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ईरान तनाव से थमे IPO सौदे: लॉक-इन खत्म होने के बावजूद PE-HNI निवेशक ब्लॉक डील से पीछे

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प्रमोटर और शुरुआती चरण के निवेशक ईरान में संघर्ष के कारण बाजार में बढ़ रही गिरावट से डरे हुए हैं और वे फिलहाल दूरी बनाए रखना पसंद कर रहे हैं

Last Updated- March 20, 2026 | 10:49 PM IST
equity

हाल में सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में निजी इक्विटी (पीई) फर्मों और उच्च नेट वर्थ वाले व्यक्तियों (एचएनआई) द्वारा ब्लॉक ट्रेड में देरी की जा रही है, क्योंकि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और बाजार में अस्थिरता उन्हें आईपीओ की लॉक-इन अवधि समाप्त होने पर लाभ उठाने से रोक रही है।

निवेश बैंकरों ने चेतावनी दी है कि हाल के हफ्तों में बड़े ब्लॉक सौदों को अंजाम देने का अवसर काफी कम हो गया है। प्रमोटर और शुरुआती चरण के निवेशक ईरान में संघर्ष के कारण बाजार में बढ़ रही गिरावट से डरे हुए हैं और वे फिलहाल दूरी बनाए रखना पसंद कर रहे हैं।

बिक्री की यह नई लहर वैश्विक और घरेलू कारकों के मिश्रण से प्रेरित है, जिसमें ईरान संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार निकासी और उभरते बाजारों (ईएम) में जोखिम से बचने की धारणा शामिल है। यह बिकवाली विशेष रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप खंडों में ज्यादा गंभीर रही है, जिनमें कई आईपीओ केंद्रित हैं।

नुवामा अल्टरनेटिव ऐंड क्वांटीटेटिव रिसर्च के विश्लेषण के अनुसार अगले छह महीनों में 87 आईपीओ के लिए लॉक-इन अवधि समाप्त होने वाली है, जो लगभग 6 लाख करोड़ रुपये के शेयरों से जुड़ी हुई है। जिन कंपनियों की शेयर लॉक इन अव​धि समाप्त होने वाली है, उनमें अर्बन कंपनी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी, भारत कोकिंग कोल और आनंद राठी शेयर ऐंड स्टॉक ब्रोकर्स मुख्य रूप से शामिल हैं।

ईरान संघर्ष की वजह से सौदों की रफ्तार काफी हद तक ठप हो गई है। सेंट्रम कैपिटल में निवेश बैंकिंग पार्टनर प्रांजल श्रीवास्तव ने कहा, ‘सूचीबद्ध कंपनियों के लिए, मूल्य निर्धारण पहले ही हो चुका है, जिससे छोटे ब्लॉक सौदे संभव हो गए हैं।’

उन्होंने कहा, ‘हालांकि, बड़े ब्लॉक मुश्किल होंगे।निवेशक अपनी हिस्सेदारी कम करने को लेकर हिचकिचा रहे हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इनमें से कई शेयर अपनी इश्यू कीमत से नीचे कारोबार कर रहे हैं।‘ श्रीवास्तव ने कहा, ‘युद्ध को लेकर जब कोई सकारात्मक घटनाक्रम सामने आएगा, तभी कोई बेहतर मौका बन पाएगा।’

भू-राजनीतिक संकट शुरू होने के बाद से भारतीय बाजारों में बड़ी बिकवाली देखी गई है। सेंसेक्स और निफ्टी सूचकांकों में इस महीने क्रमशः 8.3 फीसदी और 8.2 फीसदी की गिरावट आई है, जिससे कुल बाजार पूंजीकरण से लगभग 34.4 लाख करोड़ रुपये का सफाया हो गया है। हालांकि इस महीने लगभग 5,852 करोड़ रुपये के आठ आईपीओ पेश किए गए, लेकिन कई बड़े इश्यू स्थगित कर दिए गए और अस्थिर परिस्थितियों के कारण एक पेशकश को अपनी सदस्यता अवधि तीन दिनों के लिए बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

भविष्य में शेयरों की बिक्री की रफ्तार काफी हद तक निवेशकों के बदलते मूड पर निर्भर करेगी। स्वतंत्र इक्विटी विश्लेषक अंबरीश बालिगा ने बताया कि खुदरा और ज्यादा नेटवर्थ वाले निवेशक इस समय ‘पैनिक मोड’ में हैं।

बालिगा ने कहा, ‘अगर उनके पोर्टफोलियो का बाकी हिस्सा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है और उन्हें लॉक-इन वाले शेयर बेचने पड़ते हैं, तो इससे समस्या और बढ़ जाती है।’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन, खरीदार के नजरिये से देखें तो, अगर आपके पास कैश है, तो यह कभी-कभार मिलने वाला मौका है। जब हालात बदलेंगे, तो यह बहुत तेजी से होगा।’

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First Published - March 20, 2026 | 10:29 PM IST

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