इक्विटी म्युचुअल फंड योजनाओं में शुद्ध निवेश मार्च में बाजार में गिरावट के बीच तेजी से बढ़ा था और अप्रैल में भी यह उच्च स्तर पर बना रहा, जहां कुल 38,440 करोड़ रुपये का निवेश मिला। हालांकि यह मार्च में दर्ज किए गए 40,450 करोड़ रुपये के हालिया उच्चस्तर से 5 फीसदी से कम रहा। फिर भी यह पिछले एक साल में देखे गए औसत मासिक निवेश से काफी ज्यादा रहा।
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में कुल निवेश में 16 फीसदी की गिरावट के बावजूद (जो घटकर 70,302 करोड़ रुपये रह गया) निवेश का स्तर ऊंचा बना रहा। इसकी वजह यह थी कि निवेश निकासी यानी रीडम्पशन में 26 फीसदी की कमी आई और यह आठ महीने के निचले स्तर 31,862 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च के प्रबंधक (शोध) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, हालांकि निवेश थोड़ा कम रहा, लेकिन कुल मिलाकर यह रुझान दिखाता है कि मौजूदा अनिश्चित वैश्विक माहौल और शेयर बाजारों में बीच-बीच में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।
अप्रैल में शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली। अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर चिंता कम होने के बीच मार्च में हुए नुकसान के एक बड़े हिस्सा की भरपाई इस महीने हो गई। महीने के दौरान निफ्टी 50 इंडेक्स में 7 फीसदी की बढ़त हुई जबकि व्यापक बाजार के सूचकांकों ने और भी बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में करीब 17 फीसदी की तेजी आई।
शुद्ध निवेश ने बाजार के अच्छा प्रदर्शन करने वाले सेगमेंट्स का अनुसरण किया। अप्रैल में फ्लेक्सीकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों ने निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा आकर्षित किया। कुल मिलाकर, इन श्रेणियों का ऐक्टिव इक्विटी शुद्ध निवेश में 61 फीसदी हिस्सा रहा। जहां फ्लेक्सीकैप फंडों ने लगातार दूसरे महीने 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों में संयुक्त निवेश 9 फीसदी बढ़कर 13,437 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
इनक्रेड मनी में सीईओ (म्युचुअल फंड) नितिन अग्रवाल ने कहा, ऐतिहासिक रूप से बाजार में तनाव के समय स्मॉलकैप फंडों में ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। लेकिन जिस तरह निवेशक न सिर्फ इस श्रेणी में अपनी होल्डिंग बनाए हुए हैं बल्कि इसमें सक्रिय रूप से और निवेश भी कर रहे हैं, उससे दो बातें पता चलती हैं। या तो निवेशकों का भारत की वृद्धि की कहानी पर भरोसा फिर से बढ़ा है या फिर वे निवेशक अब अपना निवेश बढ़ा रहे हैं, जिन्हें बाजार में आई गिरावट के बाद छोटी कंपनियों में निवेश का अच्छा मौका दिख रहा है।
कुल निवेश में बढ़ोतरी के बावजूद उद्योग को सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के मोर्चे पर झटका लगा। एसआईपी निवेश मासिक आधार पर 3 फीसदी घटकर 31,115 करोड़ रुपये रह गया। यह गिरावट इसलिए खास है, क्योंकि कोविड के बाद के दौर में एसआईपी निवेश ने ज्यादातर ऊपर की ओर ही रुख बनाए रखा था।
एम्फी के सीईओ वेंकट चलसानी ने कहा, बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण कुछ निवेशकों ने शायद कुछ समय के लिए एसआईपी में निवेश रोक दिया हो, लेकिन एसआईपी में निवेश करने वाले खातों की कुल संख्या मोटे तौर पर स्थिर बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि अप्रैल में एसआईपी निवेश में आई कमी की एक वजह यह भी थी कि मार्च के आंकड़े कुछ ज्यादा ही बढ़ गए थे क्योंकि महीने के आखिर में छुट्टी होने के कारण फरवरी के कुछ लेन-देन मार्च में चले गए थे। उद्योग की कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों में मासिक आधार पर 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
इसमें सभी श्रेणियों में मजबूत निवेश और मार्क-टु-मार्केट फायदे का योगदान रहा। निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा डेट फंडों में आया और यह 2.5 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि हाइब्रिड फंडों और पैसिव योजनाओं ने लगभग 20,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया।
एचडीफएसी एएमसी के एमडी और सीईओ, नवनीत मुनोत ने कहा, मुश्किल वैश्विक माहौल के बावजूद म्युचुअल फंड निवेशकों ने काबिले-तारीफ मजबूती दिखाई है।