भारत के इक्विटी बाजारों का बेंचमार्क बैरोमीटर निफ्टी 50 अपने 30 वर्ष पूरे कर रहा है। इस दौरान इंडेक्स ने लगभग 13 प्रतिशत का वार्षिक रिटर्न दिया है। सूचकांक की यात्रा भारत के आर्थिक बदलाव को दर्शती है।
50 शेयर वाला ब्लू-चिप इंडेक्स भारत के तेजी से बढ़ते पैसिव निवेश तंत्र का मजबूत आधार है। इस सूचकांक को औपचारिक रूप से अप्रैल 1996 में शुरू किया गया था। हालांकि, इसकी आधार तिथि 3 नवंबर, 1995 है।
शुरुआत से इस सूचकांक ने 27 फरवरी, 2026 तक 12.74 प्रतिशत का वार्षिक रिटर्न दिया है जिसमें लाभांश भी शामिल है, जबकि कीमत में रिटर्न 11.23 प्रतिशत रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो, इस सूचकांक में शुरुआत में किया गया 1 लाख रुपये का निवेश आज लगभग 37 लाख रुपये हो गया होता।
वृद्धि का स्तर बाजार पूंजीकरण की उछाल में दिखता है। निफ्टी 50 कंपनियों की कुल बाजार वैल्यू दिसंबर 1995 के 1.26 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर दिसंबर 2025 तक लगभग 200 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो 150 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी है। इसी अवधि में एनएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 2.57 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 448 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
यह वृद्धि अर्थव्यवस्था के औपचारीकरण, इक्विटी में बढ़ती घरेलू बचत और संस्थागत भागीदारी में लगातार बढ़ोतरी की वजह से हुई है।
हर छह महीने में पुनर्संतुलन के बावजूद 11 कंपनियां निफ्टी 50 की स्थापना के बाद से ही उसका हिस्सा बनी हुई हैं। इनमें एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारतीय स्टेट बैंक, लार्सन ऐंड टुब्रो, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाटा स्टील, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, बजाज ऑटो और टाटा मोटर्स शामिल हैं।
इंडेक्स ने अ पने बड़े शेयरों के बीच दबदबे में बदलाव भी देखा है। 2007 से केवल पांच कंपनियों ने वेटेज के हिसाब से इंडेक्स के सबसे बड़े शेयरों का स्थान बरकरार रखा है। ये हैं ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इन्फोसिस, आईटीसी और एचडीएफसी बैंक, जो वर्तमान में शीर्ष स्थान पर हैं।
वेटेज में बदलाव भारत के कॉरपोरेट माहौल में बड़े बदलावों को भी दर्शाता है। 2006 में ओएनजीसी का इंडेक्स में सबसे ज्यादा भारांक था। उसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज और इन्फोसिस का नंबर था, जो उस समय एनर्जी और टेक्नॉलजी कंपनियों के दबदबे को दिखाता है।
वर्ष 2000 के दशक के आखिर तक रिलायंस इंडस्ट्रीज बेंचमार्क में सबसे असरदार शेयर के तौर पर उभरी, जिसका सूचकांक के भारांक में अक्सर 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सा होता था।
मौजूदा समय में सूचकांक के टॉप वेटेज में एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईसीआईसीआई बैंक शामिल हैं, जो भारत के इक्विटी बाजार में वित्तीय सेवा क्षेत्र की बढ़ती अहमियत को बताते हैं।
निफ्टी 50 भारत के पैसिव निवेश में उछाल की भी धुरी रहा है। इंडेक्स को ट्रैक करने वाली निवेश परिसंपत्तियां पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी हैं, जिसमें घरेलू पैसिव फंड जनवरी 2026 तक लगभग 4.9 लाख करोड़ रुपये का प्रबंधन कर रहे थे। इन परिसंपत्तियों में एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों का बड़ा हिस्सा है। एसबीआई निफ्टी 50 ईटीएफ बेंचमार्क को ट्रैक करने वाला सबसे बड़ा फंड है।