Stock Market Crash: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 650 अंकों से ज्यादा लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 23,150 के स्तर से नीचे फिसल गया। वैश्विक संकेतों की कमजोरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों में तेज बिकवाली का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा। दक्षिण कोरिया, जापान, हांगकांग और चीन के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, अमेरिकी बाजार में नैस्डैक और एसएंडपी 500 में आई कमजोरी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद यह आशंका बढ़ गई है कि फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा। ऊंची ब्याज दरों के लंबे समय तक बने रहने की संभावना से वैश्विक इक्विटी बाजारों पर दबाव बढ़ा है।
विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। हाल के सत्रों में उनकी भारी बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया है। विदेशी पूंजी का बाहर जाना निवेशकों के भरोसे पर भी असर डाल रहा है।
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पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को ऐसी खबरें सामने आईं कि इजरायल ने पश्चिमी और मध्य ईरान में कुछ सैन्य ठिकानों पर हमला किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप कथित तौर पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से आगे किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचने की अपील कर चुके थे।
इससे पहले रविवार को ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागी थीं, जिसके जवाब में इजरायल ने जवाबी कार्रवाई की। इन घटनाओं ने अमेरिका और ईरान के बीच बने नाजुक युद्धविराम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष एम.बी. गालिबाफ ने भी आरोप लगाया कि अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और लेबनान से जुड़े समझौतों के कथित उल्लंघन ने संघर्षविराम की भावना को कमजोर किया है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार का कहना है कि ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को मजबूती दी है। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में संघर्ष गहराने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है।
तनाव बढ़ने के बीच ब्रेंट क्रूड वायदा कीमत करीब 3.7 प्रतिशत उछलकर 96.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं, लेबनान में संघर्षविराम के बावजूद नए हमलों की खबरों ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति को लेकर भी आशंकाएं तेज हो गई हैं, जिसके कारण निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया है। बढ़ती बॉन्ड यील्ड के कारण निवेशकों का रुझान शेयरों से हटकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ सकता है।
Axis Direct के रिसर्च हेड Rajesh Palviya का कहना है कि निकट अवधि में बाजार का रुख सतर्क बना हुआ है। उनके अनुसार, जब तक निफ्टी 23,500-23,550 के रेजिस्टेंस जोन के नीचे कारोबार कर रहा है, तब तक दबाव बना रह सकता है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल निफ्टी के लिए 23,100 का स्तर अहम सपोर्ट है। यदि इंडेक्स इस स्तर के नीचे लगातार बना रहता है, तो गिरावट बढ़कर 23,000 से 22,800 के दायरे तक जा सकती है। हालांकि, यदि वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौटती है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो निचले स्तरों पर निफ्टी को सहारा मिल सकता है।