इक्विटी आधारित म्युचुअल फंड में निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है। मार्च 2026 में इन फंड्स के औसत एसेट अंडर मैनेजमेंट (AAUM) में सालाना आधार पर 17.38 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह जानकारी AMFI के आंकड़ों पर आधारित पर अबेकस म्युचुअल फंड के एनॉलसिस में सामने आई है।
मार्च 2026 में इक्विटी फंड्स का कुल औसत एयूएम लगभग 33.54 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो मार्च 2025 में करीब 28.57 लाख करोड़ रुपये था। इससे साफ है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद खुदरा निवेशकों की भागीदारी बनी हुई है और इक्विटी बाजार में भरोसा कायम है।
इक्विटी फंड्स में फ्लेक्सी कैप फंड सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट बनकर उभरा है। मार्च 2026 में इसका औसत एयूएम बढ़कर लगभग 5.28 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 4.22 लाख करोड़ रुपये था। यानी इसमें 25.10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अब यह सेगमेंट कुल इक्विटी एयूएम का 15.75 फीसदी हिस्सा रखता है, जो पहले 14.77 फीसदी था। यह दिखाता है कि निवेशक ऐसे फंड पसंद कर रहे हैं, जहां फंड मैनेजर बाजार के हिसाब से अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों में निवेश कर सकें।
| स्कीम | औसत AUM मार्च 2026 (₹ करोड़) | हिस्सेदारी मार्च 2026 (%) | औसत AUM मार्च 2025 (₹ करोड़) | हिस्सेदारी मार्च 2025 (%) | सालाना वृद्धि (%) |
|---|---|---|---|---|---|
| फ्लेक्सी कैप फंड | 5,28,059.76 | 15.75% | 4,22,113.98 | 14.78% | 25.10% |
| सेक्टोरल / थीमैटिक फंड | 5,00,854.01 | 14.93% | 4,43,499.84 | 15.52% | 12.93% |
| मिड कैप फंड | 4,37,782.59 | 13.05% | 3,56,671.84 | 12.49% | 22.74% |
| लार्ज कैप फंड | 3,87,415.68 | 11.55% | 3,48,889.45 | 12.21% | 11.04% |
| स्मॉल कैप फंड | 3,47,116.55 | 10.35% | 2,88,473.49 | 10.10% | 20.33% |
| लार्ज और मिड कैप फंड | 3,14,204.09 | 9.37% | 2,54,637.15 | 8.91% | 23.39% |
| ELSS | 2,29,714.69 | 6.85% | 2,25,225.53 | 7.89% | 1.99% |
| मल्टी कैप फंड | 2,10,283.52 | 6.27% | 1,69,398.90 | 5.93% | 24.14% |
| वैल्यू / कॉन्ट्रा फंड | 2,03,829.55 | 6.08% | 1,78,490.57 | 6.25% | 14.20% |
| फोकस्ड फंड | 1,63,751.30 | 4.88% | 1,39,975.78 | 4.90% | 16.99% |
| डिविडेंड यील्ड फंड | 30,604.35 | 0.91% | 29,703.90 | 1.04% | 3.03% |
| कुल इक्विटी AUM | 33,53,616.10 | 100% | 28,57,080.44 | 100% | 17.38% |
फ्लेक्सी कैप के अलावा, अन्य इक्विटी फंड कैटेगरी में भी अच्छी ग्रोथ दिखाई दी है। सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स अभी भी बड़े सेगमेंट में शामिल हैं, जिनका एयूएम करीब 5.01 लाख करोड़ रुपये है। हालांकि इनकी हिस्सेदारी थोड़ी घटकर 14.93 फीसदी रह गई, जो पहले 15.52 प्रतिशत थी। इससे पता चलता है कि निवेशक अब एक ही थीम पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहते।
मिड कैप फंड्स का एयूएम बढ़कर लगभग 4.38 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसमें 22.74 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 13.05 फीसदी हो गई। इससे पता चलता है कि निवेशक तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों का रुख कर रहे हैं।
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लार्ज कैप फंड्स का एयूएम करीब 3.87 लाख करोड़ रुपये है, लेकिन इसकी हिस्सेदारी घटकर 11.55 फीसदी रह गई, जो पहले 12.21 प्रतिशत थी। यह संकेत देता है कि निवेशक धीरे-धीरे सुरक्षित निवेश से हटकर ज्यादा रिटर्न वाले विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। स्मॉल कैप फंड्स में भी अच्छा प्रदर्शन रहा है। इसका एयूएम बढ़कर 3.47 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो सालाना आधार पर 20.33 फीसदी ज्यादा है। इसकी हिस्सेदारी 10.35 फीसदी रही।
लार्ज और मिड कैप फंड्स का एयूएम बढ़कर 3.14 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसमें 23.39 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसकी हिस्सेदारी 9.37 प्रतिशत है। कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि निवेशक अब ज्यादा फ्लैक्सिबल और ग्रोथ वाले फंड्स की ओर रुख कर रहे हैं, जबकि पारंपरिक सुरक्षित विकल्पों की हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम हो रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कैटेगरी में धीमी ग्रोथ या हिस्सेदारी में गिरावट देखने को मिली। इससे साफ पता चलता है कि निवेशकों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) में केवल 1.99 फीसदी की मामूली बढ़त दर्ज हुई। इसका औसत एयूएम लगभग 2.30 लाख करोड़ रुपये रहा और इसकी हिस्सेदारी घटकर 6.85 फीसदी रह गई।
वैल्यू और कॉन्ट्रा फंड्स का एयूएम 2.04 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें 14.20 फीसदी की बढ़त हुई। इसकी हिस्सेदारी 6.08 फीसदी पर स्थिर रही, जिससे पता चलता है कि निवेशकों की इसमें रुचि बनी हुई है, लेकिन बहुत तेज नहीं बढ़ रही।
मल्टी कैप फंड्स का एयूएम बढ़कर 2.10 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसमें 24.14 फीसदी की बढ़त हुई। इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 6.27 फीसदी हो गई, जो पिछले साल से थोड़ी ज्यादा है। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक तय नियमों के तहत डायवर्सिफाई निवेश वाले फंड पसंद कर रहे हैं।
फोकस्ड फंड्स का एयूएम लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें 16.99 फीसदी की बढ़त हुई। इसकी हिस्सेदारी 4.88 फीसदी रही, जो सीमित लेकिन स्थिर निवेश दिखाती है।
डिविडेंड यील्ड फंड्स सबसे छोटे सेगमेंट बने रहे, जिनका एयूएम लगभग 30,604 करोड़ रुपये रहा और कुल इक्विटी एयूएम में इनकी हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम यानी 0.91 फीसदी रही।
अबेकस म्युचुअल फंड के CEO वैभव चुग कहते हैं, इक्विटी एयूएम में लगातार बढ़त यह दिखाती है कि भारतीय निवेशक अब ज्यादा समझदारी के साथ लंबी अवधि का निवेश अपना रहे हैं, भले ही बाजार में उतार-चढ़ाव क्यों न हो। मार्च 2026 में फ्लेक्सी कैप फंड्स की मजबूत बढ़त सबसे खास रही, क्योंकि ये फंड अलग-अलग मार्केट कैटेगरी और सेक्टर में निवेश करने की आजादी देते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आज के बदलते बाजार में फ्लेक्सिबिलिटी बहुत जरूरी है और यही वजह है कि निवेशक इन फंड्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं। साथ ही मिड कैप और स्मॉल कैप फंड्स में लगातार निवेश यह दिखाता है कि निवेशक ज्यादा रिटर्न के अवसर तलाश रहे हैं। इसके विपरीत, लार्ज कैप और ELSS फंड्स में कम बढ़त यह बताती है कि निवेशक अब ज्यादा लचीले और बेहतर प्रदर्शन वाले विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 के आंकड़े यह दिखाते हैं कि निवेशकों की सोच में बड़ा बदलाव आ रहा है। अब वे पारंपरिक लार्ज कैप निवेश से हटकर ज्यादा लचीले और ग्रोथ वाले विकल्पों जैसे फ्लेक्सी कैप, मिड कैप और सेक्टोरल फंड्स की ओर बढ़ रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि निवेशक अब ज्यादा समझदार हो रहे हैं, बाजार में उनकी भागीदारी बढ़ रही है और वे लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न के लिए थोड़े बहुत जोखिम और उतार-चढ़ाव को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।