सरकार ने रक्षा खरीद को लेकर ऐसा कदम उठाया है, जो आने वाले कई सालों की दिशा तय कर सकता है। रक्षा अधिग्रहण परिषद यानी DAC ने ₹2.38 लाख करोड़ के नए प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2026 में कुल मंजूर प्रोजेक्ट्स का आंकड़ा बढ़कर ₹6.7 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह किसी भी एक वित्त वर्ष का अब तक का सबसे बड़ा स्तर है, जो साफ संकेत देता है कि सरकार रक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश करने के मूड में है।
इन मंजूरियों में सिर्फ छोटे-मोटे उपकरण नहीं, बल्कि बड़े और रणनीतिक प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इसमें मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम, ड्रोन स्ट्राइक एयरक्राफ्ट और 300 से ज्यादा धनुष गन सिस्टम शामिल हैं। यह सिर्फ खरीद नहीं, बल्कि भारत की सैन्य ताकत को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी है।
इस पूरे निवेश में सबसे ज्यादा जोर एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने पर दिया गया है। DAC ने S-400 सिस्टम के 5 नए स्क्वाड्रन खरीदने को मंजूरी दी है। इसके साथ ही ‘प्रोजेक्ट कुशा’ को भी हरी झंडी मिली है, जो भारत का अपना लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है। इसका सबसे बड़ा मतलब यह है कि भारत अब धीरे-धीरे विदेशी सिस्टम पर निर्भरता कम करना चाहता है और अपनी तकनीक विकसित कर रहा है।
प्रोजेक्ट कुशा कोई साधारण योजना नहीं है। यह ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2035 तक पूरे देश को एक मजबूत, मल्टी-लेयर मिसाइल डिफेंस शील्ड से कवर करना है। इस सिस्टम में लंबी दूरी के साथ-साथ शॉर्ट रेंज मिसाइल, क्विक रिएक्शन सिस्टम और भविष्य की लेजर टेक्नोलॉजी तक शामिल होगी। यानी भारत एक ऐसा सुरक्षा कवच तैयार कर रहा है, जो कई स्तरों पर हमलों को रोक सके।
सिर्फ मंजूरी ही नहीं, जमीन पर भी काम तेज हो रहा है। वित्त वर्ष 2026 में रक्षा मंत्रालय ने ₹2.28 लाख करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट साइन किए हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसमें तेजस LCA Mk-1A फाइटर जेट, एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर, नौसेना के लिए राफेल विमान और इंजन की बड़ी डील शामिल हैं। यह दिखाता है कि डिफेंस सेक्टर में फैसले सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि तेजी से लागू भी हो रहे हैं।
एक और बड़ा बदलाव यह है कि भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहा। FY26 में डिफेंस एक्सपोर्ट में 28% की तेज बढ़त हुई और यह ₹30,000 करोड़ से ऊपर पहुंच गया। यह संकेत है कि भारत धीरे-धीरे वैश्विक डिफेंस मार्केट में अपनी जगह बना रहा है।
इस पूरे बदलाव का सबसे बड़ा फायदा भारतीय कंपनियों को मिलने वाला है। सरकार ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर दे रही है और प्रोजेक्ट कुशा जैसे प्रोग्राम में घरेलू कंपनियों को बड़ी भूमिका दी जा रही है। Bharat Electronics Limited को इस प्रोजेक्ट का लीड इंटीग्रेटर बनाया गया है, जो दिखाता है कि देश अब अपनी क्षमता पर भरोसा बढ़ा रहा है।
एंटीक स्टॉक ब्रोकरेज की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में डिफेंस कंपनियों के लिए ग्रोथ के बड़े मौके बन सकते हैं। ब्रोकरेज ने Mazagon Dock, HAL, BEL, BDL, Zen Technologies, Solar Industries और PTC Industries जैसे शेयरों पर खरीद की सलाह दी है। इन कंपनियों को मजबूत ऑर्डर बुक, सरकारी सपोर्ट और बढ़ती मांग का सीधा फायदा मिल सकता है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)