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मिडकैप-स्मॉलकैप का दौर आने वाला! FY27 में बदल सकती है बाजार की तस्वीर

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एआई को लेकर आईटी सेक्टर में मची हलचल के बीच एक्सपर्ट का मानना है कि FY27 में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर बाजार की अगुआई कर सकते हैं, जबकि निफ्टी नए उच्च स्तर छू सकता है।

Last Updated- February 16, 2026 | 9:58 AM IST
Jignesh Desai, chief executive officer for institutional equities at Centrum Broking
Jignesh Desai, chief executive officer for institutional equities at Centrum Broking

सेंट्रम ब्रोकिंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (इंस्टिट्यूशनल इक्विटी) जिग्नेश देसाई ने पुनीत वाधवा को ईमेल साक्षात्कार में बताया कि 2026-27 में आय वृद्धि ज्यादा व्यापक आधार वाली होने की संभावना है, लेकिन प्रमुख उछाल मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों से आने की उम्मीद है। संपादित अंश:

अगले छह महीनों में भारतीय शेयर बाजारों के लिए प्रमुख जोखिम क्या हैं?

एक प्रमुख जोखिम वैश्विक मुद्रा संकट है। अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उल्लेखनीय वृद्धि होती है या डॉलर में मजबूती आती है तो इससे उभरते बाजारों के लिए वित्तीय स्थितियां कठिन हो सकती हैं और भारत में पूंजी प्रवाह अस्थायी रूप से बाधित हो सकता है, भले ही घरेलू बुनियादी आधार बरकरार रहें। दूसरा जोखिम इस बात में निहित है कि आगे चलकर आय कैसी रहेगी। हालांकि मेरा मानना है कि घरेलू मांग को बढ़ावा देने के लिए सरकार के विभिन्न कदमों के कारण आय में वृद्धि की संभावना है। बाजार कई क्षेत्रों में मांग और मार्जिन में क्रमिक सुधार को ध्यान में रख रहे हैं। अगर यह सुधार असमान या उम्मीद से धीमी साबित होती है, विशेष रूप से विवेकाधीन और निर्यात वाले सेगमेंटों में तो इससे बाजार की तेजी सीमित हो सकती है।

तीसरा जोखिम भू-राजनीतिक या व्यापार संबंधी अस्थिरता है। हालांकि व्यापार का व्यापक रुझान सकारात्मक है। लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक अप्रत्याशित घटनाएं सेंटिमेंट को तेजी से प्रभावित कर सकती हैं और अल्पकालिक जोखिम से बचने के रुझान को जन्म दे सकती हैं।

अगर बाजार यहां से ऊपर की ओर बढ़ते हैं तो इसकी अगुआई कैन कर सकता है?

नेतृत्व घरेलू चक्र से आने की संभावना है, जो वित्तीय क्षेत्र से आएगा। 2025-26 की तीसरी तिमाही में इस क्षेत्र के प्रदर्शन में पहले ही उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है : मार्जिन में वृद्धि हुई है, ऋण लागत नियंत्रण में है और परिसंपत्ति गुणवत्ता के रुझान स्थिर हैं। चौथी तिमाही आमतौर पर ऋणदाताओं के लिए सबसे मजबूत होती है और आय की गति स्पष्ट रूप से अधिक अनुकूल हो रही है, जिससे यह क्षेत्र अगुआई के लिए अच्छी तरह दिख रहा है। पूंजीगत वस्तुएं और औद्योगिक क्षेत्र भी ध्यान देने योग्य प्रमुख क्षेत्र हैं। ऑटोमोटिव क्षेत्र इसमें शामिल हो सकता है। उसे इनपुट लागत में कमी और मांग में धीरे-धीरे रिकवरी से सहारा मिलेगा, विशेष रूप से उन सेगमेंटों में, जहां उत्पाद चक्र और मिश्रण में सुधार अनुकूल हैं।

क्या आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) से संबंधित चिंताएं और आईटी शेयरों में इस कारण हो रही बिकवाली जरूरत से ज्यादा है?

जी हां, भारतीय आईटी शेयरों में हो रही बिकवाली और एआई से संबंधित चिंताओ का हल्ला कुछ ज्यादा ही हैं। पहली बात तो यह है कि भारतीय आईटी कंपनियां एआई आधारित सौदों का रुख कर रही हैं, जैसा कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में सौदों के कुल अनुबंध मूल्य में वृद्धि से स्पष्ट होता है। एआई आधारित टूल, जिनमें से कई अभी भी बढ़त के चरण में हैं, पहले से ही उपयोग में लाए जा रहे हैं और इनसे नए कारोबारी अवसरों को बढ़ावा मिलना चाहिए।

आगे चलकर, निश्चित मूल्य वाली परियोजनाओं पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। इससे आईटी कंपनियों को ऑटोमेशन के माध्यम से लाभ मार्जिन बढ़ाने में मदद मिलेगी। हालांकि कीमतों में कुछ गिरावट आ सकती है। मगर वॉल्यूम में वृद्धि की संभावना है, जिससे शीर्ष स्तर की आईटी कंपनियों के लिए कुल कार्य मूल्य में स्थिर मुद्रा में सालाना 5 से 6 फीसदी की वृद्धि हो सकेगी।

अंत में, अधिकांश आईटी कंपनियों का मूल्यांकन उनके पांच साल के औसत से कम है। मौजूदा स्तर पर चुनिंदा आईटी शेयरों को खरीदना समझदारी भरा कदम होगा। हमारी शीर्ष पसंद इन्फोसिस, एलटीएम (पहले एलटीआईमाइंडट्री) और कोफोर्ज हैं।

वित्त वर्ष 27 के लिए आय का परिदृश्य कैसा है?

वित्त वर्ष 2027 के लिए आय वृद्धि अधिक व्यापक होने की संभावना है। इसमें प्रमुख बढ़त मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों से आएगी। लार्जकैप शेयरों से स्थिर और अनुमानित आय प्राप्त मिलती रहेगी। लेकिन उनमें प्रतिस्पर्धा अधिक है, जिससे तीव्र वृद्धि की संभावना सीमित हो जाती है। इसके विपरीत, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियां महत्त्वपूर्ण डीलिवरेजिंग के दौर से उभर रही हैं और जिनका लिवरेज लगभग 50 फीसदी तक कम हो गया है और मूल्यांकन पहले के उच्चतम स्तर से 30-40 फीसदी तक गिर गया है। जैसे-जैसे आय की स्पष्टता बढ़ेगी और ऑपरेटिंग लिवरेज का प्रभाव दिखने लगेगा, इस सेगमेंट में अपग्रेड और तेज उछाल की सबसे अधिक संभावना है।

जोखिम की दृष्टि से, व्यापार से जुड़े क्षेत्र, विशेष रूप से अमेरिका से जुड़े सेक्टर, जैसे कपड़ा उद्योग वैश्विक मांग और नीतिगत परिणामों के प्रति संवेदनशील बने हुए हैं। भू-राजनीतिक या ऊर्जा संबंधी व्यवधानों में किसी भी प्रकार की वृद्धि निकट भविष्य में नकारात्मक असर डाल सकती है। कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2027 में मध्यम और छोटे पूंजीगत शेयरों का दबदबा रहने की संभावना है, जिसका मुख्य कारण कम निवेश, बेहतर आय और बेहतर जोखिम-लाभ संतुलन है।

आपकी निवेश रणनीति?

2025 में वैश्विक अनिश्चितता और आय पूर्वानुमान में असमानता को देखते हुए हमारी रणनीति पूंजी संरक्षण और चयनात्मक निवेश पर केंद्रित थी। 2026 में हमारा रुख अधिक सकारात्मक हो गया है। कम निवेश और आय में सुधार के स्पष्ट संकेतों के साथ निफ्टी के अगले छह महीनों में 27,500-28,000 के स्तर पर नए उच्च स्तर पर पहुंचने की संभावना है।

पोर्टफोलियो के दृष्टिकोण से, हम वित्तीय, पूंजीगत सामान, ऑटोमोबाइल और विनिर्माण-आधारित थीम, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सेवाएं शामिल हैं, में ओवरवेट बने हुए हैं, क्योंकि इनमें आय की गति और परिचालन लिवरेज में सुधार हो रहा है।

आप कब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को भारतीय शेयर बाजार में लौटते हुए देखते हैं?

एफआईआई के जोश के साथ लौटने की संभावना तभी है जब वृद्धि, मुद्रा स्थिरता और वास्तविक आय में निरंतर सुधार के बारे में अधिक स्पष्टता हो। इस लिहाज से व्यापार समझौते एक अहम उत्प्रेरक के रूप में काम कर सकते हैं।

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First Published - February 16, 2026 | 9:58 AM IST

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