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2026 में मिल सकती है बड़ी राहत, RBI 0.50% तक घटा सकता है ब्याज दरें: ब्रोकरेज

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नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक महंगाई काबू में रहने और मांग कमजोर होने के चलते RBI के पास 2026 में ब्याज दरें घटाने की गुंजाइश बनी हुई है

Last Updated- January 13, 2026 | 3:01 PM IST
RBI

RBI Inflation Rate: दिसंबर में महंगाई दर (CPI) थोड़ी बढ़कर 1.3 फीसदी हो गई। नवंबर में यह 0.7 फीसदी थी। यह बढ़ोतरी वैसी ही रही, जैसी पहले से उम्मीद की जा रही थी। महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह खाने-पीने की चीजों के दामों का धीरे-धीरे सामान्य होना है। खास तौर पर सब्जियों के दाम अब पहले जितने ज्यादा नहीं गिर रहे हैं, इसी वजह से महंगाई कुछ बढ़ी है।

खाद्य महंगाई में सुधार, सब्जियों का असर घटा

नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर में खाने-पीने की चीजों की महंगाई (खाद्य महंगाई) -1.8 फीसदी रही, जबकि नवंबर में यह -2.8 फीसदी थी। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सब्जियों के दाम पहले की तरह ज्यादा नहीं गिरे। नवंबर में सब्जियों के दाम साल भर पहले के मुकाबले 22 फीसदी गिरे थे, लेकिन दिसंबर में गिरावट घटकर 18 फीसदी रह गई। वहीं, सब्जियों को छोड़कर बाकी खाने की चीजों के दाम करीब 1.5 फीसदी पर स्थिर रहे, जिससे पता चलता है कि खाने-पीने की महंगाई अभी ज्यादा नहीं बढ़ी है।

कोर महंगाई में लगातार नरमी, मांग कमजोर

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोर महंगाई, यानी जिसमें खाना और पेट्रोल-डीजल शामिल नहीं होते, दिसंबर में भी कम बनी रही। सोना और चांदी के दाम ज्यादा होने की वजह से कुल कोर महंगाई करीब 4.6 फीसदी रही। लेकिन जब सोना-चांदी, पेट्रोल और डीजल को हटा दिया जाए, तो कोर महंगाई घटकर 2.4 फीसदी रह गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। कपड़े, मकान, इलाज, मनोरंजन और परिवहन जैसी चीजों के दाम भी पहले के मुकाबले धीरे बढ़े हैं। इससे पता चलता है कि बाजार में लोगों की खरीदारी अभी कमजोर है।

आगे भी महंगाई नियंत्रण में रहने की उम्मीद

नुवामा का कहना है कि आने वाले महीनों में सब्जियों के दाम धीरे-धीरे सामान्य होंगे, जिससे महंगाई थोड़ी बढ़ सकती है। पुराने आंकड़ों का असर भी खत्म होगा, इसलिए महंगाई में हल्का उछाल दिख सकता है। इसके बावजूद महंगाई के RBI की तय सीमा के अंदर रहने की उम्मीद है। साथ ही, जीएसटी में कटौती और लोगों की कमजोर खरीदारी की वजह से कोर महंगाई पर ज्यादा दबाव पड़ने की संभावना नहीं है।

ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के अंदर लोगों की आमदनी और कंपनियों का मुनाफा अभी कमजोर है। वहीं, दुनिया भर में चल रही अनिश्चितता भारत के निर्यात को भी प्रभावित कर सकती है। ऐसे हालात में, जब महंगाई काबू में है और अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी है, तो RBI के पास 2026 में ब्याज दरें 0.25 से 0.50 फीसदी तक घटाने की गुंजाइश बनी हुई है।

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First Published - January 13, 2026 | 2:53 PM IST

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