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बीमा कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट, कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ने से निवेशक चिंतित

Last Updated- June 11, 2026 | 3:19 PM IST
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जीवन बीमा कंपनियों के शेयरों में गुरुवार को दबाव देखने को मिला। एचडीएफसी लाइफ, एसबीआई लाइफ और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ के शेयर बीएसई पर अपने 52 हफ्तों के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गए। कारोबार के दौरान तीनों कंपनियों के शेयर करीब 1 फीसदी तक टूट गए। पिछले एक महीने में भी इन शेयरों में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली है। सबसे ज्यादा दबाव आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ के शेयर पर रहा, जो इस दौरान करीब 18 फीसदी गिर चुका है। वहीं एचडीएफसी लाइफ में 12 फीसदी और एसबीआई लाइफ में 9 फीसदी की गिरावट आई है। इसके मुकाबले सेंसेक्स में सिर्फ 2.6 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली।

आखिर शेयरों पर दबाव क्यों बढ़ा?

बीमा कंपनियों के शेयरों में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब मई 2026 में जीवन बीमा उद्योग की नई पॉलिसियों से मिलने वाले प्रीमियम यानी न्यू बिजनेस प्रीमियम (एनबीपी) की वृद्धि नौ महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। मई में उद्योग का कुल न्यू बिजनेस प्रीमियम 5.1 फीसदी बढ़कर 32,031 करोड़ रुपये रहा। यह वृद्धि पिछले साल मई में दर्ज 12.7 फीसदी की वृद्धि और अप्रैल 2026 की मजबूत बढ़त के मुकाबले काफी कमजोर रही।

कारोबार की रफ्तार क्यों हुई धीमी?

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सुस्ती की बड़ी वजह ग्रुप इंश्योरेंस बिजनेस में सामान्य स्थिति का लौटना और पिछले साल का ऊंचा बेस रहा है। खासकर ग्रुप सिंगल प्रीमियम सेगमेंट, जो उद्योग के कुल प्रीमियम का बड़ा हिस्सा है, उसमें केवल 2.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि व्यक्तिगत ग्राहकों से जुड़े नॉन-सिंगल प्रीमियम कारोबार में मजबूती बनी रही और इसमें 13.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट के अनुसार, ग्राहक अब ज्यादा प्रीमियम वाली पॉलिसियों की तरफ बढ़ रहे हैं, जिससे इस सेगमेंट को सहारा मिला।

निजी कंपनियां अभी भी मजबूत स्थिति में

मई में भले ही पूरे उद्योग की वृद्धि धीमी पड़ी हो, लेकिन निजी बीमा कंपनियों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। निजी कंपनियों का कारोबार सालाना आधार पर 7.7 फीसदी बढ़ा, जिससे उनकी बाजार हिस्सेदारी और मजबूत हुई। विश्लेषकों का मानना है कि बीमा उत्पादों की मांग अभी भी बनी हुई है और निजी कंपनियां लगातार नए ग्राहकों को जोड़ रही हैं।

एलआईसी की धीमी वृद्धि का भी असर

उद्योग की कुल वृद्धि पर एलआईसी की धीमी रफ्तार का भी असर पड़ा है। मई में एलआईसी का न्यू बिजनेस प्रीमियम सिर्फ 3.5 फीसदी बढ़ा, जबकि पहले इसकी वृद्धि दर ज्यादा थी। चूंकि एलआईसी का बाजार में सबसे बड़ा हिस्सा है, इसलिए उसकी धीमी वृद्धि का असर पूरे उद्योग के आंकड़ों पर दिखाई दिया।

लंबी अवधि की तस्वीर अभी भी मजबूत

केयरएज रेटिंग्स के मुताबिक, मई में वृद्धि की रफ्तार भले ही कुछ धीमी पड़ी हो, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक बीमा उद्योग का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। चालू वित्त वर्ष में अब तक कुल प्रीमियम संग्रह 19.4 फीसदी बढ़ा है। मई में उद्योग की एपीई (एनुअल प्रीमियम इक्विवेलेंट) वृद्धि घटकर 7.5 फीसदी रह गई, लेकिन निजी बीमा कंपनियों ने 14.5 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की। इसके विपरीत, एलआईसी की एपीई में 2.1 फीसदी की गिरावट आई। इसके बावजूद चालू वित्त वर्ष में अब तक उद्योग की एपीई वृद्धि 14.6 फीसदी रही है, जो निजी कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन के दम पर मजबूत मानी जा रही है।

निजी कंपनियों की ग्रोथ भी हुई थोड़ी धीमी

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में निजी बीमा कंपनियों की व्यक्तिगत एपीई वृद्धि 12 फीसदी रही, जबकि अप्रैल में यह 22 फीसदी थी। शीर्ष निजी बीमा कंपनियों की वृद्धि में भी कुछ नरमी देखने को मिली। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ की एपीई 6 फीसदी और एसबीआई लाइफ की 8 फीसदी बढ़ी। वहीं एचडीएफसी लाइफ ने ऊंचे आधार के बावजूद करीब 6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की। दूसरी तरफ, एलआईसी ने कम आधार का फायदा उठाते हुए 15 फीसदी की अच्छी वृद्धि दर्ज की। विश्लेषकों का मानना है कि मांग अभी भी बनी हुई है, लेकिन मई में कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ने से निवेशकों का उत्साह कुछ कम हुआ है।

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First Published - June 11, 2026 | 3:19 PM IST

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