालांकि इस साल निफ्टी 50 में करीब 9 प्रतिशत की गिरावट आई है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय बाजार का वैल्यूएशन अब भी महंगा माना जा रहा है। अभी निफ्टी अपने अगले एक साल की अनुमानित कमाई के करीब 18 गुना पर ट्रेड कर रहा है। वहीं दक्षिण कोरिया का बाजार सिर्फ 7.5 गुना वैल्यूएशन पर मिल रहा है। ऐसे में विदेशी निवेशकों को भारत के मुकाबले दूसरे एशियाई बाजार ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं।
BofA ने मार्च 2027 तक खत्म होने वाले वित्त वर्ष के लिए निफ्टी कंपनियों की कमाई वृद्धि का अनुमान करीब 8.5 प्रतिशत रखा है, जबकि चालू वित्त वर्ष के लिए यह अनुमान सिर्फ 7 प्रतिशत है। अमीश शाह का कहना है कि भारत फिलहाल ‘लो ग्रोथ ऑन लो बेस’ की स्थिति में है, यानी कमजोर आधार पर धीमी वृद्धि हो रही है। इसके उलट दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में कंपनियां मजबूत कमाई दिखा रही हैं।
अमीश शाह ने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान और पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से महंगाई और आर्थिक वृद्धि दोनों प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने रुपये की कमजोरी को भी भारत के लिए एक बड़ी और लंबे समय की चुनौती बताया।
BofA के मुताबिक विदेशी निवेशकों की वापसी काफी हद तक दो चीजों पर निर्भर करेगी। पहली, पश्चिम एशिया का संघर्ष कब खत्म होता है और दूसरी, AI निवेश का वैश्विक बूम कब धीमा पड़ता है। तब तक घरेलू निवेशक भारतीय मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेश जारी रख सकते हैं, लेकिन विदेशी निवेशकों की वापसी में अभी समय लग सकता है। (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)