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FY26 में नए निवेशकों पर चार AMC का दबदबा, आधे से ज्यादा फोलियो इन्हीं के नाम

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AMFI के आंकड़ों के अनुसार चार फंड कंपनियों ने वित्त वर्ष 26 में कुल 2.4 करोड़ नए खाते जोड़े, जो कुल जोड़े गए 4.68 करोड़ नए खातों का 51 फीसदी है

Last Updated- May 07, 2026 | 10:42 PM IST
mutual funds
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

चार फंड कंपनियों- निप्पॉन इंडिया, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई प्रू. और टाटा- ने वित्त वर्ष 2025-26 में म्युचुअल फंड उद्योग में जोड़े गए कुल खातों में से आधे से ज्यादा हासिल किए। इससे पता चलता है कि खुदरा निवेशकों की अतिरिक्त रकम कुछ चुनिंदा फंडों और योजनाओं तक ही पहुंची। 

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़ों के अनुसार चार फंड कंपनियों ने वित्त वर्ष 26 में कुल 2.4 करोड़ नए खाते जोड़े, जो कुल जोड़े गए 4.68 करोड़ नए खातों का 51 फीसदी है। इन कंपनियों के फोलियो जोड़ने की तेज रफ्तार की मुख्य वजह शेयरों का जानदार प्रदर्शन, वितरण की मजबूत क्षमता और पैसिव सेगमेंट में उनकी मजबूत स्थिति थी।

वित्त वर्ष 2026 में फोलियो जोड़ने के मामले में सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) सबसे आगे रहने वाली श्रेणियों में से थे क्योंकि निवेशक कीमती धातुओं में आई रिकॉर्ड तेजी का फायदा उठाना चाहते थे। अकेले गोल्ड ईटीएफ में वित्त वर्ष 26 में 54 लाख फोलियो जुड़े जबकि सभी ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में कुल 1.89 करोड़ फोलियो जुड़े।

टाटा म्युचुअल फंड ने वित्त वर्ष 2026 में अपने फोलियो में 62 फीसदी की वृद्धि दर्ज की। उसने इस उछाल का श्रेय कीमती धातुओं के ईटीएफ और फंड ऑफ फंड्स में मजबूत रुझान को दिया। टाटा फंड के चीफ बिजनेस ऑफिसर आनंद वरदराजन ने कहा, प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण और पैसिव योजनाओं में निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के कारण हमें सोने और चांदी के ईटीएफ में मजबूत रुझान देखने को मिले। 

2024-25 में फोलियो जोड़ने के मामले में टाटा फंड छठे स्थान पर रहा। निप्पॉन इंडिया, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल पिछले कुछ सालों से लगातार 5 अग्रणी फंड कंपनियों में शामिल रहे हैं। इसकी वजह उनकी इक्विटी और हाइब्रिड योजनाओं का अच्छा प्रदर्शन और मजबूत वितरण नेटवर्क है। इससे पिछले सालों में मोतीलाल ओसवाल फंड और क्वांट फंड फोलियो जोड़ने के मामले में आगे रहने वाली कंपनियों में थे।

निप्पॉन इंडिया फंड के अध्यक्ष और उप-मुख्य कार्यकारी अधिकारी सौगत चटर्जी ने कहा कि पोर्टफोलियो में मजबूत वृद्धि से शेयर बाजारों के उतार-चढ़ाव भरे वर्ष के दौरान निवेशकों की बढ़ती परिपक्वता और वितरकों का समर्थन जाहिर होता है। उन्होंने कहा, यह रफ्तार सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान अपनाने में वृद्धि, निवेशकों की बढ़ती जागरूकता और अनुशासित, दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करने वाली निरंतर शिक्षा पहलों के कारण संभव हुई है। हमारे सलाहकारों, वित्तीय प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों और वितरक भागीदारों का अटूट समर्थन भी उतना ही महत्त्वपूर्ण रहा है, जो निवेशकों को विभिन्न बाजार चक्रों में मार्गदर्शन करने और भौगोलिक क्षेत्रों में भागीदारी बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

निप्पॉन इंडिया को भी कीमती धातुओं में निवेश की होड़ से फायदा हुआ, क्योंकि पैसिव क्षेत्र में खासकर गोल्ड और सिल्वर फंडों में उसकी मजबूत पकड़ है। मोतीलाल ओसवाल, एसबीआई, पराग पारिख फाइनैंशियल एडवाइजरी सर्विसेज और बंधन म्युचुअल फंड भी इस क्षेत्र की अन्य प्रमुख कंपनियां रहीं और इनमें से हर एक ने वित्त वर्ष 26 में 20 लाख से ज्यादा नए खाते जोड़े।

विशेषज्ञों के अनुसार, जहां फोलियो के आंकड़े निवेशकों की बढ़ती भागीदारी की ओर इशारा करते हैं, वहीं इससे उद्योग और फंडों के वृद्धि की राह की अधूरी तस्वीर ही नजर आती है। क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पीयूष गुप्ता ने कहा, फंडों के फोलियो में लगातार बढ़ोतरी असल में निवेशकों के बढ़ते आधार और उद्योग की बढ़ती पहुंच का सबूत है। 

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First Published - May 7, 2026 | 10:35 PM IST

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