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फ्रैंकलिन टेम्पलटन की SIF में एंट्री, लॉन्च किया सफायर इक्विटी लॉन्ग शॉर्ट फंड; क्या है इसमें खास?

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यह स्ट्रेटेजी एक फैक्टर-बेस्ड अप्रोच का इस्तेमाल करेगी, जिससे बाजार के मौकों का फायदा उठाया जा सके और नुकसान को कम किया जा सके

Last Updated- April 02, 2026 | 4:47 PM IST
Avinash Satwalekar
फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया के प्रेसिडेंट अविनाश सात्वेलकर | फोटो: कमलेश पेडनेकर

NFO Alert: फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया ने गुरुवार को अपने पहले स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) के तहत सफायर इक्विटी लॉन्ग शॉर्ट एसआईएफ लॉन्च करने की घोषणा की। यह SIF फ्रेमवर्क के तहत एक इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड है, जो निफ्टी 500 के शेयरों में निवेश करेगा, जिससे लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियों में अच्छा डाइवर्सिफिकेशन मिल सके।

सफायर इक्विटी लॉन्ग शॉर्ट एसआईएफ का मकसद अलग-अलग मार्केट परिस्थितियों में लंबे समय में पूंजी बढ़ाना है। इसके लिए यह एक खास मॉडल-आधारित क्वांटिटेटिव स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करेगा, जो अनुशासित स्टॉक चयन, सही समय पर निवेश में बदलाव यानी डायनेमिक एलोकेशन और मजबूत रिस्क मैनेजमेंट पर आधारित है।

इस NFO की खासियत

फंड डिटेल- इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड

इन्वेस्टमेंट स्ट्रटेजी- यह एक ओपन-एंडेड इक्विटी इन्वेस्टमेंट स्ट्रटेजी है, जो लिस्टेड कंपनियों के शेयर और उनसे जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करती है। इसमें डेरिवेटिव्स के जरिए सीमित शॉर्ट पोजिशन भी ली जाती है।

निवेश का मकसद- इस स्ट्रटेजी का लक्ष्य लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देना है। इसके लिए यह लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियों में लॉन्ग/शॉर्ट इक्विटी स्ट्रटेजी के जरिए निवेश करती है। हालांकि, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि यह निवेश उद्देश्य पूरी तरह हासिल हो ही जाएगा।

NFO की तारीख- 10 अप्रैल 2026 से 24 अप्रैल 2026

फंड मैनेजर- अरिहंत जैन

न्यूनतम निवेश राशि- पहली बार निवेश के लिए 10 लाख रुपये, और उसके बाद 10,000 के मल्टीपल में

बेंचमार्क- Nifty 500 TRI

एग्जिट लोड- अगर 1 साल के अंदर निवेश निकालते हैं तो 1% चार्ज लगेगा, उसके बाद कोई शुल्क नहीं

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डायनेमिक मार्केट के लिए स्मार्ट फंड

फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया के प्रेसिडेंट अविनाश सात्वेलकर ने कहा, “आज के समय में निवेशक ऐसे बाजार का सामना कर रहे हैं जो तेजी से अलग-अलग फेज में बदलता रहता है। ऐसे में अनुशासित और लचीली निवेश रणनीतियों का महत्व और बढ़ जाता है। SIF उन निवेशकों के लिए बनाया गया है जो ज्यादा जोखिम लेने के लिए तैयार हैं। इसमें अपेक्षाकृत ज्यादा रिटर्न की संभावना होती है और यह टैक्स के लिहाज से भी फायदेमंद हो सकता है।”

उन्होंने कहा कि, “SIF को पारंपरिक म्युचुअल फंड से अलग बनाने वाली बात यह है कि यह बाजार के बदलावों का फायदा उठाने के लिए अपने कुल निवेश (नेट एसेट्स) का 25% तक शॉर्ट पोजिशन ले सकता है। इससे बाजार में गिरावट के दौरान नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।”

फैक्टर-बेस्ड निवेश का नया तरीका

उन्होंने आगे कहा कि, “सफायर इक्विटी लॉन्ग शॉर्ट एसआईएफ, फ्रैंकलिन टेम्पलटन के कई दशकों के सिस्टमेटिक और क्वांटिटेटिव निवेश अनुभव का फायदा उठाता है। हमारी खास डेटा-आधारित क्वांटिटेटिव रणनीति 40 से ज्यादा फैक्टर्स के आधार पर स्टॉक का मूल्यांकन करती है, जैसे क्वालिटी, वैल्यू, सेंटिमेंट और अन्य इंडिकेटर्स। इसके साथ ही, शॉर्ट पोजिशन के अवसर पहचानने के लिए एक अलग फ्रेमवर्क भी है। हमारा SIF एक व्यवस्थित और डेटा-आधारित क्वांटिटेटिव अप्रोच पर बना है, जो इक्विटी में निवेश के मौके पहचानता है और तय लॉन्ग-शॉर्ट स्ट्रक्चर के जरिए जोखिम को प्रभावी तरीके से मैनेज करता है।”

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शेयर कैसे चुने जाएंगे?

सफायर इक्विटी लॉन्ग शॉर्ट एसआईएफ के पोर्टफोलियो मैनेजर अरिहंत जैन ने कहा कि इस रणनीति का क्वांटिटेटिव मॉडल इस तरह बनाया गया है कि यह अलग-अलग तरह के इंडिकेटर्स के आधार पर स्टॉक का विश्लेषण करता है। इसमें लीडिंग इंडिकेटर्स और पिछले प्रदर्शन के संकेत यानी लैगिंग इंडिकेटर्स दोनों शामिल होते हैं, क्योंकि अलग-अलग बाजार स्थितियों में अलग-अलग फैक्टर्स अच्छा काम करते हैं।

यह सिस्टम स्टॉक्स को स्कोर और रैंक करता है, ताकि लॉन्ग (खरीद) और चुनिंदा शॉर्ट (बेचकर फायदा) पोजीशन के लिए सही विकल्प चुने जा सकें। इससे बाजार में बदलाव आने पर संतुलित तरीके से प्रतिक्रिया देना आसान होता है। यह मॉडल समय के साथ खुद को बदलने के लिए बनाया गया है, लेकिन इसमें रिस्क मैनेजमेंट पर हमेशा खास ध्यान रखा जाता है।”

कैसे तैयार होगा पोर्टफोलियो?

उन्होंने आगे कहा कि, “पोर्टफोलियो बनाने की प्रक्रिया एक अनुशासित और रिसर्च-आधारित तरीके से की जाती है। इसमें निवेश टीम अपने अनुभव के साथ-साथ लिक्विडिटी, सेक्टर एक्सपोजर, कंपनी का आकार, जोखिम और स्टाइल जैसे पहलुओं का ध्यान रखती है, ताकि किसी भी तरह के अनचाहे झुकाव से बचा जा सके।

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गिरते-बढ़ते बाजार में रिटर्न का लक्ष्य

फंड हाउस ने कहा कि लॉन्ग (खरीद) और शॉर्ट (बेचकर फायदा) दोनों तरफ फैक्टर्स का सही और अनुशासित उपयोग करके, यह रणनीति बाजार में अलग-अलग स्थितियों के अनुसार बेहतर तरीके से अपनी राय दिखाने में मदद करती है। इससे मुश्किल या गिरते हुए बाजार में भी बेहतर रिटर्न को हासिल करने में मदद मिल सकती है।

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First Published - April 2, 2026 | 4:42 PM IST

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