मई 2026 में शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। महीने के दौरान निफ्टी करीब 1,220 अंक के दायरे में घूमता रहा, लेकिन आखिर में 1.9 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। इससे पहले अप्रैल में निफ्टी ने 7.5 फीसदी की मजबूत बढ़त दर्ज की थी। साल 2026 में अब तक निफ्टी करीब 10 फीसदी टूट चुका है।
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में बड़ी कंपनियों के शेयरों ने निवेशकों को निराश किया है। लार्जकैप इंडेक्स करीब 5 फीसदी नीचे रहा, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमश: 7 फीसदी और 1 फीसदी चढ़े हैं। पिछले पांच साल में भी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने लार्जकैप शेयरों से कहीं बेहतर रिटर्न दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने मई में लगातार तीसरे महीने भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाला। मई के दौरान एफआईआई ने करीब 4.9 अरब डॉलर की बिकवाली की। इस साल अब तक उनकी कुल निकासी 25.9 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है।
हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को मजबूत सहारा दिया है। मई में डीआईआई ने 8.7 अरब डॉलर का निवेश किया। साल 2026 में अब तक उनका कुल निवेश 41.4 अरब डॉलर रहा है।
मई में सेक्टरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। टेलीकॉम सेक्टर सबसे बड़ा विजेता रहा और इसमें 16 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा मेटल, कैपिटल गुड्स, हेल्थकेयर और पावर सेक्टर में भी अच्छी तेजी देखने को मिली।
दूसरी ओर पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, मीडिया, रियल एस्टेट और आईटी शेयरों में दबाव रहा। निफ्टी के शेयरों में अडानी एंटरप्राइजेज, टाटा मोटर्स, ग्रासिम, एशियन पेंट्स और अदाणी पोर्ट्स सबसे बड़े गेनर रहे। वहीं ओएनजीसी, एसबीआई, आईटीसी, पावर ग्रिड और टीसीएस में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, मई में दक्षिण कोरिया, ताइवान, जापान और अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों ने भारतीय बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं भारत, चीन, ब्राजील और इंडोनेशिया के बाजार गिरावट के साथ बंद हुए।
पिछले 12 महीनों में डॉलर के हिसाब से एमएससीआई इंडिया इंडेक्स 11 फीसदी गिरा है, जबकि एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स 51 फीसदी चढ़ा है। इससे साफ है कि भारतीय बाजार ने उभरते बाजारों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है।
मार्च तिमाही के नतीजे बाजार के लिए राहत लेकर आए। बैंकिंग, मेटल, टेलीकॉम, आईटी और ऑटो सेक्टर की कंपनियों ने अच्छा प्रदर्शन किया। निफ्टी कंपनियों का मुनाफा भी 4 फीसदी बढ़ा। हालांकि रिलायंस इंडस्ट्रीज और इंटरग्लोब एविएशन के कमजोर नतीजों का असर कुल आंकड़ों पर पड़ा।
रिपोर्ट का कहना है कि हालिया गिरावट के बाद निफ्टी का वैल्यूएशन अब उसके ऐतिहासिक औसत से नीचे आ गया है। यानी बाजार पहले के मुकाबले कम महंगा दिख रहा है। कई सेक्टर अभी अपने लंबे समय के औसत मूल्यांकन से नीचे कारोबार कर रहे हैं, जिनमें निजी बैंक, कंज्यूमर, टेक्नोलॉजी और रिटेल सेक्टर शामिल हैं।
मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि भारतीय बाजार के लिए लंबी अवधि की तस्वीर अब भी सकारात्मक है। हालांकि निकट भविष्य में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे माल की बढ़ती कीमतें बाजार की दिशा तय कर सकती हैं। अगर कमोडिटी कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों पर पड़ सकता है।
ब्रोकरेज की पसंद में ऑटो, पीएसयू बैंक, विविध वित्तीय कंपनियां, मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी सेक्टर शामिल हैं। वहीं ऑयल एंड गैस, निजी बैंक, मेटल, एफएमसीजी, आईटी और यूटिलिटी सेक्टर को लेकर यह अपेक्षाकृत कम सकारात्मक है।
निफ्टी-50 शेयरों में मोतीलाल ओसवाल ने भारती एयरटेल, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाइटन, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इटरनल, टाटा स्टील, इंफोसिस और इंटरग्लोब एविएशन को अपनी पसंदीदा कंपनियों में शामिल किया है।
वहीं निफ्टी से बाहर की कंपनियों में टीवीएस मोटर, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी, ग्रो, इंडियन होटल्स, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, लेंसकार्ट, वारी एनर्जी, कोफोर्ज, रैडिको खेतान और डेल्हीवरी पर ब्रोकरेज ने भरोसा जताया है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)