हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन यानी HPCL के मार्च तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे, लेकिन इसके बावजूद गुरुवार को कंपनी के शेयर में दबाव देखने को मिला। बीएसई पर HPCL का शेयर करीब 3.5 प्रतिशत टूटकर 376 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा।
कंपनी को चौथी तिमाही में रिफाइनिंग और मार्केटिंग कारोबार से मजबूत फायदा मिला। खासतौर पर पुराने सस्ते कच्चे तेल के स्टॉक और इन्वेंट्री गेन की वजह से मुनाफा उम्मीद से बेहतर रहा। कंपनी का तिमाही मुनाफा सालाना आधार पर करीब 46 प्रतिशत बढ़कर 4,900 करोड़ रुपये पहुंच गया। हालांकि एलपीजी पर होने वाला नुकसान तेजी से बढ़ा है। मार्च तिमाही में एलपीजी अंडर-रिकवरी बढ़कर करीब 1,350 करोड़ रुपये हो गई। वहीं पश्चिम एशिया तनाव और महंगे कच्चे तेल की वजह से आने वाली तिमाहियों को लेकर चिंता बनी हुई है।
एंटीक स्टॉक ब्रोकरेज के मुताबिक HPCL का चौथी तिमाही का प्रदर्शन उम्मीद से काफी बेहतर रहा। ब्रोकरेज का मानना है कि कम कीमत वाले पुराने कच्चे तेल के इस्तेमाल और इन्वेंट्री गेन ने कंपनी की कमाई को मजबूत सहारा दिया। ब्रोकरेज ने कहा कि विशाखापट्टनम रिफाइनरी में नया अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट कंपनी की कमाई को आगे और मजबूत कर सकता है। इसके अलावा राजस्थान की HRRL रिफाइनरी से भी आने वाले समय में फायदा मिलने की उम्मीद है।
हालांकि ऊंचे कच्चे तेल के दाम की वजह से ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 के अनुमान घटाए हैं। इसके बावजूद एंटीक ने शेयर पर खरीदारी की सलाह बरकरार रखते हुए 679 रुपये का टारगेट दिया है। यानी मौजूदा भाव से शेयर में करीब 80 प्रतिशत तक तेजी की संभावना जताई गई है।
मोतीलाल ओसवाल ने भी कंपनी के नतीजों को मजबूत बताया है। ब्रोकरेज के मुताबिक मार्केटिंग मार्जिन और इन्वेंट्री गेन की वजह से कंपनी का मुनाफा अनुमान से काफी बेहतर रहा। फर्म ने कहा कि कंपनी का कर्ज घटा है और कई बड़े प्रोजेक्ट तय समय पर आगे बढ़ रहे हैं। इससे आने वाले समय में कारोबार को फायदा मिल सकता है। मोतीलाल ओसवाल ने शेयर पर खरीदारी की सलाह बनाए रखते हुए 455 रुपये का लक्ष्य दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 17 प्रतिशत ऊपर है।
नुवामा ने HPCL को लेकर थोड़ा सतर्क रुख अपनाया है। ब्रोकरेज का कहना है कि चौथी तिमाही में कंपनी को इन्वेंट्री गेन का फायदा मिला, लेकिन आने वाली तिमाहियों में ऊंचे कच्चे तेल के दाम और कमजोर मार्केटिंग मार्जिन दबाव बढ़ा सकते हैं। फर्म ने कहा कि एलपीजी नुकसान बढ़ने और बड़े पूंजीगत खर्च की वजह से कंपनी की कमाई पर असर पड़ सकता है। नुवामा ने शेयर पर ‘रिड्यूस’ यानी हिस्सेदारी घटाने की सलाह देते हुए 372 रुपये का लक्ष्य रखा है।
ब्रोकरेज हाउसों का मानना है कि फिलहाल सबसे बड़ा जोखिम कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया का तनाव बना हुआ है। अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो तेल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि अगर हालात सामान्य होते हैं और कच्चे तेल के दाम नरम पड़ते हैं, तो HPCL जैसी कंपनियों को आने वाले समय में फायदा मिल सकता है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)