पश्चिम एशिया में टकराव और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहने से निवेशकों का भरोसा डगमगा गया जिससे शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट देखी गई और बेंचमार्क सूचकांक ने सात महीने से भी अधिक समय में सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की।
सेंसेक्स 1,690 अंक या 2.3 फीसदी गिरकर 73,583 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 487 अंक या 2.09 फीसदी के नुकसान के साथ 22,820 पर बंद हुआ। इस हफ्ते दोनों सूचकांकों में 1.3 फीसदी की गिरावट आई जो लगातार पांचवीं साप्ताहिक गिरावट है। अगस्त 2025 के बाद से यह सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 8.9 लाख करोड़ रुपये घटकर 422.2 लाख करोड़ रुपये रह गया।
ब्रेंट क्रूड 3.1 फीसदी बढ़कर 103.05 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल के दाम में लगातार तीसरे दिन तेजी आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के नेतृत्व में चल रहे कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं मिलने से तेल में तेजी बनी हुई है। ईरान द्वारा खाड़ी देशों को लगातार निशाना बनाए जाने से तेल आपूर्ति में बाधा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमला करने की अपनी योजना को अगले 10 दिन के लिए टाल देगा। साथ ही यह भी कहा कि दोनों देशों के बातचीत आगे बढ़ रही है। इससे पहले उन्होंने ईरान से होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने का आग्रह किया।
यह वैश्विक ईंधन व्यापार का बेहद अहम रास्ता है जिससे दुनिया भर के करीब 20 फीसदी तेल और एलएनजी की आवाजाही होती है। यह जलमार्ग अभी भी प्रभावी रूप से बंद है जिससे ईंधन की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतें ऊपर चली गई हैं। कुछ अनुमान के मुताबिक अगर जून तक यह रुकावट बनी रहती है तो तेल के दाम बढ़कर 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं।
लंबे समय से चले आ रहे इस संघर्ष ने दुनिया भर में आर्थिक विकास की गति धीमी होने, कंपनियों की कमाई में गिरावट और बढ़ती महंगाई की आशंका को बढ़ा दिया है। इन सब वजहों से डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 94.81 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
वैश्विक अनिश्चितता को और बढ़ाते हुए चीन ने ट्रंप प्रशासन के शुल्क बढ़ाए जाने और चीन के निर्यात पर शुल्क जांच के जवाब में अमेरिका की व्यापारिक नीतियों की जांच की श्रृंखला शुरू कर दी है।
ईंधन आयात पर अपनी भारी निर्भरता के कारण भारत कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। गोल्डमैन सैक्स ने हाल ही में जारी एक नोट में भारत में साल 2026 की आय वृद्धि के अपने अनुमान को पहले के 16 फीसदी से घटाकर 8 फीसदी कर दिया है और आने वाली तिमाहियों में इसमें और कटौती की चेतावनी दी है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 4.5 फीसदी गिरावट पर बंद हुआ जो जून 2024 के बाद सबसे तेज गिरावट है। सेंसेक्स की गिरावट में रिलायंस का योगदान 368 अंक का रहा। सरकार द्वारा डीजल और विमानन ईंधन के निर्यात पर शुल्क (विंडफॉल कर) लगाने से रिलांयस के शेयर में गिरावट आई। एचडीएफसी बैंक भी 3.3 फीसदी नुकसान में रहा।
बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर 3,615 शेयर गिरावट में और 761 में लाभ में रहे। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 4,367 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 3,566 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। निकट भविष्य में अनिश्चितता के बावजूद बाजार के कुछ जानकारों को नए अवसर उभरते हुए दिख रहे हैं।
मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सह-संस्थापक प्रमोद गुब्बी ने कहा, ‘ऊर्जा से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, और इसे ठीक होने में कई साल लग सकते हैं। लंबे समय के लिए निवेश करने वालों के लिए परिसंपत्ति आवंटप और फंडामेंटल्स पर टिके रहना ही सबसे जरूरी है। मूल्यांकन में जो अत्यधिक बढ़ोतरी हुई थी, वह अब ठीक हो रही है जिससे नए अवसर पैदा हो सकते हैं।’
तकनीकी तौर पर विश्लेषकों को निकट अवधि में प्रतिरोध के स्तर नजर आ रहे हैं। कोटक सिक्योरिटीज में तकनीकी शोध के उपाध्यक्ष अमोल आठवले ने कहा, ‘ट्रेडर्स के लिए निफ्टी पर 23,000 और सेंसेक्स पर 74,500 तत्काल प्रतिरोध का काम करेंगे। जब तक ये सूचकांक इन स्तर से नीचे रहेंगे तब तक निवेशकों का मनोबल कमजोर रह सकता है।’