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पश्चिम एशिया संकट से होटल उद्योग की रफ्तार धीमी, लेकिन मांग में सुधार की उम्मीद बरकरार

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भूराजनीतिक घटनाओं का असर लंबे समय तक न पड़ा तो यह सेक्टर मांग सुधरने का फायदा उठाने को लेकर बेहतर स्थिति में

Last Updated- June 07, 2026 | 10:52 PM IST
Indian Hotel stocks

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर 2025-26 की मार्च तिमाही में अग्रणी सूचीबद्ध होटल श्रृंखलाओं के प्रदर्शन पर पड़ा। यह असर इस तिमाही में भी बने रहने की संभावना है। हालांकि तिमाही के दौरान कमरों के किराए में थोड़ी बढ़ोतरी हुई, लेकिन ऑक्युपेंसी के स्तर में कमजोरी के कारण चौथी तिमाही के नतीजों पर बुरा असर पड़ा। परिचालन मानकों पर दबाव के बावजूद ज्यादातर ब्रोकरेज का मानना ​​है कि अगर भूराजनीतिक घटनाओं का असर लंबे समय तक न पड़ा तो यह सेक्टर धीरे-धीरे मांग में सुधार का फायदा उठाने को लेकर अच्छी स्थिति में है, क्योंकि बैलेंस शीट मजबूत हैं और नए कमरे भी जोड़े जा रहे हैं।

होटल उद्योग की बड़ी कंपनियों का रिटर्न के मोर्चे पर प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है और पिछले महीने में ज्यादातर कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले कमजोर रहा है। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही के नतीजे, ऑक्युपेंसी का रुख (वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही) और मांग में सुधार इस सेक्टर के लिए आने वाले समय में अहम होंगी।

कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार इस सेक्टर का प्रदर्शन वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में औसत रहा। इस दौराम प्रति उपलब्ध कमरे से होने वाली आय (आरईवीपीएआर) में सालाना आधार पर 5.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 6,868 रुपये प्रति दिन हो गई। पश्चिम एशिया के भूराजनीतिक तनाव के कारण विदेश यात्राओं में कमी आई, जिसका असर मांग पर पड़ा।

प्रति कमरे आय में वृद्धि को सालाना आधार पर 6.3 फीसदी की बढ़त से सहारा मिला। लिहाजा, कमरे का किराया 10,100 रुपये प्रति दिन हो गया। लेकिन वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में ऑक्युपेंसी में सालाना आधार पर 67 आधार अंकों की गिरावट आई और यह 68 % रही। इसने इस बढ़त का असर कुछ कम कर दिया।

मार्च में भूराजनीतिक चुनौतियों की वजह से माइस-एमआईसीई (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंस और एग्जिबिशन) आयोजन रद्द हुए, कुछ इंटरनैशनल होटलों में ऑक्युपेंसी कम रही और भारत में विदेशी सैलानी की संख्या भी कम रही, फिर भी बाजार की अग्रणी इंडियन होटल्स ने शानदार प्रदर्शन किया।

एकल कारोबार में 13 फीसदी की वृद्धि में कमरे की दरों में 9 फीसदी की बढ़ोतरी का योगदान रहा, जबकि ऑक्युपेंसी रेश्यो 200 आधार अंक बढ़कर 82 फीसदी पर पहुंच गया। राजस्व में वृद्धि को खाने-पीने की चीजों (6% बढ़ोतरी) और प्रबंधन शुल्क (नए अनुबंधों के कारण 30% बढ़ोतरी) से भी सहारा मिला।

बाजार पूंजीकरण के हिसाब से दूसरी सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनी आईटीसी होटल्स के मामले में कमरे की दरों में सालाना आधार पर 5 फीसदी की वृद्धि ब्रोकरेज के अनुमानों से कम रही और यह उन दूसरी कंपनियों से भी कम थी, जिन्होंने इस मामले में 6 से 15 फीसदी की वृद्धि दर्ज की थी। हालांकि मौजूदा संघर्ष की वजह से सुस्ती आई है। फिर भी होटल शृंखलाएं मांग बढ़ने की उम्मीद में निवेश कर रही हैं। इसका सबूत वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में 14,000 कमरों के लिए हुए समझौते हैं।

ब्रोकरेज फर्म के मुर्तजा आरसीवाला की अगुआई में विश्लेषकों को उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में ऑक्युपेंसी और कमरे के किराए में सुधार होगा क्योंकि पश्चिम एशियाई संकट का असर सामान्य हो रहा है और विदेशी यात्रा की मांग युद्ध से पहले के स्तर पर लौट रही है। हालांकि पिछली तिमाही में मूल्यांकन में कमी आई है, लेकिन शेयर का प्रदर्शन मौजूदा संकट के समाधान और उम्मीद से बेहतर कमरे की दर में वृद्धि पर निर्भर करेगा। एचवीएस एनारॉक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2026 में ऑक्युपेंसी सालाना आधार पर स्थिर रही, जबकि कमरे की औसत दर में 5-7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आदिदेव चट्टोपाध्याय और साईश्वर रावेकर का कहना है कि यह उनकी उम्मीद के मुताबिक ही था। मार्च से अब तक भू-राजनीतिक तनाव की वजह से कुछ समय के लिए कामकाज में रुकावट आई और विदेशी पर्यटकों के आगमन पर भी असर पड़ा। लेकिन ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 26-28 के दौरान सभी होटलों के सालाना रूम रेट में 6-8 फीसदी की बढ़ोतरी होगी, बशर्ते मांग पर भू-राजनीतिक तनाव का असर लंबे समय तक न रहे।

उम्मीद है कि यह सेक्टर मुश्किल हालात का डटकर सामना करेगा। सूचीबद्ध कंपनियों में उसके पसंदीदा शेयरों में इंडियन होटल्स, आईटीसी होटल्स, लीला पैलेस, शाले होटल्स, लेमन ट्री होटल्स और ब्रिगेड होटल्स शामिल हैं। अप्रैल का दबाव मई में भी बना रहा, जो आम तौर पर कारोबार के लिहाज से कमजोर समय माना जाता है। आईडीबीआई कैपिटल की अर्चना गुडे और पार्थ मनदेवगनी का कहना है कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच मई में मांग सुस्त रही।

देश में भीषण गर्मी और लू के कारण हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए यह समय आम तौर पर सुस्त रहता है। उन्होंने कहा कि हवाई किराए बढ़ने से ऑक्युपेंसी पर दबाव बना हुआ है, जिससे प्रमुख बाजारों में कमरों के किराए में गिरावट देखने को मिल रही है। ब्रोकरेज को इस सेक्टर में एकीकरण की उम्मीद है, जिससे भविष्य में कमरों के किराए बढ़ेंगे।

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First Published - June 7, 2026 | 10:52 PM IST

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