इन्वेस्को ऐसेट मैनेजमेंट (इंडिया ) अपने स्वामित्व में बदलाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब विस्तार के नए दौर में प्रवेश कर रही है। कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ सौरभ नानावटी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में कहा कि फ़ंड हाउस की योजना अपने वितरण का विस्तार करने, योजनाओं की नई श्रेणी में प्रवेश करने और बाजार में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने की है।
नानावटी ने कहा, हमारे काम करने के तरीके या निवेश प्रक्रिया में बिल्कुल भी कोई बदलाव नहीं आया है। अब जो बदलाव आया है, वह यह है कि संयुक्त उद्यम के तौर पर हम कारोबार को और ज्यादा व्यापक नजरिये से बढ़ाना चाहते हैं। इंडसइंड होल्डिंग्स ने नवंबर 2025 में ऐसेट मैनेजमेंट फर्म में 60 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण पूरा कर लिया जबकि अमेरिका की इन्वेस्को के पास अभी 40 फीसदी हिस्सेदारी बरकरार है।
अपनी वृद्धि की कोशिशों के तहत फंड हाउस अपनी भौतिक मौजूदगी को अभी के करीब 40 शहरों से बढ़ाकर इस साल 90 से ज्यादा शहरों तक करने की योजना बना रहा है। उसका मध्यावधि लक्ष्य 150-200 शहरों तक पहुंचना है, खासकर मझोले और छोटे बाजारों में। उसे इस साल अपना गिफ्ट सिटी लाइसेंस भी मिलने की उम्मीद है।
वितरण के विस्तार के साथ-साथ फर्म अपनी पेशकशें बढ़ाने के लिए खास पैसिव इन्वेस्टमेंट टीम बना रही है, स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (एसआईएफ) के तहत योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है। भविष्य में उसका ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट रणनीतियों में उतरने का भी इरादा है।
अपने विस्तृत शाखा नेटवर्क के अलावा फंड हाउस का इंससइंड बैंक के साथ जुड़ाव उसकी वितरण पहुंच और मज़बूत बना सकता है। सीईओ के अनुसार जहां फर्म का लक्ष्य अपनी म्युचुअल फंड पेशकशों का विस्तार करना है, वहीं उसका मुख्य ध्यान ऐक्टिव इक्विटी सेगमेंट पर ही रहेगा।
अमेरिका की कंपनी इन्वेस्को की भारतीय शाखा ने 2008 में अपना म्युचुअल फंड (एमएफ ) कारोबार शुरू किया था। वह भारत में सबसे लंबे समय से काम कर रहे वैश्विक परिसंपत्ति प्रबंधकों में से एक है। हाल के वर्षों में इस फंड हाउस के कारोबार में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। पिछले 5 सालों में इसकी औसत एयूएम करीब चार गुना बढ़ी है, जो जनवरी-मार्च 2026 की अवधि में बढ़कर करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
नानावटी ने कहा, पहले दिन से ही हम इस बात को लेकर बिल्कुल स्पष्ट थे कि हम प्रक्रिया से चलने वाला फंड हाउस बनना चाहते हैं। हम कोई स्टार फंड मैनेजरों से चलने वाला संगठन नहीं बनना चाहते बल्कि एक टीम आधारित तरीका अपनाना चाहते हैं। यह प्रक्रिया इन सालों में बिल्कुल वैसी ही रही है और पिछले 15 सालों में हमारा प्रदर्शन बहुत मज़बूत रहा है। जब निवेशक तीन, पांच, दस साल और उससे भी ज्यादा समय तक लगातार अच्छा प्रदर्शन देखते हैं तो यही मोमेंटम आगे चलकर और ज्यादा वृद्धि मुहैया कराता है।