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Power Demand: मई में टूटा बिजली मांग का रिकॉर्ड! 271 GW पर पहुंचा भारत, आगे क्या होगा?

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वित्त वर्ष 2025-26 बिजली क्षेत्र के लिए अपेक्षाकृत कमजोर रहा था। उस दौरान लंबा मानसून और सामान्य से कम ठंड पड़ने के कारण बिजली की मांग पर असर पड़ा था

Last Updated- June 05, 2026 | 3:07 PM IST
power demand

देश में बिजली की मांग एक बार फिर नए रिकॉर्ड बना रही है। भीषण गर्मी, बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और बिजली की खपत में लगातार इजाफे के चलते मई 2026 में भारत की अधिकतम बिजली मांग 271 गीगावाट (GW) तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले मई 2024 में 250 गीगावाट की मांग का रिकॉर्ड बना था, जबकि पिछले वित्त वर्ष में अधिकतम मांग 245 गीगावाट रही थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत जिस तरह हुई है, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि देश में बिजली की मांग एक नए विकास चक्र में प्रवेश कर चुकी है। मई के रिकॉर्ड आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता के साथ-साथ ऊर्जा भंडारण (स्टोरेज) पर भी बड़े निवेश की जरूरत होगी।

दिन में मांग पूरी हुई, लेकिन शाम को दिखी कमी

मई के दौरान दिन के समय सौर ऊर्जा उत्पादन की मदद से बिजली की पूरी मांग पूरी की गई। हालांकि, शाम के समय जब सौर ऊर्जा उत्पादन कम हो जाता है, तब स्थिति चुनौतीपूर्ण रही। इस दौरान अधिकतम मांग 246 गीगावाट तक पहुंची, जो अपने आप में नया रिकॉर्ड है।

कुछ दिनों में शाम के पीक ऑवर के दौरान 1 से 4 गीगावाट तक बिजली की कमी भी दर्ज की गई। इससे साफ है कि भविष्य में बैटरी स्टोरेज और पंप्ड स्टोरेज जैसी परियोजनाओं की अहमियत और बढ़ने वाली है।

बिजली खपत और उत्पादन दोनों में तेज बढ़ोतरी

मई 2026 में बिजली की कुल मांग 165 बिलियन यूनिट (BU) रही, जो पिछले साल की तुलना में 12 फीसदी अधिक है। वहीं बिजली उत्पादन भी 10 फीसदी बढ़कर 175 बिलियन यूनिट तक पहुंच गया।

अप्रैल में भी स्थिति मजबूत रही थी। उस महीने देश की अधिकतम बिजली मांग 256 गीगावाट रही, जो सालाना आधार पर 9 फीसदी ज्यादा थी। अप्रैल और मई को मिलाकर वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में बिजली उत्पादन 341 बिलियन यूनिट तक पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 8 फीसदी अधिक है।

पिछले साल कमजोर रही थी मांग

इसके विपरीत, वित्त वर्ष 2025-26 बिजली क्षेत्र के लिए अपेक्षाकृत कमजोर रहा था। उस दौरान लंबा मानसून और सामान्य से कम ठंड पड़ने के कारण बिजली की मांग पर असर पड़ा था। पूरे वित्त वर्ष में बिजली उत्पादन वृद्धि सिर्फ 0.8 फीसदी रही थी। इसी वजह से मौजूदा वित्त वर्ष में वृद्धि के आंकड़े और भी मजबूत दिखाई दे रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कम आधार और मजबूत आर्थिक गतिविधियों के चलते इस साल बिजली मांग में 6-7 फीसदी की वृद्धि संभव है।

नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही

देश की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता अप्रैल 2026 के अंत तक बढ़कर 537 गीगावाट हो गई। इसमें 228 गीगावाट क्षमता नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की है। यानी कुल क्षमता में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी 42 फीसदी तक पहुंच चुकी है। अप्रैल में जो करीब 5 गीगावाट नई क्षमता जुड़ी, उसमें लगभग 93 फीसदी हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा का था। अकेले सौर ऊर्जा की क्षमता में करीब 4 गीगावाट का इजाफा हुआ। यह बदलाव भारत के ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से हो रहे ट्रांजिशन को दर्शाता है, जहां पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ सौर और पवन ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

2036 तक क्षमता दोगुनी करने की तैयारी

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की दीर्घकालिक योजना के अनुसार, देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता वित्त वर्ष 2035-36 तक बढ़कर 1,121 गीगावाट हो सकती है। यह मौजूदा क्षमता से दोगुने से भी अधिक है। इसके साथ ही 174 गीगावाट और 888 गीगावाट-घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने की योजना है। इसमें पंप्ड स्टोरेज और बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं शामिल होंगी। इसका उद्देश्य शाम के समय बढ़ती मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को कम करना है।

हालांकि, नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने के बावजूद कोयला आधारित बिजली उत्पादन की भूमिका बनी रहेगी। सीईए के अनुमान के मुताबिक 2036 तक कोयला आधारित क्षमता 315 गीगावाट तक पहुंच सकती है और कुल बिजली उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 50 फीसदी से अधिक रहेगी।

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कोयले की स्थिति फिलहाल आरामदायक

मई के दौरान बिजली संयंत्रों के पास 4.9 करोड़ टन कोयला भंडार उपलब्ध था, जो लगभग 16 दिनों की जरूरत के बराबर है। इससे निकट भविष्य में ईंधन आपूर्ति को लेकर कोई बड़ी चिंता नजर नहीं आती। हालांकि, अप्रैल में कोयला उत्पादन में 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद निजी और कैप्टिव खदानों से उत्पादन बढ़ने के कारण कुल आपूर्ति पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।

बिजली की कीमतों में भी आया उछाल

रिकॉर्ड मांग का असर बिजली बाजार पर भी दिखने लगा है। बिजली एक्सचेंज के डे-अहेड मार्केट (DAM) में मई के दौरान बिजली की औसत कीमत बढ़कर 4.9 रुपये प्रति यूनिट पहुंच गई, जो एक साल पहले की तुलना में 18 फीसदी अधिक है।

इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) पर कारोबार की मात्रा भी बढ़ी है, जो मजबूत मांग और बाजार गतिविधियों का संकेत देती है।

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बिजली क्षेत्र पर सकारात्मक नजरिया

ब्रोकरेज फर्म एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का मानना है कि भारत में बिजली मांग और क्षमता विस्तार का बहुवर्षीय चक्र शुरू हो चुका है। बढ़ती खपत, ऊर्जा भंडारण की जरूरत, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश और मजबूत बिजली कीमतें इस क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

ब्रोकरेज ने अदाणी पावर और एसीएमई सोलर को अपनी पसंदीदा कंपनियों में शामिल किया है। इसके अलावा जेएसडब्ल्यू एनर्जी और एनटीपीसी पर भी सकारात्मक रुख बरकरार रखा गया है। वहीं पावर ग्रिड और आईईएक्स के लिए ‘होल्ड’ की सलाह दी गई है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

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First Published - June 5, 2026 | 3:07 PM IST

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