KEC इंटरनेशनल के शेयरों में मंगलवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। कंपनी का शेयर करीब 4 फीसदी टूटकर 468 रुपये के आसपास पहुंच गया। खास बात ये रही कि जब KEC का शेयर दबाव में था, उसी समय सेंसेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहा था और करीब 22 अंकों की बढ़त के साथ 75,300 के ऊपर बना हुआ था। यानी बाजार में हल्की मजबूती के बावजूद निवेशकों ने KEC के शेयर में जमकर बिकवाली की।
दरअसल, कंपनी के मार्च तिमाही के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित हुई, जिससे कई प्रोजेक्ट्स की सप्लाई और डिस्पैच में दिक्कत आई। इसके अलावा फ्रेट कॉस्ट बढ़ने, कच्चे माल के महंगे होने और मजदूरों की कमी ने भी कंपनी की कमाई पर दबाव डाला। यही वजह रही कि ज्यादातर ब्रोकरेज हाउस ने कंपनी के टारगेट प्राइस घटा दिए।
Also Read: Radico Khaitan का शेयर रिकॉर्ड हाई के करीब, जानिए क्यों ब्रोकरेज को दिख रही आगे और तेजी
जनवरी से मार्च 2026 तिमाही में कंपनी की आय करीब 7 फीसदी घटकर 63.9 अरब रुपये रह गई। वहीं ऑपरेटिंग मुनाफा यानी EBITDA करीब 17 फीसदी गिर गया। कंपनी का शुद्ध मुनाफा भी करीब 28-29 फीसदी तक टूट गया। ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी का कामकाज खासकर मिडिल ईस्ट संकट से प्रभावित हुआ। सप्लाई चेन टूटने और लॉजिस्टिक्स महंगे होने से प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी पड़ गई।
हालांकि कंपनी के पास ऑर्डर्स की कमी नहीं है। KEC के पास इस समय करीब 3.63 लाख करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक है। अगर L1 ऑर्डर भी जोड़ दें तो यह करीब 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचती है। कंपनी को ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन यानी T&D कारोबार में लगातार बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं। कंपनी ने FY26 में करीब 1.77 लाख करोड़ रुपये के T&D ऑर्डर हासिल किए। मैनेजमेंट का कहना है कि भारत में बिजली ट्रांसमिशन सेक्टर में प्राइवेट कंपनियों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है और इसका फायदा आगे KEC को मिल सकता है।
फिलहाल कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती मिडिल ईस्ट संकट बना हुआ है। इसकी वजह से सप्लाई चेन और प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा कई प्रोजेक्ट्स में पेमेंट आने में देरी हो रही है, जिससे कंपनी का वर्किंग कैपिटल बढ़ गया है। कंपनी का कर्ज भी बढ़कर करीब 67 अरब रुपये तक पहुंच गया है। ब्रोकरेज हाउसों का मानना है कि आने वाले कुछ महीनों तक कंपनी के मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है।
मोतीलाल ओसवाल ने शेयर पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस 750 रुपये से घटाकर 630 रुपये कर दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि फिलहाल मार्जिन दबाव में रह सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि में कंपनी की ग्रोथ कहानी मजबूत है। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने भी शेयर पर ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी है और 581 रुपये का टारगेट दिया है। वहीं नुवामा ने शेयर पर ‘Hold’ रेटिंग दी है और टारगेट 488 रुपये रखा है। ब्रोकरेज का कहना है कि अभी कंपनी के मार्जिन और प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी कितनी तेजी से अपने प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ाती है और सप्लाई चेन की दिक्कतों को संभाल पाती है। अगर मिडिल ईस्ट संकट कम होता है और ऑर्डर तेजी से पूरे होने लगते हैं, तो आने वाले समय में कंपनी की कमाई और मार्जिन दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)