अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो आने वाले समय में पेंट कंपनियों को भी अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से पेंट बनाने की लागत बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां अपना मुनाफा बचाने के लिए पेंट के दाम बढ़ा सकती हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पेंट कंपनियां पहले भी महंगे तेल के दौर से निकल चुकी हैं। जब कच्चा तेल महंगा होता है तो कंपनियां धीरे-धीरे पेंट के दाम बढ़ा देती हैं। इससे बढ़ी हुई लागत का असर ग्राहकों तक पहुंच जाता है और कंपनी का मुनाफा ज्यादा प्रभावित नहीं होता। आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले कई सालों में जब कच्चे तेल की कीमत बढ़ी या घटी, तो एशियन पेंट्स की कमाई पर भी उसका असर दिखाई दिया।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो पेंट कंपनियों को दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार अगर कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है तो एशियन पेंट्स को अपना मुनाफा बनाए रखने के लिए करीब 7.5 प्रतिशत दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। अगर तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है तो कीमतों में करीब 21.5 प्रतिशत बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। वहीं अगर कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक चला जाता है तो पेंट की कीमतें करीब 35.5 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार ऐसा पहले भी हो चुका है जब पेंट कंपनियों ने कच्चे तेल के महंगा होने पर कीमतें बढ़ाई थीं। 2008-09 में जब कच्चा तेल करीब 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, तब कंपनियों ने पेंट के दाम 15 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा दिए थे। इसी तरह 2022 में कोविड के बाद तेल महंगा होने पर भी कीमतें करीब 23 प्रतिशत तक बढ़ाई गई थीं। उस समय भी कंपनियों की बिक्री और मुनाफे पर ज्यादा असर नहीं पड़ा था।
हालांकि अब पेंट बाजार में मुकाबला पहले से ज्यादा बढ़ गया है। बिड़ला ओपस के आने और JSW पेंट्स द्वारा अक्ज़ो नोबेल इंडिया को खरीदने के बाद इस सेक्टर में मुकाबला और तेज हो गया है।
अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं और कच्चे माल की कमी होती है तो पेंट कंपनियां अपनी रणनीति बदल सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी स्थिति में कंपनियां ज्यादा मुनाफा देने वाले पेंट पर ज्यादा ध्यान देंगी। मुमकिन है कि कंपनियां प्रीमियम एनामेल और वाटर-बेस्ड पेंट की बिक्री बढ़ाएं, जबकि सस्ते पेंट का उत्पादन कम कर दें। इससे कुल बिक्री थोड़ी घट सकती है, लेकिन कंपनियों के मुनाफे पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
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रिपोर्ट के मुताबिक जब कच्चे तेल की कीमतें बहुत बढ़ जाती हैं तो सबसे ज्यादा दिक्कत छोटी पेंट कंपनियों को होती है। ऐसे समय में बड़ी कंपनियां मजबूत रहती हैं और बाजार में उनका हिस्सा बढ़ सकता है। पहले भी जब आर्थिक संकट, नोटबंदी, जीएसटी और कोविड जैसे मुश्किल समय आए थे, तब बड़ी पेंट कंपनियों को फायदा हुआ था। अगर तेल की कीमतें आगे भी ज्यादा रहती हैं तो फिर से ऐसा ही देखने को मिल सकता है।
कीमतें बढ़ाने के अलावा कंपनियां अपने खर्च भी कम कर सकती हैं। जैसे विज्ञापन पर होने वाला खर्च, जो आमतौर पर बिक्री का करीब 4 प्रतिशत होता है, उसे थोड़ा घटाया जा सकता है। इसके अलावा दूसरे खर्चों में कटौती करके भी कंपनियां बढ़ती लागत का असर कम करने की कोशिश कर सकती हैं।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने पेंट सेक्टर को लेकर भरोसा जताया है। ब्रोकरेज ने एशियन पेंट्स, बर्जर पेंट्स, कंसाई नेरोलैक और अक्ज़ो नोबेल पर ‘ADD’ रेटिंग और इंडिगो पेंट्स पर ‘BUY’ रेटिंग बरकरार रखी है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।