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मिडिल ईस्ट में कोहराम: खामेनेई की मौत के बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट की आशंका, निवेशक रहें सतर्क!

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ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत और मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव से सोमवार को शेयर बाजार टूटने की आशंका है। तेल महंगा होने से भारत में महंगाई बढ़ सकती है

Last Updated- March 01, 2026 | 3:36 PM IST
Stock Market Crash
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से सोमवार को शेयर बाजार पर बुरा असर पड़ने की उम्मीद है। अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान पर हमला किया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। ईरानी स्टेट मीडिया ने रविवार सुबह इसकी पुष्टि की। इस घटना से वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है और तेल की कीमतों में तेजी आई है।

तनाव से बाजार में रहेगा दबाव

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट का यह संकट जितना लंबा चलेगा, शेयर बाजार पर उतना ही ज्यादा असर पड़ेगा। स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीना ने बताया कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से निवेशकों का मूड और कमजोर हो गया है। खासकर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए क्रूड ऑयल की अधिक कीमतें मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ सकती है, सरकारी खजाने पर बोझ पड़ सकता है जिससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हो सकती हैं।

सोमवार को बाजार खुलते ही सतर्क या नकारात्मक रुख दिख सकता है। क्रूड कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और भू-राजनीतिक खतरा बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड, जो दुनिया का प्रमुख तेल बेंचमार्क है, 2.87 फीसदी चढ़कर 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।

Also Read: होर्मुज स्ट्रेट हुआ बंद: ईरान के इस कदम से क्या भारत में पेट्रोल-डीजल के लिए मचेगा हाहाकार?

इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट मनोरंजन शर्मा ने कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर साफ असर डाल रहा है। भारत जैसे देश के लिए, जो ज्यादा तेल बाहर से मंगाता है, महंगा तेल सीधे महंगाई बढ़ा सकता है। ऐसे माहौल में बाजार की शुरुआत कमजोर रह सकती है और दिनभर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशक अब वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो देश के ट्रेड बैलेंस और भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ेगा। फिलहाल बाजार पर इसका नकारात्मक असर दिख सकता है, और अगर यह संघर्ष लंबा चला तो बाजार की प्रतिक्रिया और भी तेज व कमजोर हो सकती है।

घरेलू और वैश्विक फैक्टर भी महत्वपूर्ण

पिछले हफ्ते बाजार पर दबाव रहा। BSE का मुख्य सूचकांक 1,527.52 अंक या 1.84 फीसदी गिरा, जबकि निफ्टी 392.6 अंक या 1.53 फीसदी नीचे आया। टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी और लगातार भू-राजनीतिक तनाव इसका कारण रहा। रिलिगेयर ब्रोकिंग के एसवीपी रिसर्च अजित मिश्रा ने इसकी जानकारी दी।

इस हफ्ते छुट्टियों की वजह से ट्रेडिंग कम होगी। मंगलवार को होली के कारण इक्विटी बाजार बंद रहेंगे। निवेशक अब घरेलू आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे। तिमाही GDP डेटा, मासिक ऑटो सेल्स फिगर, IIP और PMI नंबर आने वाले हैं। ये मांग की स्थिति बताएंगे। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन से आर्थिक आंकड़े, क्रूड की दिशा और विदेशी निवेशकों (FII) की खरीद-बिक्री बाजार को प्रभावित करेगी।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी R ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और ऑटो सेल्स जैसे आंकड़े यह बताएंगे कि बाजार में मांग कितनी मजबूत है। फिलहाल निवेशक सावधानी बरत रहे हैं और आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

(PTI के इनपुट के साथ)

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First Published - March 1, 2026 | 3:16 PM IST

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