देश की सबसे बड़ी पावर ट्रांसमिशन कंपनी Power Grid Corporation के मार्च तिमाही नतीजे मिले-जुले रहे हैं। कंपनी की कमाई पर पुराने प्रोजेक्ट्स से मिलने वाले टैरिफ में कटौती का असर दिखा, जिसकी वजह से रेवेन्यू और EBITDA दोनों में दबाव देखने को मिला। हालांकि कंपनी ने कैपेक्स और नए प्रोजेक्ट्स के मामले में मजबूत प्रदर्शन किया है। इसी वजह से ब्रोकरेज हाउस फिलहाल शेयर पर पूरी तरह नेगेटिव भी नहीं हैं, लेकिन मौजूदा स्तर पर बहुत बड़ा अपसाइड भी नहीं देख रहे।
मंगलवार को Power Grid का शेयर करीब 297 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा और हल्की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा था। वहीं दूसरी तरफ Sensex करीब 348 अंक चढ़कर 75,663 के ऊपर पहुंच गया। यानी बाजार में तेजी के बावजूद Power Grid के शेयर में बहुत बड़ा मूवमेंट देखने को नहीं मिला। इससे साफ है कि निवेशक फिलहाल कंपनी के अगले ग्रोथ ट्रिगर्स का इंतजार कर रहे हैं।
Power Grid का Q4FY26 प्रदर्शन कमजोर रहा। कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 5 प्रतिशत गिरकर 11,670 करोड़ रुपये रहा। वहीं EBITDA में भी करीब 11 प्रतिशत की गिरावट आई। इसकी बड़ी वजह पुराने RTM प्रोजेक्ट्स पर 12 साल बाद होने वाली टैरिफ कटौती रही।
हालांकि कंपनी का मुनाफा बढ़कर करीब 4,550 करोड़ रुपये पहुंच गया, लेकिन इसमें टैक्स से जुड़ा एक बार का फायदा भी शामिल था। यानी ऑपरेशनल स्तर पर प्रदर्शन उतना मजबूत नहीं माना गया।
मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक कंपनी का एडजस्टेड प्रॉफिट अनुमान से काफी कमजोर रहा। वहीं नुवामा और एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का भी मानना है कि मौजूदा वैल्यूएशन के हिसाब से शेयर में सीमित तेजी की गुंजाइश बची है।
हालांकि कंपनी की सबसे बड़ी ताकत अब भी उसका बड़ा कैपेक्स और प्रोजेक्ट पाइपलाइन मानी जा रही है। FY26 में कंपनी ने करीब 40,000 करोड़ रुपये का कैपेक्स किया, जो गाइडेंस से ज्यादा रहा। कंपनी ने FY27 और FY28 के लिए भी बड़े निवेश का प्लान रखा है। मैनेजमेंट का कहना है कि आने वाले वर्षों में ट्रांसमिशन सेक्टर में बड़े मौके मिल सकते हैं। खासकर रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, डेटा सेंटर और HVDC प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश की संभावना है।
Power Grid लगातार नए ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स पर बोली लगा रही है, लेकिन अब मुकाबला भी बढ़ रहा है। FY26 में कंपनी 28 में से सिर्फ 9 TBCB प्रोजेक्ट्स ही जीत पाई। यानी मार्केट शेयर पहले के मुकाबले घटा है। इसके अलावा पुराने प्रोजेक्ट्स से मिलने वाला टैरिफ धीरे-धीरे कम हो रहा है, जिसका असर कमाई पर पड़ रहा है। यही वजह है कि ब्रोकरेज हाउस फिलहाल शेयर पर बहुत ज्यादा बुलिश नजर नहीं आ रहे।
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने शेयर पर HOLD रेटिंग दी है और 317 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है। मोतीलाल ओसवाल ने भी Neutral रेटिंग बरकरार रखी है और 305 रुपये का टारगेट दिया है। वहीं नुवामा ने HOLD रेटिंग के साथ 283 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी का लॉन्ग टर्म आउटलुक ठीक है, लेकिन मौजूदा वैल्यूएशन पर बहुत बड़ा अपसाइड फिलहाल नहीं दिख रहा।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)