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धड़ाम हुआ बाजार: पश्चिम एशिया युद्ध से भारतीय निवेशकों के $447 अरब स्वाहा, निफ्टी के मूल्यांकन में गिरावट

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पश्चिम एशिया संघर्ष ने भारतीय बाजार से 447 अरब डॉलर पोंछ दिए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की निकासी ने बाजार में कोविड जैसा संकट खड़ा कर दिया है

Last Updated- March 15, 2026 | 11:16 PM IST
stock market crash
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत का बाजार पूंजीकरण लगभग 447 अरब डॉलर घटकर 4.7 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर रह गया है। इससे पहले इस तरह की गिरावट कोविड-19 के दौरान मार्च 2020 में देखी गई थी।

वैश्विक स्तर पर बाजारों में भारी बिकवाली हो रही है। दुनिया भर के बाजारों का कुल पूंजीकरण 8.5 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा गिरकर 148.9 लाख करोड़ डॉलर रह गया है। अकेले अमेरिकी बाजार का पूंजीकरण लगभग 2.75 लाख करोड़ डॉलर घटा है। अमेरिका का कुल बाजार पूंजीकरण (एमकैप) अभी 69.3 लाख करोड़ डॉलर है जबकि इस महीने की शुरुआत में यह 72 लाख करोड़ डॉलर था। जापान, फ्रांस, जर्मनी और दक्षिण कोरिया जैसे अन्य बड़े बाजारों को भी  

पश्चिम ए​शिया में चल रहे संघर्ष के कारण अपने बाजार मूल्य में भारी गिरावट का सामना करना पड़ा है।

मार्च 2020 में कोविड के समय भारत के शेयर बाजार का एमकैप 508 अरब डॉलर घटकर 1.5 लाख करोड़ डॉलर रह गया था। दुनिया भर के बाजारों में कुल एमकैप 11.7 लाख करोड़ डॉलर की भारी गिरावट के साथ 68.5 लाख करोड़ डॉलर रह गया था। बाजारों में आई व्यापक गिरावट निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाती है। प​श्चिम ए​शिया में संघर्ष वैश्विक आर्थिक विकास को कमजोर कर सकता है और आपूर्ति में बाधा पैदा कर सकता है।

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी और होर्मुज स्ट्रेट से ईंधन आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट आने की आशंका ने वित्तीय बाजारों को अस्थिर कर दिया है। ब्रेंट क्रूड जो युद्ध शुरू होने से पहले लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल था अभी लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।

तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए विशेष रूप गंभीर मामला है क्योंकि यह दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है, चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, रुपया कमजोर हो सकता है और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। ये कारक कंपनियों के मुनाफे पर भारी पड़ सकते हैं और निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर सकते हैं।

पिछले दो वर्षों में आई जबरदस्त तेजी के बाद, ऊंचे मूल्यांकन के कारण भारतीय शेयरों में बिकवाली और भी बढ़ गई है। महीने की शुरुआत में निफ्टी अपने एक साल के आगे की कमाई के अनुमान के 19.5 गुना पर कारोबार कर रहा था। मगर हालिया गिरावट के बाद इसका प्राइस टु अर्निंग मल्टीपल यानी पीई घटकर 17.8 गुना रह गया जो उभरते बाजारों के अनुरूप है।

कोविड के दौरान निफ्टी का पीई गुणक मार्च 2020 के आखिर में 16.3 गुना से घटकर 13 गुना पर आ गया था। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार निकासी से दबाव और बढ़ गया है। इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों ने 64,000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे हैं।

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First Published - March 15, 2026 | 11:16 PM IST

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