Meesho Lock-in Expiry: ई-कॉमर्स कंपनी मीशो के शेयर आने वाले दिनों में काफी उतार-चढ़ाव दिखा सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि कंपनी के शुरुआती निवेशकों के बड़े हिस्से का लॉक-इन पीरियड खत्म होने वाला है। ऐसे में बाजार में एक साथ बड़ी मात्रा में शेयर आने की संभावना बन गई है। निवेशकों को डर है कि कई पुराने निवेशक अब मुनाफावसूली कर सकते हैं, क्योंकि IPO के बाद से शेयर में पहले ही 75 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आ चुकी है।
मंगलवार को NSE पर मीशो का शेयर करीब 193 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा और इसमें हल्की गिरावट भी देखने को मिली। बाजार की नजर अब 9 जून 2026 पर टिकी है, क्योंकि इसी दिन कंपनी के करीब 68 प्रतिशत प्री-IPO शेयरों का लॉक-इन खत्म होगा। इसके बाद 10 जून से करीब 60,000 करोड़ रुपये के शेयर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो जाएंगे। माना जा रहा है कि इनमें से कई शेयर प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेशकों के पास हैं।
बाजार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर शुरुआती निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं तो शेयर पर दबाव बढ़ सकता है। पहले भी भारत की कई इंटरनेट और डिजिटल कंपनियों में लॉक-इन खत्म होने के बाद इसी तरह भारी सप्लाई देखने को मिली थी, जिससे शेयरों में कमजोरी आई थी।
ब्रोकरेज हाउस JM Financial ने भी इसी वजह से शेयर पर ‘Reduce’ रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस 180 रुपये रखा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी अभी तक ऑपरेशनल स्तर पर मुनाफे में नहीं पहुंची है और मैनेजमेंट ने भी साफ तौर पर यह नहीं बताया कि कंपनी कब ब्रेक-ईवन हासिल करेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक मीशो का शेयर इस समय काफी महंगे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। ब्रोकरेज का कहना है कि अगर कंपनी आने वाले समय में मुनाफे में पहुंचती भी है, तब भी मौजूदा वैल्यूएशन काफी ऊंचा माना जा रहा है। इसके अलावा कंपनी फिलहाल ग्रोथ पर ज्यादा फोकस कर रही है, जिसकी वजह से मार्जिन सुधार की रफ्तार धीमी बनी हुई है।
रिपोर्ट में कंपनी के लॉजिस्टिक्स मॉडल को लेकर भी चिंता जताई गई है। पहले कंपनी ज्यादा डिलीवरी खुद संभाल रही थी, लेकिन अब इसकी हिस्सेदारी घट गई है। ऐसे में कंपनी को Delhivery और Shadowfax जैसे पार्टनर्स पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे लागत कम करने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि वैल्यू कॉमर्स सेगमेंट में मीशो की मजबूत पकड़ बनी हुई है और कंपनी ने बाजार में अलग पहचान बनाई है। लेकिन फिलहाल लॉक-इन खत्म होने के बाद आने वाली संभावित बिकवाली और मुनाफावसूली को लेकर बाजार सतर्क नजर आ रहा है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)