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SIFs की रेस तेज, सिर्फ 7 महीने में ही निवेश खातों की संख्या 50,000 के पार; AUM ₹12,329 करोड़

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फोलियो की संख्या के मामले में ICICI Prudential का iSIF सबसे आगे है, जबकि Edelweiss का Altiva SIF सबसे ज्यादा एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाला फंड है

Last Updated- May 28, 2026 | 3:44 PM IST
SIF

अप्रैल में स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) में निवेश खातों की संख्या 50,000 के पार पहुंच गई है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब इस नए म्युचुअल फंड सेगमेंट का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

सिर्फ 7 महीने में ही तेजी से बढ़ा SIF

SIF सेगमेंट ने लॉन्च के सिर्फ सात महीनों में तेजी से विस्तार किया है। यह प्लेटफॉर्म म्युचुअल फंड कंपनियों को अनुभवी निवेशकों के लिए जटिल निवेश उत्पाद पेश करने की सुविधा देता है। हाल के महीनों में इसमें तेज ग्रोथ देखने को मिली है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि कई नए फंड हाउस इस सेगमेंट में आए हैं। इनमें ICICI Prudential और Aditya Birla Sun Life MF जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं।

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नए प्रोडक्ट्स से SIFs को रफ्तार

सेंस एंड सिंप्लिसिटी के फाउंडर और सीईओ सुनील सुब्रमण्यम ने कहा, “कई एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) द्वारा नए-नए प्रोडक्ट लॉन्च किए जाने से SIFs को मजबूत शुरुआती बढ़त का फायदा मिल रहा है।” उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में बाजार में उतरे कुछ फंड हाउस, जिन्होंने कम समय में अच्छा प्रदर्शन रिकॉर्ड बनाया है, उन्होंने भी फोलियो और एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) की वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है।

टॉप फंड हाउसों का बढ़ता दबदबा

फैक्टशीट के आंकड़ों के अनुसार, फोलियो की संख्या के मामले में ICICI Prudential का iSIF सबसे आगे है, जबकि Edelweiss का Altiva SIF सबसे ज्यादा एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाला फंड है। वहीं, SBI MF का Magnum SIF फोलियो और AUM दोनों मामलों में दूसरे स्थान पर है।

फंड-वार आंकड़े बताते हैं कि फोलियो और एसेट्स का बड़ा हिस्सा कुछ प्रमुख कंपनियों के पास केंद्रित है। फोलियो के मामले में टॉप तीन फंड हाउस अब कुल फोलियो का 71 फीसदी हिस्सा रखते हैं। वहीं AUM के मामले में यह हिस्सेदारी और ज्यादा है। उद्योग के कुल 12,329 करोड़ रुपये के AUM में टॉप तीन कंपनियों की हिस्सेदारी 78 फीसदी है।

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SIFs में बढ़ रही AMCs की दिलचस्पी

एक तरफ जहां मौजूदा AMCs बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आने वाले महीनों में कई अन्य फंड हाउस भी इस सेक्टर में कदम रखने की तैयारी कर रहे हैं।

कंप्यूटर एज मैनेजमेंट सर्विसेज (CAMS) के मैनेजिंग डायरेक्टर अनुज कुमार ने कहा, “SIFs में तेजी से निवेश बढ़ रहा है। CAMS से जुड़े फंड्स में AUM और निवेशकों की भागीदारी में हर महीने 10 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि देखी जा रही है। उद्योग स्तर पर फिलहाल 14 एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMCs) एक्टिव हैं और जल्द ही छह अन्य कंपनियों के जुड़ने की उम्मीद है। इससे इस सेगमेंट के प्रति उद्योग की बढ़ती प्रतिबद्धता का संकेत मिलता है।”

SIF बाजार में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा

मिरे असेट एमएफ (Platinum SIF) और यूनियन एमएफ (Arthaya SIF) इस सेगमेंट में कदम रखने वाले नए फंड हाउसों में शामिल हैं। कोटक एमएफ, एचएसबीसी एमएफ, एचडीएफसी एमएफ, यूटीआई एमएफ, एक्सिस एमएफ, निप्पॉन इंडिया एमएफ और डीएसपी एमएफ सहित कई अन्य निवेशक बाजार में एंट्री करने के विभिन्न चरणों में हैं।

फिलहाल 360 ONE MF (Dyna SIF), बंधन एमएफ (Arudha SIF), एडलवाइस एमएफ (Altiva SIF), आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एमएफ (iSIF), आईटीआई एमएफ (Diviniti SIF), क्वांट एमएफ (QSIF), एसबीआई एमएफ (Magnum SIF), टाटा एमएफ (Titanium SIF), द वेल्थ कंपनी एमएफ (WSIF) और फ्रैंकलिन टेम्पलटन एमएफ (Sapphire SIF), साथ ही हाल ही में प्रवेश करने वाले प्लैटिनम (Platinum) और अर्थया (Arthaya), पहले से ही इस सेगमेंट में मौजूद हैं।

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डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क हुआ मजबूत

इस सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ऐसे समय में देखने को मिल रही है, जब शुरुआती महीनों में उद्योग के सामने मौजूद डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी दिक्कतें काफी हद तक कम हो गई हैं। पहले केवल सीमित संख्या में म्युचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स ने SIF प्रोडक्ट्स बेचने के लिए जरूरी सर्टिफिकेशन पूरा किया था, जिससे इसकी पहुंच सीमित रही। हालांकि, उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में डिस्ट्रीब्यूटर्स की तैयारी लगातार बेहतर हुई है और अब हजारों डिस्ट्रीब्यूटर्स इन प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए रजिस्टर्ड हो चुके हैं।

मेट्रो शहरों से बाहर बढ़ी पहुंच

कुमार ने कहा, “डिस्ट्रीब्यूटर्स की तैयारी भी तेजी से बेहतर हो रही है। 6,000 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स NISM XIII सर्टिफिकेशन पास कर चुके हैं। इससे भी अहम बात यह है कि निवेशकों की भागीदारी अब व्यापक हो रही है। B30 बाजारों में निवेश की रफ्तार T30 शहरों से ज्यादा है, जो मेट्रो शहरों से बाहर भी बढ़ते भरोसे और मजबूत होते इकोसिस्टम का संकेत देता है। यह बदलाव दिखाता है कि SIF अब शुरुआती लॉन्च चरण से आगे बढ़कर व्यापक स्वीकार्यता के दौर में पहुंच रहा है।”

भारतीय म्युचुअल फंड उद्योग में B30 बाजारों का मतलब “बियॉन्ड 30” यानी टॉप 30 शहरों से बाहर के क्षेत्र होते हैं। इसमें भारत के वे सभी शहर और कस्बे शामिल हैं, जो देश के सबसे बड़े और आर्थिक रूप से विकसित 30 (T30) शहरों की लिस्ट में नहीं आते।

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First Published - May 28, 2026 | 3:44 PM IST

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