बंधन म्युचुअल फंड ने अपनी तीन इक्विटी और हाइब्रिड योजनाओं में सोने और चांदी में निवेश के प्रावधान किए हैं। फंड ने अपने स्मॉलकैप, फ्लेक्सीकैप और आक्रामक हाइब्रिड फंडों के ढांचे में बदलाव किया है और सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) में 10 फीसदी तक निवेश किया है। इस नए प्रावधान का इस्तेमाल करने वाला वह संभवतः पहला फंड है।
इक्विटी योजनाओं के लिए निवेश योग्य परिसंपत्ति वर्ग अभी तक सिर्फ इक्विटी और शॉर्ट टर्म डेट तक सीमित थे। लेकिन हाल में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इसे बढ़ाकर उसमें कीमती धातुओं के ईटीएफ को भी शामिल कर दिया है। यह विस्तार सोने और चांदी की कीमतों में आई जबरदस्त तेज़ी के बाद किया गया है।
बंधन म्युचुअल फंड के प्रोडक्ट मैनेजमेंट और रणनीति प्रमुख शीर्षेंदु बसु के अनुसार गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ को शामिल करने का मकसद चुनिंदा योजनाओं के रिटर्न की संभावना बढ़ाना और साथ ही उनकी अस्थिरता को कम करना है। उन्होंने कहा, योजना यह है कि जोखिम समायोजित रिटर्न को बेहतर बनाया जाए। इससे फंड मैनेजरों को कमोडिटी में मौजूद अवसरों का लाभ उठाने की सहूलियत मिलती है, जहां शायद कोई उपयुक्त सूचीबद्ध इक्विटी विकल्प उपलब्ध न हो। इस तरह गोल्ड और सिल्वर से कम-से-कम बीटा रिटर्न तो मिल जाता है।
बसु ने बताया कि जिन योजनाओं में यह अनिवार्यता जोड़ी गई है, उन्हें फंड मैनेजरों की पसंद और योजनाओं की रणनीतियों के आधार पर चुना गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रावधान का इस्तेमाल मानक आवंटन के तौर पर नहीं बल्कि मौके के हिसाब से किया जाएगा।
फंड हाउस ने अपने परिसंपत्ति आवंटन ढांचे में कुछ और चीजें भी जोड़ी हैं ताकि उतार-चढ़ाव कम किया जा सके और आय सृजन की क्षमता बढ़ाई जा सके। इसकी ज्यादातर इक्विटी योजनाओं ने अपने मैंडेट में ‘कवर्ड कॉल’ को शामिल किया है। कई योजनाओं के परिसंपत्ति मिश्रण में इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) को भी जोड़ा गया है।
कवर्ड कॉल ऑप्शंस की एक ऐसी रणनीति है, जिसमें फंड मैनेजर किसी शेयर में ‘लॉन्ग पोजीशन’ लेता है और साथ ही ऑप्शन प्रीमियम से आय कमाने के लिए उसी शेयर पर कॉल ऑप्शंस बेचता है।