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Hospital Stocks की सेहत में सुधार! लेकिन युद्ध के साये के बीच क्यों दांव लगा रहे हैं दिग्गज निवेशक?

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ईरान युद्ध के बावजूद भारतीय अस्पताल कंपनियों के शेयरों में सुधार की उम्मीद है, क्योंकि घरेलू मांग और बड़े पैमाने पर क्षमता विस्तार से लंबी अवधि में मुनाफा बढ़ेगा

Last Updated- April 05, 2026 | 9:29 PM IST
Hospital
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

खाड़ी युद्ध शुरू होने के बाद से ही अस्पताल कंपनियों के शेयर दबाव में हैं। प्रमुख सूचकांक के मुकाबले इनका प्रदर्शन कमजोर रहा है। चिंता का कारण यह है कि ईरान युद्ध का देश में मेडिकल टूरिज्म पर बुरा असर पड़ सकता है। अस्पतालों में युद्ध क्षेत्र और उसके आस-पास के देशों के भी मरीज आते हैं, लेकिन कुछेक अस्पतालों को छोड़कर बाकी की कमाई पर इसका असर बहुत कम (एक अंक में) पड़ता है।

ज्यादातर ब्रोकरों का मानना है कि इसका असर कुछ समय के लिए ही है और जब हालात सामान्य होंगे, तो इसमें तेजी से सुधार आएगा। विश्लेषक इस क्षेत्र के भविष्य को लेकर काफी आशावादी हैं, क्योंकि इसमें मांग बढ़ाने वाले कई कारण हैं और लगातार विस्तार भी हो रहा है, जिससे अगले कुछ वर्षों में कमाई में बढ़ोतरी होगी। 

जहां एक तरफ बांग्लादेश भारतीय अस्पतालों के लिए सबसे बड़ा बाजार है और सबसे ज्यादा मेडिकल टूरिस्ट यहीं से आते हैं, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम एशिया दूसरा सबसे बड़ा बाजार है, जहां से सूचीबद्ध भारतीय अस्पतालों की कुल अंतरराष्ट्रीय बिक्री का 5 से 40 प्रतिशत हिस्सा आता है। कोटक सिक्योरिटीज के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में आर्टेमिस मेडिकेयर सर्विसेज, मैक्स हेल्थकेयर, फोर्टिस हेल्थकेयर, ग्लोबल हेल्थ (मेदांत) और यथार्थ हॉस्पिटल में इस क्षेत्र से काफी मरीज आते हैं। 

खास बात यह है कि आर्टेमिस को छोड़कर पश्चिम एशिया और अफ्रीका (पश्चिम एशिया के रास्ते विमान सुविधा) से आने वाला मेडिकल टूरिज्म वैल्यू के हिसाब से कुल बिक्री का सिर्फ 1 से 4 प्रतिशत ही है। यह बात ब्रोकरेज के अलंकार गरुडे के नेतृत्त्व वाले विश्लेषकों ने बताई। हॉस्पिटल सेक्टर में कोटक सिक्योरिटीज के प्रमुख पसंदीदा शेयर अपोलो हॉस्पिटल्स, रेनबो चिल्ड्रेंस मेडिकेयर और मेदांत हैं।

जेफरीज रिसर्च का मानना है कि ईरान युद्ध को देखते हुए हॉस्पिटल क्षेत्र के मार्जिन पर कुछ दबाव पड़ सकता है, हालांकि अब तक उत्पादन लागत का दबाव काबू में रहा है। ब्रोकरेज के अनुसार अस्पताल अनुकूल फॉरेक्स और कीमतों में छोटी-मोटी बढ़ोतरी के जरिये लागत का दबाव कम कर पाएंगे। ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि वे पश्चिम एशिया से आने वाले मरीजों की संख्या में आई कमी की भरपाई भारतीय मरीजों से कर सकते हैं। 

अल्पावधि को छोड़ भी दें तो ब्रोकरेज फर्मों को उम्मीद है कि मौजूदा विस्तार और मांग संबंधित कई बदलावों के कारण अस्पतालों के लिए वृद्धि दर ऊंचे स्तर पर बनी रहेगी। इस क्षेत्र की सूचीबद्ध कंपनियों ने वित्त वर्ष 2020-25 के दौरान 15.5 प्रतिशत राजस्व वृद्धि और 25 प्रतिशत परिचालन लाभ वृद्धि दर्ज की। 14,000 बेड के जुड़ने के बावजूद मार्जिन में 780 आधार अंक की वृद्धि देखी गई, क्योंकि 70 प्रतिशत क्षमता अधिग्रहण और पुराने सुविधाओं में सुधार से जुड़ी थी। इससे अस्पतालों को मार्जिन में मामूली गिरावट के बावजूद कम लागत पर अपनी क्षमता बढ़ाने में मदद मिली।

इक्विरस सिक्योरिटीज का अनुमान है कि अगले 3-4 वर्षों में 23,039 बेड के साथ अगला विस्तार चक्र बड़ा होगा, हालांकि पिछले चक्र में पुरानी सुविधाओं के उन्नयन और अधिग्रहण की तुलना में अब ग्रीनफील्ड यानी पूरी तरह से नई परियोजनाओं के ज्यादा होने की उम्मीद है। ब्रोकरेज का कहना है कि पुराने अस्पतालों के उन्नयन या दोनों के अनुकूल मिश्रण वाले हॉस्पिटल निकट से मध्यम अवधि में तेजी से बढ़ेंगे और मार्जिन को बेहतर बनाए रखेंगे।

ब्रोकरेज फर्म में विश्लेषक भारत सेली और विनय जैन को उम्मीद है कि अगले चार साल में इस सेक्टर में 18-20 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि देखने को मिलेगी। इसकी वजह कुछ संरचनात्मक कारक हैं, जैसे- लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों का बढ़ता बोझ, उम्रदराज होती बादी, बीमा की बढ़ती पहुंच और सीजीएचएस टैरिफ में बदलाव। उनके कवरेज दायरे में, अपोलो हॉस्पिटल्स और केआईएमएस पसंदीदा शेयर हैं। उन्हें उम्मीद है कि मैक्स हेल्थकेयर और फोर्टिस हेल्थकेयर बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

अपोलो हॉस्पिटल्स अधिकांश ब्रोकरेज फर्मों की शीर्ष पसंद है। सिटी रिसर्च बाजार के इस दिग्गज पर मजबूत अस्पताल व्यवसाय, डिजिटल लाभप्रदता की राह पर तेजी से बढ़ते फार्मेसी व्यवसाय और लंबी अवधि के औसत से नीचे मूल्यांकन के कारण सकारात्मक है।

एचएसबीसी रिसर्च ने मैक्स हेल्थकेयर की रेटिंग बढ़ाई है। उसका मानना है कि अपनी कमाई को सहारा देने के लिए कंपनी के पास विकास के पर्याप्त तरीके मौजूद हैं। ब्रोकरेज का यह सकारात्मक नजरिया अब से लेकर वित्त वर्ष 2028 के बीच 2,240 बेड (क्षमता में 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी) के जुड़ाव के कारण है। इनमें से 60 प्रतिशत बेड ‘ब्राउनफील्ड’ श्रेणी के होंगे।

इसके अलावा, नोएडा और द्वारका में हाल में शुरू किए गए बड़े अस्पतालों के विस्तार और सीजीएचएस मरीजों के बड़े समूह तक पहुंच भी कंपनी के लिए मददगार साबित हो रही है। इसकी मदद से वह नए अस्पतालों में बेड की क्षमता तेजी से बढ़ा रही है और अपने निश्चित खर्चों को पूरा कर रही है।  ऐक्सिस डायरेक्ट ने फोर्टिस हेल्थकेयर को ‘खरीदें’ रेटिंग दी है।

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First Published - April 5, 2026 | 9:28 PM IST

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