इस महीने की शुरुआत में NSE के Nifty REITs & Realty Index के लॉन्च के साथ ही भारत में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) पर फोक्स्ड पहले म्युचुअल फंड स्कीम्स का रास्ता साफ हो गया है। कई फंड हाउस इस बेंचमार्क से जुड़े पैसिव प्रोडक्ट्स लाने पर विचार कर रहे हैं। उम्मीद है कि ऐसी पहली योजनाएं 2026 की दूसरी छमाही में लॉन्च होंगी, जब नियम फंड हाउस को REIT-आधारित प्रोडक्ट पेश करने की अनुमति देंगे।
एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के सीनियर अधिकारियों ने कहा कि वे नए लॉन्च किए गए इस इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड्स पर विचार कर रहे हैं।
नवी एएमसी के सीईओ आदित्य मुल्की ने कहा, “हम अभी किसी तत्काल फाइलिंग पर टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन इस इंडेक्स का गहराई से मूल्यांकन कर रहे हैं, क्योंकि यह रिटेल निवेशकों के लिए एसेट एलोकेशन के विकल्प बढ़ाने के हमारे उद्देश्य के अनुरूप है।”
डीएसपी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स में पैसिव इन्वेस्टमेंट्स और प्रोडक्ट्स के हेड अनिल घेलानी ने कहा कि उनका फंड हाउस भी इस इंडेक्स का अध्ययन कर रहा है।
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यह कदम सेबी के उस फैसले के बाद उठाया गया है, जिसमें जनवरी 2026 में REITs को इक्विटी के रूप में वर्गीकृत किया गया। इससे 1 जुलाई से इन्हें इक्विटी इंडेक्स में शामिल करने की अनुमति मिल गई। पहले REITs को हाइब्रिड इंस्ट्रूमेंट माना जाता था, जिसके कारण इक्विटी स्कीम्स में उनकी हिस्सेदारी सीमित थी और एक्टिव फंड्स में इनका एक्सपोजर 10 फीसदी तक ही सीमित रखा जाता था।
इस पुनर्वर्गीकरण और इंडेक्स में शामिल किए जाने से REITs में लिक्विडिटी बढ़ने, उनकी विजिबिलिटी मजबूत होने और म्युचुअल फंड्स की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। जब REITs बड़े इंडेक्स का हिस्सा बन जाएंगे, तब इंडेक्स फंड्स और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) से आने वाला पैसिव निवेश इनके लिए स्थिर मांग का आधार तैयार कर सकता है।
Nifty REITs & Realty Index में REITs और रियल एस्टेट कंपनियों का मिक्स शामिल है। इसमें लिस्टेड पांच REITs का करीब 64 फीसदी हिस्सा है, जबकि बाकी हिस्सा रियल्टी स्टॉक्स का है, जिनमें DLF और Phoenix Mills जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। यह 15 शेयरों वाला इंडेक्स फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर वेटेड है और किसी भी एक कंपनी का वेट 15 फीसदी से ज्यादा नहीं रखा गया है। पिछले एक साल (फरवरी अंत तक) में इसने 12.4 फीसदी का रिटर्न दिया है और लगभग 3.3 फीसदी का डिविडेंड यील्ड भी प्रदान करता है।
हालांकि म्युचुअल फंड अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि REITs की संख्या कम है और उनकी लिक्विडिटी भी सीमित है। इस वजह से अभी इनके आधार पर खास म्युचुअल फंड स्कीम्स को तुरंत शुरू करना आसान नहीं होगा।
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पैसिव रणनीतियों के अलावा, REITs को इक्विटी इंडेक्स में शामिल किए जाने से फंड मैनेजर्स को एक्टिव पोर्टफोलियो में इनका एक्सपोजर बढ़ाने की अधिक लचीलापन (फ्लेक्सिबिलिटी) मिलेगी।
एक सीनियर म्युचुअल फंड अधिकारी ने कहा, “रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स के लिए REITs में ज्यादा निवेश करना समझदारी हो सकती है। इसके अलावा, इनके स्थिर आय प्रोफाइल को देखते हुए ये डिविडेंड यील्ड स्ट्रैटेजी के लिए भी बेहतर हो सकते हैं।”