भारत का पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) उद्योग FY27 की शुरुआत मजबूत वृद्धि के साथ कर रहा है। अप्रैल 2026 में उद्योग का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 42.2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। यह मासिक आधार पर 2.1 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाता है, जो निवेशकों की लगातार बढ़ती भागीदारी का संकेत है। डिस्क्रेशनरी सेगमेंट ने कुल AUM ग्रोथ में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। ये आंकड़े एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया (APMI) द्वारा जारी अप्रैल की ‘कंपेंडियम रिपोर्ट’ में सामने आए हैं। इस रिपोर्ट में PMS उद्योग से जुड़े प्रमुख आंकड़ों, रुझानों और बदलते माहौल का गहराई से विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल के दौरान PMS उद्योग का ग्राहक आधार (client base) लगभग 2.12 लाख खातों तक पहुंच गया। हालांकि महीने के दौरान इसमें 1.7 फीसदी का एडजेस्टमेंट भी देखा गया।
एसेट क्लास के स्तर पर इक्विटी में 13.8 फीसदी, प्लेन डेट में 0.8 फीसदी और म्युचुअल फंड निवेश में 5.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि डेरिवेटिव्स सेगमेंट में बड़े स्तर पर पुनर्संतुलन (Repositioning) देखने को मिला।
कुल नेट फ्लो अप्रैल में पॉजिटव होकर 25,088 करोड़ रुपये के नेट इनफ्लो पर पहुंच गया, जबकि मार्च में 648 करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया था। यह सुधार मुख्य रूप से निवेश में मासिक आधार पर 27 फीसदी की वृद्धि के कारण आया, जिससे कुल इनफ्लो बढ़कर 46,030 करोड़ रुपये हो गया। साथ ही आउटफ्लो में भी उल्लेखनीय कमी देखने को मिली।
निवेशकों की भागीदारी में मिला-जुला रुख देखने को मिला। घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी कुल ग्राहक आधार का 91 फीसदी और कुल AUM का 95 फीसदी बनी रही। विदेशी निवेशकों का AUM मासिक आधार पर 7.8 फीसदी बढ़ा, जबकि घरेलू AUM में भी 1.8 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। यह नए वित्त वर्ष की शुरुआत में निवेश आवंटन (allocations) के स्थिर बने रहने का संकेत देता है।
घरेलू AUM में PF/EPFO की हिस्सेदारी लगभग 80 फीसदी रही, जिससे यह घरेलू एसेट्स का प्रमुख आधार बना रहा। वहीं, FY27 में भी नए डिस्ट्रीब्यूटर्स जुड़ते रहे, जिससे PMS उद्योग की पहुंच और विस्तार को समर्थन मिला।
लिस्टेड इक्विटी एसेट्स में मजबूत तेजी जारी रही और इसमें मासिक आधार पर 13.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। यह इक्विटी आधारित निवेश अवसरों के प्रति निवेशकों की लगातार मजबूत रुचि को दर्शाता है।
अनलिस्टेड सेगमेंट में इक्विटी एसेट्स में 38.8 फीसदी की तेज बढ़ोतरी हुई, जबकि अनलिस्टेड डेट में 150.5 फीसदी की भारी वृद्धि दर्ज की गई। इससे प्राइवेट मार्केट निवेशों में बढ़ती दिलचस्पी का संकेत मिलता है।
इसके अलावा, अप्रैल में विदेशी AUM में 7.8 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि घरेलू AUM मोटे तौर पर स्थिर बना रहा। घरेलू पोर्टफोलियो में PF/EPFO की भूमिका प्रमुख आधार के रूप में बनी रही।
APMI के बोर्ड मेंबर विकास खेमानी ने कहा, “इस महीने के आंकड़े भारत के वेल्थ मैनेजमेंट की दुनिया में जारी गहरे बदलाव की ओर संकेत करते हैं। निवेश अब केवल पारंपरिक इक्विटी निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेशक लिस्टेड और अनलिस्टेड बाजारों में विशेष और डायवर्सिफाइड रणनीतियों की ओर भी बढ़ रहे हैं। PMS उद्योग अब धीरे-धीरे समझदार निवेशकों के लिए केवल एक सामरिक निवेश विकल्प (Tactical Investment Avenue) नहीं, बल्कि रणनीतिक पोर्टफोलियो आवंटन (Strategic Portfolio Allocation) का माध्यम बनता जा रहा है।”
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार ने अप्रैल महीने का अंत मजबूती के साथ किया। इस दौरान बीएसई सेंसेक्स में 6.9 फीसदी और निफ्टी 50 में 7.5 फीसदी की मासिक बढ़त दर्ज की गई। वहीं, बीएसई मिडकैप और बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स में क्रमशः 13.8 फीसदी और 19.6 फीसदी की तेज उछाल देखने को मिली।
पावर, रियल्टी, कैपिटल गुड्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और मेटल सेक्टर बाजार की तेजी के प्रमुख चालक रहे। हालांकि, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने 41,000 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का निवेश बाजार को लगातार सहारा देता रहा।