मार्च 2026 में इंश्योरेंस सेक्टर में नई पॉलिसियों से मिलने वाला प्रीमियम यानी APE करीब 8.4 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2026 में इसमें 10.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली। इस ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान प्राइवेट कंपनियों का रहा, जिन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया। इसके मुकाबले एलआईसी की ग्रोथ थोड़ी सीमित रही, जिससे धीरे-धीरे प्राइवेट कंपनियों की पकड़ बाजार में मजबूत होती दिख रही है।
अगर अलग-अलग कंपनियों की बात करें तो एसबीआई लाइफ ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और इसका रिटेल APE करीब 9 प्रतिशत बढ़ा। मैक्स लाइफ ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और इसमें करीब 7 प्रतिशत की बढ़त रही। वहीं एचडीएफसी लाइफ और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल का प्रदर्शन लगभग स्थिर रहा, यानी ज्यादा बढ़त नहीं दिखी। दूसरी ओर केनरा एचएसबीसी लाइफ में हल्की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि पूरे साल के आधार पर कंपनी ने सुधार दिखाया है।
प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों का मार्केट शेयर लगातार बढ़ रहा है और वित्त वर्ष 2026 में यह बढ़कर करीब 72 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके उलट एलआईसी का मार्केट शेयर घटकर करीब 28 प्रतिशत रह गया है। इसका मतलब साफ है कि ग्राहकों का झुकाव धीरे-धीरे प्राइवेट कंपनियों की ओर बढ़ रहा है।
ग्रुप इंश्योरेंस सेगमेंट में इस बार जोरदार तेजी देखने को मिली है और इसमें करीब 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस ग्रोथ में भी प्राइवेट कंपनियों की भूमिका ज्यादा रही, जिन्होंने इस सेगमेंट में तेजी से विस्तार किया है। एलआईसी ने भी इस क्षेत्र में ग्रोथ दिखाई, लेकिन प्राइवेट कंपनियां ज्यादा आगे रहीं।
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में इंश्योरेंस सेक्टर में ग्रोथ बनी रह सकती है। खासकर प्राइवेट कंपनियां मिड-टीन्स यानी करीब 12 से 15 प्रतिशत की दर से ग्रोथ जारी रख सकती हैं। GST में मिली राहत के बाद पॉलिसी लेने वालों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, जिससे सेक्टर को और सपोर्ट मिलेगा। वैल्यूएशन के लिहाज से भी सेक्टर अभी आकर्षक माना जा रहा है।
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का मानना है कि मौजूदा समय में मैक्स लाइफ और केनरा एचएसबीसी लाइफ जैसे स्टॉक्स बेहतर संभावनाएं दिखा रहे हैं। इन कंपनियों में ग्रोथ और वैल्यूएशन का संतुलन बेहतर माना जा रहा है।
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हालांकि सेक्टर के लिए कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। अगर सरकार नियमों में बदलाव करती है या बैंक चैनल (bancassurance) और एजेंट कमीशन से जुड़े नियम कड़े होते हैं, तो इसका असर कंपनियों की ग्रोथ पर पड़ सकता है। इसलिए इन फैक्टर्स पर नजर रखना जरूरी होगा।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)