दुनिया के एक हिस्से में चल रहा तनाव अब सीधे भारत की कंपनियों की जेब पर असर डालने लगा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने इंडिया इंक के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। जो उम्मीदें कुछ समय पहले तक मजबूत दिख रही थीं, अब उन पर संशय के बादल छाने लगे हैं।
कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है और यही सबसे बड़ी चिंता बन चुका है। तेल और गैस की बढ़ती कीमतें कंपनियों की लागत बढ़ा रही हैं, जिससे मुनाफा दबने का खतरा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह असर अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है, लेकिन आने वाली कुछ तिमाहियों में इसका असर साफ दिख सकता है।
पहले जहां FY27 के लिए कंपनियों की कमाई में 10 से 12 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद थी, अब यह अनुमान घटने लगा है। निप्पॉन इंडिया एसेट मैनेजमेंट के एंड्रयू हॉलैंड के मुताबिक, अगर हालात जल्दी सुधरते हैं तो असर सीमित रह सकता है। लेकिन अगर तनाव लंबा खिंचता है, तो कमाई की ग्रोथ घटकर 6 से 10 प्रतिशत तक आ सकती है। यानी ग्रोथ की रफ्तार आधी हो सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि हाल के नतीजे अब तक मजबूत दिखे हैं। मार्च तिमाही में 141 कंपनियों का मुनाफा 14 प्रतिशत बढ़ा, जो पिछले 10 तिमाहियों में सबसे तेज रहा। लेकिन यह तस्वीर पुरानी है। आने वाले महीनों में असली चुनौती सामने आएगी, जब महंगे तेल और बढ़ती लागत का पूरा असर दिखेगा।
फिलहाल कच्चा तेल करीब 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अटकने से बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई रुकावट आती है, तो सप्लाई पर असर पड़ेगा और कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हालात सुधरते हैं तो तेल जल्दी नीचे आ सकता है, लेकिन इसका असर कंपनियों की कमाई में दिखने में समय लगेगा।
जेपी मॉर्गन ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि इसका असर कई सेक्टरों पर पड़ेगा। उपभोक्ता कंपनियां, ऑटो सेक्टर, बैंकिंग और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां सभी दबाव में आ सकती हैं। लागत बढ़ेगी, मार्जिन घटेगा और ऑपरेशन में भी दिक्कतें आ सकती हैं। इसी वजह से जेपी मॉर्गन ने FY27 के कमाई अनुमान में 2 से 10 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है।
एलारा कैपिटल के बिनो पथिपरमपिल के मुताबिक, पहले निफ्टी कंपनियों की कमाई में 15 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान था। लेकिन अब यह घटकर सिर्फ 7 से 8 प्रतिशत रह सकता है, अगर तेल महंगा बना रहता है और युद्ध जारी रहता है। इसका सबसे ज्यादा असर ऑटो, तेल-गैस और एयरलाइन सेक्टर पर पड़ सकता है।
एनालिस्ट कह रहे हैं कि अब नजर सिर्फ तेल पर ही नहीं, बल्कि रुपये पर भी है। अगर रुपया कमजोर होता है, तो निर्यात करने वाली कंपनियों जैसे आईटी, फार्मा और मेटल सेक्टर को फायदा हो सकता है। लेकिन आयात पर निर्भर कंपनियों के लिए यह और मुश्किलें बढ़ा सकता है।