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सरकार का बड़ा फैसला! विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड पर नहीं देना होगा टैक्स

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क्या भारत में आएगा अरबों डॉलर का नया निवेश? सरकार ने दी बड़ी राहत

Last Updated- June 05, 2026 | 12:36 PM IST
Tax

विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और देश में डॉलर का फ्लो बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने आयकर कानून में बड़ा बदलाव किया है। इसके लिए सरकार ने आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 जारी किया है, जिसे 1 अप्रैल 2026 से लागू माना जाएगा।

सरकार ने आयकर कानून की अनुसूची-4 में दो नए प्रावधान, 13D और 13E जोड़े हैं। इन प्रावधानों के तहत कुछ विदेशी निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज या जी-सेक) में निवेश से होने वाली कमाई पर कर छूट दी गई है।

13D में क्या है?

नए प्रावधान 13D के तहत विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) को सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज और इन प्रतिभूतियों की बिक्री, एक्सचेंज या ट्रांसफर से होने वाले पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) पर टैक्स नहीं देना होगा। हालांकि, यह छूट तभी मिलेगी जब निवेशक सरकार द्वारा तय किए गए प्रारूप और नियमों के तहत जरूरी जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अभी तक विदेशी निवेशकों को इक्विटी और डेट निवेश पर होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता था। जुलाई 2024 के बजट में सरकार ने इस टैक्स दर को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया था।

13E में क्या प्रावधान है?

इसी तरह नए प्रावधान 13E के तहत बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को भी सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर टैक्स छूट दी गई है। इस संस्था को भी तय नियमों के तहत जरूरी जानकारी देनी होगी।

BIS क्या है?

बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) दुनिया की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में से एक है। इसकी स्थापना 1930 में हुई थी और इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के बेसल शहर में है। दुनिया के कई केंद्रीय बैंक इसके साथ काम करते हैं और इसे अक्सर केंद्रीय बैंकों का बैंक भी कहा जाता है।

सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?

सरकार का मानना है कि सरकारी बॉन्ड लंबी अवधि के निवेश साधन होते हैं। ऐसे में इन पर टैक्स छूट देकर लंबी अवधि के विदेशी निवेश को आकर्षित किया जा सकता है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब विदेशी निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयर बाजार से बड़ी निकासी की है।

शेयर बाजार से भारी निकासी

2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 2.6 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह आंकड़ा पूरे 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से भी ज्यादा है। सिर्फ जून के पहले तीन कारोबारी दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने करीब 34,000 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। हालांकि, सरकारी बॉन्ड बाजार में तस्वीर कुछ बेहतर रही है। विदेशी निवेशकों ने इस साल फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के जरिए भारतीय डेट मार्केट में 17,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है।

रुपये पर बढ़ा दबाव

विदेशी निवेश की निकासी, बढ़ते कच्चे तेल के आयात बिल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा है। 20 मई 2026 को रुपया डॉलर के मुकाबले 96.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। इस साल अब तक रुपया करीब 7 प्रतिशत कमजोर हो चुका है। वहीं 28 फरवरी को ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से इसमें करीब 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

विदेशी मुद्रा भंडार भी घटा

रुपये को संभालने के लिए रिजर्व बैंक को कई बार डॉलर बेचकर बाजार में दखल देना पड़ा है। इसका असर विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दिखा है। 22 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.51 अरब डॉलर घटकर 681.38 अरब डॉलर रह गया। फरवरी 2026 में यह भंडार 728.49 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद पश्चिम एशिया संकट और रुपये पर दबाव के कारण इसमें गिरावट आई है।

बॉन्ड बाजार को और खोलने की तैयारी

इस बीच रिजर्व बैंक ने कुछ लंबी अवधि वाले सरकारी बॉन्ड को भी फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत शामिल करने की अनुमति दी है। इससे विदेशी निवेशक इन बॉन्ड में बिना किसी सीमा के निवेश कर सकेंगे। माना जा रहा है कि टैक्स छूट और FAR जैसी सुविधाएं मिलकर भारतीय बॉन्ड बाजार को विदेशी निवेशकों के लिए और आकर्षक बनाएंगी।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीणा ने कहा कि सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को दी गई टैक्स राहत बाजार के लिए सकारात्मक कदम है। उनके मुताबिक, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) को खत्म करने और ब्याज आय पर लगने वाले 20 फीसदी विदहोल्डिंग टैक्स को कम या समाप्त करने जैसे उपाय विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद करेंगे। इससे भारत में विदेशी पूंजी का फ्लो बढ़ सकता है, रुपये को मजबूती मिल सकती है और डेट मार्केट में लिक्विडिटी सुधर सकती है।

संतोष मीणा का मानना है कि रेपो रेट को स्थिर रखने के फैसले के साथ यह कर राहत विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने का काम करेगी। इससे भारतीय बाजारों में निवेश का माहौल बेहतर हो सकता है और लंबे समय में बाजार के मूल्यांकन को भी समर्थन मिल सकता है।

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First Published - June 5, 2026 | 10:28 AM IST

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