ऐसा लगता है कि म्युचुअल फंडों (एमएफ) ने अप्रैल में शेयर बाजार में सोच-समझकर कदम उठाया है। यह तब है जब उन्हें मिल रहे नए निवेश में तेजी आ रही थी। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के आंकड़ों के अनुसार म्युचुअल फंडों ने अप्रैल में (28 तारीख तक) 26,000 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी जबकि मार्च में यह आंकड़ा करीब-करीब 1 लाख करोड़ रुपये था।
उद्योग के कुल आंकड़ों की जानकारी रखने वाले दो वरिष्ठ म्युचुअल फंड अधिकारियों के अनुसार अप्रैल में निवेश में थोड़ी कमी आई है, भले ही ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश की आवक मार्च के निवेश के लगभग बराबर ही रही हो। उनका कहना है कि अप्रैल में शुद्ध निवेश की आवक शायद 35,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रहेगी। इसकी तुलना में ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं ने मार्च में 40,450 करोड़ रुपये जुटाए थे।
म्युचुअल फंड निवेश के ट्रेंड में आया यह बदलाव शेयर बाजार के प्रदर्शन में तेज उलटफेर के साथ हुआ। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते मार्च में 11 फीसदी की भारी गिरावट के बाद बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 और सेंसेक्स अप्रैल में तेजी से ऊपर चढ़कर बंद हुए। अप्रैल में निफ्टी 50 में 8.3 फीसदी की बढ़त हुई, जबकि सेंसेक्स में करीब 7 फीसदी का इजाफा हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनावों को लेकर अनिश्चतिता और आय के सीजन की शुरुआत के कारण पिछले महीने कई फंड मैनेजरों ने सतर्क रुख अपनाया।
सेंस ऐंड सिम्पिलिसिटी के संस्थापक और बाजार विशेषज्ञ सुनील सुब्रमण्यम ने कहा, पश्चिम एशिया में संघर्ष के बढ़ने से फंड मैनेजरों ने शायद ज्यादा सावधानी बरती। इसके अलावा, आय के सीजन की शुरुआत के चलते फंड मैनेजरों ने देखो और इंतजार का रवैया अपनाया होगा। वे यह जायजा लेना चाहते हैं कि किन सेक्टरों और शेयरों पर चौथी तिमाही की कमाई और वित्त वर्ष 2026-2027 के लिए जारी अनुमानों पर कच्चे तेल की कीमतों का ज्यादा या कम असर पड़ रहा है। यह तिमाही बाजार के लिए एक साल आगे के पीई अनुमान पर पहुंचने के लिहाज से बहुत अहम है। जैसे-जैसे नतीजे आते जाएंगे, उन्होंने आगे के निवेश के लिए नकदी रखी होगी।
हालांकि इक्विटी फंड मैनेजरों को काफी हद तक रकम का निवेश करने का अधिकार होता है, फिर भी वे बाद में खरीदने का बेहतर मौका मिलने की उम्मीद में कुछ हिस्सा नकदी के रूप में अपने पास रखते हैं। ज्यादातर फंड मैनेजरों ने मार्च में बाजार में तेज गिरावट के दौरान अपने नकदी का कुछ हिस्सा निवेश कर दिया था। बीएनपी पारिबा की एक रिपोर्ट के अनुसार इक्विटी योजनाओं की कुल नकदी होल्डिंग मार्च में घटकर 21 महीनों के सबसे निचले स्तर 4.7 फीसदी पर आ गई थी।
नकदी होल्डिंग और ऐक्टिव इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश में बदलाव के अलावा म्युचुअल फंडों का शेयर बाजार में निवेश पैसिव इक्विटी और हाइब्रिड योजनाओं में आने वाले शुद्ध निवेश से भी तय होता है। हाइब्रिड फंडों की इक्विटी होल्डिंग में होने वाले बदलाव भी शेयर बाजार में फंडों के निवेश को प्रभावित करते हैं।