Hotel Stocks: होटल इंडस्ट्री में इस समय दो अलग-अलग तस्वीरें दिख रही हैं… एक तरफ फरवरी में जबरदस्त उछाल, और दूसरी तरफ आगे बढ़ती अनिश्चितता का डर। सवाल ये है कि क्या Hotel Stocks में यह तेजी टिकेगी या आने वाले समय में सुस्ती हावी हो जाएगी? एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की ताजा रिपोर्ट इसी पूरे बदलाव की कहानी बताती है।
रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2026 होटल सेक्टर के लिए बेहद मजबूत महीना रहा। कमरे का औसत किराया यानी ARR पिछले 11 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया और इसमें 12 से 14 प्रतिशत की सालाना बढ़त दर्ज हुई। यह 11,300 से 11,500 रुपये के बीच रहा। इस तेजी के पीछे दो बड़ी वजहें रहीं। पहली, शादी का लंबा सीजन और दूसरी, कॉरपोरेट और MICE यानी मीटिंग्स और इवेंट्स की मजबूत वापसी। बड़े स्तर के इवेंट्स ने भी मांग को और बढ़ाया।
सिर्फ किराए ही नहीं, होटल्स की ऑक्यूपेंसी भी नई ऊंचाई पर पहुंच गई। फरवरी में यह 73 से 75 प्रतिशत तक रही, जो महामारी के बाद का सबसे मजबूत स्तर है। इसका सीधा असर RevPAR यानी प्रति कमरे की कमाई पर पड़ा, जिसमें 15 से 17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। दिल्ली ने सबसे ज्यादा प्रदर्शन किया, जहां ARR 18,500 रुपये से ऊपर रहा और इसमें 15 से 20 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। मुंबई में यह 15,500 रुपये से ऊपर रहा। वहीं अहमदाबाद और हैदराबाद में कमरे के किराए में सबसे तेज उछाल देखने को मिला, जहां ग्रोथ 20 प्रतिशत से ज्यादा रही।
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ऑक्यूपेंसी के मामले में मुंबई सबसे आगे रहा, जहां यह 86 से 88 प्रतिशत तक पहुंच गया। दिल्ली, अहमदाबाद और चेन्नई में भी 85 से 87 प्रतिशत के बीच मजबूत ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई। गोवा में भी सुधार देखने को मिला और गिरावट का ट्रेंड रुक गया। हालांकि बेंगलुरु इस ट्रेंड से अलग रहा, जहां ऑक्यूपेंसी में गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट में एक बड़ा ट्रेंड यह भी सामने आया कि होटल साइनिंग में जबरदस्त उछाल आया है। फरवरी तक के आंकड़ों में यह 110 प्रतिशत तक बढ़ चुका है। दिलचस्प बात यह है कि नए होटल प्रोजेक्ट्स अब टियर 3 और टियर 4 शहरों में ज्यादा आ रहे हैं। हालांकि होटल ओपनिंग अभी भी बड़े शहरों यानी टियर 1 और टियर 2 में केंद्रित है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में सप्लाई छोटे शहरों में तेजी से बढ़ेगी।
फरवरी की मजबूत शुरुआत के बाद मार्च के लिए तस्वीर थोड़ी कमजोर नजर आ रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर ट्रैवल पर पड़ रहा है, खासकर विदेशी यात्रियों की संख्या पर। इससे ट्रैवल सेंटिमेंट कमजोर हुआ है और होटल डिमांड पर दबाव पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक चौथी तिमाही में ग्रोथ सीमित रह सकती है, जहां कमाई का सहारा कमरे के किराए से आएगा, जबकि ऑक्यूपेंसी घट सकती है।
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IHCL यानी इंडियन होटल्स में RevPAR ग्रोथ सिर्फ 1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रेवेन्यू में करीब 5 प्रतिशत की बढ़त हो सकती है, लेकिन EBITDA मार्जिन में 130 बेसिस प्वाइंट की गिरावट संभव है। Chalet होटल्स में रेवेन्यू करीब 3 प्रतिशत बढ़ सकता है। होटल बिजनेस थोड़ा कमजोर रह सकता है, लेकिन रेंटल इनकम में 29 प्रतिशत की तेज बढ़त इसे सहारा देगी। यहां ADR में 12 प्रतिशत की बढ़त के बावजूद ऑक्यूपेंसी घटकर 66 प्रतिशत तक आ सकती है, जिससे RevPAR में गिरावट दिख सकती है।
SAMHI होटल्स में सबसे बेहतर ग्रोथ दिख सकती है। रेवेन्यू में करीब 8 प्रतिशत की बढ़त का अनुमान है। ADR में 14 प्रतिशत की तेजी रहेगी, हालांकि ऑक्यूपेंसी थोड़ी घट सकती है। GST के असर से मार्जिन में गिरावट दिखेगी, लेकिन एडजस्ट करने पर मार्जिन लगभग स्थिर रह सकते हैं।
एंटीक का मानना है कि फिलहाल सेक्टर एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है जहां डिमांड थोड़ी कमजोर और अनिश्चितता ज्यादा है। लेकिन लंबी अवधि में तस्वीर अभी भी मजबूत है। भारत में ट्रैवल बढ़ रहा है, शादियां और कॉरपोरेट इवेंट्स बढ़ रहे हैं और मिडिल क्लास खर्च करने के लिए तैयार है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि यह सेक्टर आने वाले समय में फिर से मजबूती दिखा सकता है, लेकिन अभी निवेशकों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है।
एंटीक ने Chalet होटल्स और SAMHI होटल्स को अपनी टॉप पसंद बताया है। Chalet होटल्स के लिए 1,150 रुपये और SAMHI होटल्स के लिए 230 रुपये का टारगेट दिया गया है। वहीं IHCL पर HOLD की सलाह दी गई है, जिसका टारगेट 700 रुपये रखा गया है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)