ICICI Bank Stock: वैश्विक तनाव और शेयर बाजार में जारी गिरावट का असर अब बड़े बैंकिंग शेयरों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल ICICI बैंक का शेयर सोमवार को फिसलकर 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गया। BSE पर इंट्राडे कारोबार के दौरान बैंक का शेयर गिरकर ₹1,240.75 तक आ गया। लगातार चौथे दिन गिरते हुए शेयर में इस दौरान करीब 5.4 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।
पिछले एक महीने में ICICI बैंक के शेयर में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट आई है। बाजार में यह गिरावट उस समय आई है जब ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि इसी अवधि में BSE सेंसेक्स भी लगभग 11 प्रतिशत गिरा है, यानी बैंक का शेयर बाजार की गिरावट के साथ ही दबाव में रहा है।
शेयर की इस गिरावट ने बैंक के निवेशकों की संपत्ति पर भी असर डाला है। पिछले एक महीने में ICICI बैंक की मार्केट वैल्यू करीब ₹1.2 लाख करोड़ घट गई है। डेटा के मुताबिक 16 फरवरी 2026 को बैंक का मार्केट कैप लगभग ₹10.09 लाख करोड़ था, जो अब घटकर करीब ₹8.88 लाख करोड़ रह गया है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में आई हालिया गिरावट निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित करने का मौका हो सकती है। ब्रोकरेज का कहना है कि निवेशकों को महंगे वैल्यूएशन वाले सीमेंट और कंज्यूमर स्टेपल्स शेयरों में हिस्सेदारी कम करनी चाहिए और फाइनेंशियल सेक्टर जैसे मजबूत शेयरों में निवेश बढ़ाने पर विचार करना चाहिए।
RBI ने बैंक से करीब ₹12,830 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान करने को कहा है। ये लोन करीब ₹20,000 से ₹25,000 करोड़ के पोर्टफोलियो से जुड़े हैं, जिन्हें पहले कृषि क्षेत्र के प्राथमिकता लोन के रूप में गिना गया था। हालांकि ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार इन लोन की वसूली सामान्य है और बैंक की एसेट क्वालिटी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है।
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बाजार में हाल की गिरावट के बावजूद कई ब्रोकरेज हाउस ICICI बैंक को लेकर अभी भी अच्छा नजरिया बनाए हुए हैं। Axis Securities ने इस शेयर पर BUY रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹1,700 रखा है। वहीं JM Financial ने भी शेयर पर BUY रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹1,725 का टारगेट प्राइस दिया है।
विश्लेषकों के अनुसार ICICI बैंक की एसेट क्वालिटी अच्छी है, मुनाफा लगातार स्थिर बना हुआ है और बैंक की बैलेंस शीट भी मजबूत है, इसलिए निजी बैंकिंग सेक्टर में इसकी स्थिति मजबूत बनी हुई है। उनका कहना है कि जो अतिरिक्त प्रावधान किया गया है, वह सिर्फ नियमों से जुड़ा मामला है और इससे बैंक की लंबी अवधि की बढ़त पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।