भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने प्रवासी भारतीयों (एनआरआई), भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) और अन्य बाहरी लोगों के लिए व्यक्तियों के लिए निवेश नियमों में ढील देने का ऐलान किया है। यानी अब सूचीबद्ध कंपनियों में अधिक निवेश कर पाएंगे और इसके लिए उन्हें इसके लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास स्वयं को पंजीकृत कराने की जरूरत भी नहीं होगी। आरबीआई ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से भारतीय शेयरों में निवेशकों का दायरा बढ़ और बाजार की तरलता में सुधार हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक विदेशी पूंजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा बढ़ावा मिल सकता है खासकर ऐसे समय में जब विदेशी संस्थागत निवेशक जमकर बिकवाली कर रहे हैं।
आरबीआई ने एक बयान में कहा,‘सेबी के पास पंजीकरण कराए बिना शेयर बाजार में कारोबार करने वाले इक्विटी योजनाओं में एनआरआई और ओसीआई के निवेश की सीमा बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा, यही सुविधा भारत के बाहर रहने वाले सभी व्यक्तियों (पीआरओआई) को भी दी जा रही है।’
वित्त मंत्रालय ने भी कहा है कि भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों (पीआरओआई) को पोर्टफोलियो निवेश योजना (पीआईएस) के माध्यम से सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में निवेश करने की अनुमति दी जाएगी। यह सुविधा पहले सिर्फ एनआरआई और ओसीआई के लिए उपलब्ध थी। इस प्रस्ताव की घोषणा सबसे पहले 2026-27 के केंद्रीय बजट में की गई थी।
संशोधित ढांचे के तहत एक विदेशी निवेशक के लिए निवेश सीमा कंपनी की चुकता पूंजी का 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है। कुल सीमा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 24 प्रतिशत कर दी गई है। आरबीआई द्वारा विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश जारी किए जाने की उम्मीद है। प्राइम डेटाबेस के मुताबिक मार्च 2026 तक एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों में एनआरआई की शेयरधारिता 0.62 प्रतिशत थी जिसका मूल्य 2.5 लाख करोड़ रुपये था जबकि एक वर्ष पहले यह 0.63 प्रतिशत या 2.57 लाख करोड़ रुपये थी।
हालांकि, विशेषज्ञ तत्काल निवेश में वृद्धि की उम्मीद नहीं कर रहे हैं मगर उनका कहना है कि नीतिगत बदलाव से लंबी अवधि में विदेशी व्यक्तिगत निवेशकों के लिए घरेलू शेयरों का आकर्षण बढ़ेगा।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीरज रेली ने कहा, ‘एनआरआई, ओसीआई और अन्य बाहरी (विदेशी) लोगों के लिए निवेश नियमों का उदारीकरण ऐसे समय में भारत के पूंजी खाते को मजबूत कर सकता है और रुपया भी मजबूत हो सकता है।’
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक भारतीय शेयरों से रिकॉर्ड 2.63 लाख करोड़ रुपये खींच लिए हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक खरीदारी कर इस बिकवाली की काफी हद तक भरपाई की है।
वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि संशोधित ढांचा प्रवासी भारतीय और विदेशी नागरिक निवेशकों के लिए मौजूदा ऑनबोर्डिंग प्रणालियों का लाभ उठाकर अधिक विदेशी पूंजी के लिए रास्ता आसान बना देगा।