देश में बिजली की बढ़ती मांग और ग्रीन एनर्जी पर बढ़ते फोकस की वजह से पावर सेक्टर फिर से चर्चा में आ गया है। गर्मी बढ़ने, इंडस्ट्री एक्टिविटी तेज होने और बिजली खपत बढ़ने से पावर कंपनियों के कारोबार में मजबूती दिख रही है। FY26 में देश की पीक पावर डिमांड रिकॉर्ड 256 गीगावॉट तक पहुंच गई। वहीं अप्रैल महीने में बिजली की मांग करीब 4.5 प्रतिशत बढ़ी। इसका असर पावर कंपनियों के शेयरों पर भी दिखा और पिछले तीन महीनों में कई शेयरों में शानदार तेजी आई।
अब बाजार की नजर खास तौर पर उन कंपनियों पर है जो रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी स्टोरेज और पावर इक्विपमेंट बिजनेस में तेजी से विस्तार कर रही हैं। भारत ने FY26 में करीब 57.5 गीगावॉट नई बिजली क्षमता जोड़ी, जिसमें सबसे ज्यादा योगदान सोलर और विंड एनर्जी का रहा। अब देश की कुल बिजली क्षमता में आधे से ज्यादा हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी का हो चुका है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावॉट रिन्यूएबल क्षमता हासिल करना है।
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम यानी BESS भी अब पावर सेक्टर का बड़ा गेमचेंजर बनता दिख रहा है। कंपनियां ऐसे प्रोजेक्ट्स पर जोर दे रही हैं जहां सोलर और विंड के साथ स्टोरेज भी हो, ताकि लगातार बिजली सप्लाई दी जा सके। इससे कंपनियों की कमाई बढ़ने की उम्मीद है।
विंड एनर्जी सेक्टर में भी लंबे समय बाद रौनक लौट रही है। यूरोप समेत कई देशों में एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ने के बाद विंड प्रोजेक्ट्स पर फोकस बढ़ा है। भारतीय कंपनियां भी नए प्रोडक्ट लॉन्च कर रही हैं ताकि घरेलू बाजार के साथ एक्सपोर्ट का फायदा मिल सके।
हालांकि सेक्टर के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। ट्रांसमिशन नेटवर्क की धीमी रफ्तार कई प्रोजेक्ट्स में देरी करा रही है। ग्रिड कनेक्टिविटी और जमीन से जुड़े अप्रूवल भी बड़ी परेशानी बने हुए हैं। इसके अलावा बढ़ते कैपेक्स की वजह से कई कंपनियों पर वित्तीय दबाव भी बढ़ सकता है।
इसके बावजूद बाजार एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में पावर सेक्टर की ग्रोथ मजबूत रह सकती है। बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है और देश तेजी से ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ रहा है।
इसी बीच ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने कुछ पावर कंपनियों पर भरोसा जताया है।
मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक ACME Solar रिन्यूएबल एनर्जी और बैटरी स्टोरेज सेगमेंट में मजबूत स्थिति में है। कंपनी के पास 5 गीगावॉट का बड़ा प्रोजेक्ट पाइपलाइन है और उसमें से 65 प्रतिशत प्रोजेक्ट्स के लिए पहले ही PPA यानी बिजली खरीद समझौते हो चुके हैं।
कंपनी ने चौथी तिमाही में करीब 550 करोड़ रुपये का रेवेन्यू और 480 करोड़ रुपये का EBITDA दर्ज किया। मुनाफा करीब 130 करोड़ रुपये रहा। कंपनी की ऑपरेशनल क्षमता 2.99 गीगावॉट तक पहुंच गई है।
मैनेजमेंट का लक्ष्य FY27 तक 1.5 गीगावॉट नई रिन्यूएबल क्षमता और 10 GWh बैटरी स्टोरेज जोड़ने का है। ब्रोकरेज ने ACME Solar के शेयर के लिए 410 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है।
मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि JSW Energy तेजी से ग्रीन एनर्जी कंपनी में बदल रही है। कंपनी 2030 तक 30 गीगावॉट क्षमता हासिल करना चाहती है, जिसमें 70 प्रतिशत हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी का होगा।
कंपनी बड़े स्तर पर बैटरी स्टोरेज और पंप्ड हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। चौथी तिमाही में कंपनी का EBITDA करीब 2250 करोड़ रुपये रहा, जबकि रेवेन्यू 41 प्रतिशत बढ़कर 4500 करोड़ रुपये पहुंच गया।
हालांकि ज्यादा फाइनेंस कॉस्ट की वजह से मुनाफा अनुमान से थोड़ा कमजोर रहा, लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले समय में कंपनी की ग्रोथ मजबूत रह सकती है। कंपनी की 82 प्रतिशत बिजली बिक्री लॉन्ग-टर्म PPA के तहत होती है, जिससे कमाई में स्थिरता बनी रहती है।
मोतीलाल ओसवाल ने JSW Energy के शेयर के लिए 640 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)