पिछले दो महीनों में इक्विटी फंड में आए निवेश की रफ्तार पहले के उन दौर से अलग है, जब फंडों में आने वाली रकम का एक बड़ा हिस्सा नए फंड ऑफर (एनएफओ) के रास्ते आता था। इस बार, यह तेजी लगभग पूरी तरह से मौजूदा योजनाओं में किए गए निवेश की वजह से आई है।
एनएफओ संग्रह को छोड़ दें तो बाकी आंकड़ों में यह बदलाव दिखता है। मौजूदा इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश मार्च 2026 में रिकॉर्ड 38,503 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था और अप्रैल 2026 में करीब-करीब यह उतना ही यानी 38,410 करोड़ रुपये रहा। पिछला उच्चतम स्तर अक्टूबर 2024 में दर्ज किया गया था, जब मौजूदा योजनाओं में 37,840 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था।
इस बीच, अप्रैल में एनएफओ से जुटाई गई रकम घटकर सिर्फ 30 करोड़ रुपये रह गई, जो कुल शुद्ध इक्विटी निवेश की महज़ 0.1 फीसदी है। यह कम से कम अप्रैल 2024 के बाद से सबसे निचला हिस्सा है। मार्च में, एनएफओ का निवेश में योगदान सिर्फ 4.8 फीसदी था।
यह पहले के रुझानों से बिल्कुल अलग है। 2024 और 2025 के दौरान जब भी मासिक इक्विटी निवेश 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हुआ तो एनएफओ संग्रह आमतौर पर कुल निवेश का बड़ा हिस्सा होता था। अप्रैल 2024 से फरवरी 2026 के बीच 10 ऐसे मौके आए जब मासिक इक्विटी शुद्ध निवेश 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा। इनमें से सात महीनों में एनएफओ का हिस्सा निवेश में 20 फीसदी से ज्यादा था जबकि बाकी महीनों में उनका योगदान करीब 10 फीसदी रहा।
उद्योग के अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में मौजूदा योजनाओं में मजबूत निवेश बाजार में आई गिरावट से पैदा हुए निवेश के मौकों को दिखाता है। मिरे ऐसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) में वितरण और रणनीति प्रमुख सुरंजना बड़ठाकुर ने कहा, पिछले दो महीनों में ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में रिकॉर्ड शुद्ध निवेश कई कारकों को दिखाता है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और एफआईआई की लगातार निकासी के कारण बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रहा जिससे हाल की ऊंचाइयों तक बाजार में बड़ी गिरावट आई। इस कारण कई सूचकांकों में मूल्यांकन तुलनात्मक रूप से आकर्षक हो गए।
केनरा रोबेको एएमसी में बिक्री और विपणन प्रमुख गौरव गोयल ने कहा कि यह रुझान निवेशकों की बढ़ती समझदारी की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा, हाल के महीनों में भारी निवेश से निवेशकों और वितरकों के बीच बढ़ती समझदारी का पता चलता है। पहले, बाजार में उतार-चढ़ाव के समय अक्सर भारी निकासी होती थी। अब, भारतीय निवेशक बाजार में आई गिरावट को इक्विटी में अपना निवेश बढ़ाने के मौके के तौर पर देख रहे हैं।
पिछले दो महीनों के दौरान फ्लैक्सीकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप योजनाओं में सबसे ज्यादा निवेश आया। इक्विटी में यह मजबूत निवेश म्युचुअल फंड उद्योग के लिए राहत की बात है, जिसने ऐतिहासिक रूप से बाजार में गिरावट के समय निवेश में कमी देखी है क्योंकि उस दौरान नए फंड भी बाजार में कम ही आते थे।