बैलेंस्ड एडवांटेज फंडों (बीएएफ) ने मार्च में बाजार में आई गिरावट का फायदा उठाकर इक्विटी में अपना निवेश बढ़ाया। बड़ी योजनाओं (जो 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के फंडों का प्रबंधन करती है) में औसत रूप से शुद्ध इक्विटी आवंटन करीब दो फीसदी बढ़कर 60 फीसदी पर पहुंच गया। इनका इक्विटी निवेश अगस्त 2024 के निचले स्तरों से लगातार बढ़ रहा था और कुछ बड़ी योजनाओं में यह कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल बीएएफ इस श्रेणी की दूसरी सबसे बड़ी योजना है और इसके पास करीब 66,000 करोड़ रुपये की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) है। इसका शुद्ध इक्विटी निवेश मार्च के आखिर में 61.9 फीसदी रहा, जो पिछले 5 सालों में इसका सबसे ऊंचा स्तर है।
एचडीएफसी म्युचुअल फंड सबसे बड़े बीएएफ का प्रबंधन करता है और इसने मार्च में अपना पहले से ही ऊंचा इक्विटी निवेश 71 फीसदी पर बनाए रखा, जो फरवरी 2026 के स्तर से अपरिवर्तित रहा। कोटक बीएएफ और टाटा बीएएफ के लिए शुद्ध इक्विटी निवेश मार्च में 60 फीसदी के आंकड़े को पार कर गया, जो हाल के वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है।
हालांकि बीएएफ सबसे सही परिसंपत्ति आवंटन तय करने के लिए अलग-अलग मॉडल अपनाती हैं, लेकिन ज्यादातर योजनाओं में इक्विटी निवेश काफी हद तक बाजार के मूल्यांकन से जुड़ा होता है। आम तौर पर, जब मूल्यांकन बढ़ता है तो आवंटन कम हो जाता है और जब मूल्यांकन सामान्य होता है तो आवंटन बढ़ जाता है। शुद्ध निवेश से हर योजना की अपनी स्थिति भी पता चलती है। कुछ फंड मैनेजर ज्यादा सतर्क रवैया अपनाते हैं जबकि कुछ दूसरे मैनेजर ज्यादा आक्रामक आवंटन के फैसले लेते हैं।
कुछ योजनाएं जैसे कि एडलवाइस बीएएफ, एक अलग तरीका अपनाती हैं। यह योजना एक प्रो-साइक्लिकल मॉडल अपनाती है यानी जब बाज़ार ऊपर जाते हैं तो इक्विटी निवेश बढ़ा देती है और जब बाजार कमजोर होते हैं तो इसे कम कर देती है। मार्च में इसका शुद्ध इक्विटी आवंटन 45 फीसदी था, जो पिछले 12 महीनों में सबसे कम था। निप्पॉन इंडिया बीएएफ उन योजनाओं में से एक है, जिसने इस महीने अपना शुद्ध इक्विटी आवंटन कम किया।
विशेषज्ञों ने हाल ही में बताया है कि इक्विटी बाजार के मूल्यांकन अब मोटे तौर पर लंबे समय के औसत के बराबर हो गए हैं और कुछ सेगमेंट तो छूट पर भी ट्रेड कर रहे हैं।
एसबीआई एमएफ ने अपने ताजा आउटलुक में कहा, इतने डर और निराशा के माहौल में एक अच्छी बात यह रही है कि मूल्यांकन में काफी नरमी आई है। मौजूदा संकट से पहले भी पिछली छह तिमाहियों से भारतीय इक्विटी अपने उभरते बाजारों के समकक्षों के मुकाबले काफी खराब प्रदर्शन कर रही थीं।
सेंसेक्स का प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल अब वापस लंबे समय के औसत पर आ गया है, जबकि हमारा पसंदीदा मूल्यांकन पैमाना (जो बॉन्ड यील्ड के मुकाबले अर्निंग्स यील्ड को मापता है) और भी नरम हो गया है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि इक्विटी में आई गिरावट ने बॉन्ड यील्ड में हुई तेज बढ़ोतरी की भरपाई कर दी है।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एमएफ का इक्विटी मूल्यांकन का पैमाना भी मार्च में पिछले 5 सालों में पहली बार इक्विटी के लिए सकारात्मक हो गया। मार्च 2026 में भारतीय इक्विटी में तेजी से गिरावट आई, जिसमें निफ्टी और सेंसेक्स क्रमशः 11.3 फीसदी और 11.5 फीसदी गिर गए। महीने के आखिर तक सेंसेक्स का 12-महीने आगे का पीई अनुपात 17 गुने पर ट्रेड कर रहा था, जो इसके 5 साल के औसत 20.2 गुने से काफी कम था। निफ्टी मिडकैप 100 भी 24.6 गुने के पीई पर अपने 5 साल के औसत 26.6 गुना से नीचे था।
इक्विटी में ज्यादा निवेश से बीएएफ के रिटर्न को सहारा मिलने की उम्मीद है क्योंकि इस महीने अब तक बाजारों में जबरदस्त उछाल आई है। सेंसेक्स और निफ्टी में 8.5 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई है जबकि निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 11.6 फीसदी और 12.8 फीसदी का इजाफा हुआ है। मिड और स्मॉल-कैप इंडेक्स ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान हुए अपने सभी नुकसानों की भरपाई कर ली है। हालांकि बेंचमार्क इंडेक्स अभी भी युद्ध-पूर्व के स्तरों से लगभग 4 फीसदी नीचे कारोबार कर रहे हैं।