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FPI की रिकॉर्ड बिकवाली: अप्रैल के मात्र 10 दिनों में विदेशी निवेशकों ने निकाले 48,213 करोड़ रुपये

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वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी निवेशकों ने अप्रैल में भारतीय बाजार से भारी निकासी की है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है

Last Updated- April 12, 2026 | 9:09 PM IST
FPI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय शेयर बाजार से अप्रैल में भी अपनी बिकवाली जारी रखी है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक वृहद आर्थिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने अप्रैल के पहले 10 दिन में ही 48,213 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इससे पहले मार्च में एफपीआई ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ की निकासी की थी, जो अब तक का निकासी का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है।

हालांकि, फरवरी में उन्होंने 22,615 करोड़ का निवेश किया था, जो पिछले 17 माह का उच्चस्तर है।  एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल निकासी बढ़कर 1.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। केवल अप्रैल में ही 10 तारीख तक उन्होंने 48,213 करोड़ रुपये निकाले हैं। 

विश्लेषकों के अनुसार, लगातार बिकवाली वैश्विक आर्थिक दबाव और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों का परिणाम है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख शोध प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर चिंताएं फिर बढ़ गई हैं।

वहीं, जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न ऊर्जा संकट, रुपये में कमजोरी और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित असर की वजह से एफपीआई बिकवाल बने हुए हैं। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजार फिलहाल विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बने हुए हैं, क्योंकि वहां प्रतिफल की संभावनाएं भारत की तुलना में बेहतर मानी जा रही हैं।  

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First Published - April 12, 2026 | 9:09 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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