विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च के पहले दो हफ्तों में वित्तीय सेवाओं, ऑटोमोबाइल और दूरसंचार शेयरों की सबसे ज्यादा बिकवाली की। इस तरह उनकी कुल शुद्ध निकासी 52,703 करोड़ रुपये हुई।
एफपीआई ने वित्तीय सेवाओं में 31,831 करोड़ रुपये, ऑटोमोबाइल में 4,807 करोड़ रुपये और दूरसंचार में 3,856 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री की। इसके अतिरिक्त, विदेशी निवेशकों ने निर्माण (2,975 करोड़ रुपये) और तेल और गैस (2,932 करोड़ रुपये) में अपनी हिस्सेदारी कम की। इस बीच, एफपीआई ने पूंजीगत सामान क्षेत्र में 3,897 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे जबकि धातु, बिजली और उपभोक्ता सेवाओं में भी थोड़ी बहुत खरीदारी की।
15 मार्च तक वित्तीय सेवाओं में सबसे अधिक 31.57 फीसदी का निवेश था जबकि फरवरी के अंत में यह 32.41 फीसदी था। इसके बाद तेल, गैस और ईंधन क्षेत्रों में 7.81 फीसदी और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में 7.40 फीसदी निवेश रहा। ईरान से जुड़ी लड़ाई ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को एक बार फिर जोखिम से बचने का मौका दिया है।
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच व्यापार समझौते और अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने के फैसले के बाद एफपीआई फरवरी में शुद्ध खरीदार बन गए थे। लेकिन नए भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की धारणा को पलट दिया है। यह बिकवाली केवल भारत तक ही सीमित नहीं रही है बल्कि वैश्विक जोखिम से बचने की बढ़ती कोशिशों के बीच दक्षिण कोरिया और ताइवान से भी इस महीने भारी निकासी हुई है।