पांच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के खिलाफ प्रतिभूति अपील पंचाट (सैट) में अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मौजूदा कानूनी कार्यवाही में प्रक्रिया की खामियां हैं। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होनी है।
ये अपीलें एलटीएस इन्वेस्टमेंट फंड, क्रेस्टा फंड, एशिया इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन (मॉरीशस), एपीएमएस इन्वेस्टमेंट फंड और अल्बुला इन्वेस्टमेंट फंड ने दायर की हैं। ये वे कंपनियां हैं जिनका नाम शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च ने अदाणी समूह पर अपनी 2023 की रिपोर्ट में लिया था। हिंडनबर्ग रिसर्च अब बंद हो चुकी है।
एफपीआई के एक कानूनी प्रतिनिधि के अनुसार यह विवाद सेबी की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस से जुड़ा है। ये नोटिस नियमों के कथित उल्लंघन, जैसे तय डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स को की गई फाइलिंग और खुलासों में कमियों के कारण जारी किए गए थे।
फंडों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वरिष्ठ वकील ने कहा कि एफपीआई ने नोटिस का जवाब दिया था, लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि उनके जवाबों पर विचार करने के बावजूद सेबी न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के कारण बताने में विफल रहा।
अपील करने वालों का तर्क है कि सेबी (जांच करने और जुर्माना लगाने की प्रक्रिया) नियम, 1995 के नियम 4(3) के तहत एक एडजुडिकेटिंग ऑफिसर (एओ) को सबसे पहले नोटिस पाने वाले के जवाब की जांच करनी चाहिए और इस बात पर अपनी राय बनानी चाहिए कि क्या औपचारिक जांच की जरूरत है। एफपीआई के अनुसार उन्हें ऐसी राय की प्रति और न्यायिक प्रक्रिया शुरू करने के कारण नहीं बताए गए हैं।
इस मामले में सुनवाई के लिए फंड सेबी के सामने पेश हुए, लेकिन उनका कहना है कि एओ ने मांगी गई वजहें बताने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें पंचाट का रुख करना पड़ा।
एफपीआई का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वकील ने कहा, ‘राय रिकॉर्ड करनी चाहिए और बतानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो जांच आगे नहीं बढ़ सकती। यह असल में नोटिस पाने वालों के अधिकारों से जुड़ा एक प्रक्रिया संबंधी मामला है।’
मामले की जानकार एक और सूत्र ने बताया कि यह कार्यवाही एफपीआई की अल्टीमेट बेनिफिशियल ओनरशिप की सेबी की जांच से भी जुड़ी हो सकती है। इस खबर के छपने के समय तक इस संबंध में सेबी की प्रतिक्रिया के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिल।
सितंबर 2025 में, सेबी ने हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों के सिलसिले में अदाणी समूह की कंपनियों, चेयरमैन गौतम अदाणी और उनसे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी। इन आरोपों में फंड के गलत इस्तेमाल और संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन में गड़बड़ी जैसे दावे शामिल थे।
अलग-अलग आदेशों में, नियामक को ‘लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स ऐंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स’ (एलओडीआर) रेग्युलेशंस या ‘प्रोहिबिशन ऑफ फ्रॉडुलेंट ऐंड अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज’ (पीएफयूटीपी) नियमन के किसी भी उल्लंघन का पता नहीं चला, जिससे समूह पर लगे आरोपों से उसे राहत मिल गई।