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Reliance Power: 10 साल के हाई पर पहुंचा अनिल अंबानी की कंपनी का शेयर, एक महीने में 85% की रैली, जानिए क्या है वजह

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Reliance Power: Q4 में मुनाफा, कर्ज में गिरावट और सोलर प्रोजेक्ट्स की डील से शेयर में ज़बरदस्त तेजी

Last Updated- June 10, 2025 | 2:26 PM IST
Reliance Power

मंगलवार को रिलायंस पावर (Reliance Power) का शेयर 11% उछलकर ₹71.35 तक पहुंच गया, जो नवंबर 2014 के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है। बीएसई पर दिन के 10:49 बजे तक शेयर 8% ऊपर ₹69.96 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि BSE सेंसेक्स में सिर्फ 0.05% की हल्की बढ़त थी। शेयर में यह लगातार तीसरा दिन है जब इसमें तेज़ी देखी गई है। तीन दिनों में यह 17% चढ़ा है और बीते एक महीने में यह शेयर करीब 85% उछल चुका है। ट्रेडिंग वॉल्यूम भी काफी भारी रहा, NSE और BSE पर मिलाकर 266 मिलियन से ज्यादा शेयरों का कारोबार हुआ, जो कंपनी की कुल हिस्सेदारी का 6.5% है।

7 मई 2025 तक के डेटा के अनुसार, रिलायंस पावर में करीब 50% हिस्सेदारी रिटेल निवेशकों के पास है। जिन निवेशकों की हिस्सेदारी ₹2 लाख तक की है, उनके पास 27.02% हिस्सा है। जबकि ₹2 लाख से ज्यादा निवेश करने वाले रिटेल निवेशकों के पास 21.59% हिस्सा है। इसके अलावा, LIC के पास 2.49% और VFSI Holdings PTE LTD के पास 4.99% हिस्सेदारी है। कंपनी की प्रमोटर कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के पास 24.90% हिस्सेदारी है।

Q4 में हुआ मुनाफा, कर्ज भी घटा

9 मई 2025 को रिलायंस पावर ने मार्च तिमाही (Q4FY25) में ₹126 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹397.56 करोड़ का घाटा हुआ था। हालांकि कंपनी की आय घटकर ₹2,066 करोड़ रह गई (पिछले साल ₹2,194 करोड़ थी), लेकिन खर्चों में कटौती और कर्ज में कमी ने मुनाफे में मदद की। FY24 में कंपनी का डेब्ट-टू-इक्विटी रेशियो 1.61:1 था, जो FY25 में घटकर 0.88:1 रह गया — जो इंडस्ट्री में सबसे कम में से एक है।

रिलायंस पावर की यूनिट Reliance NU Suntech ने SECI के साथ 25 साल के लिए पावर खरीद समझौता (PPA) साइन किया है। यह एशिया का सबसे बड़ा सोलर और बैटरी एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट होगा, जिसकी लागत ₹10,000 करोड़ है। इस प्रोजेक्ट में 930 मेगावॉट की सोलर कैपेसिटी और 465 मेगावॉट/1860 MWh की स्टोरेज होगी। यह प्रोजेक्ट ₹3.53 प्रति यूनिट की दर से चलेगा। 28 मई 2025 को कंपनी की एक और यूनिट Reliance NU Energies को SJVN से 350 मेगावॉट ISTS-कनेक्टेड सोलर प्रोजेक्ट का काम मिला, जिसमें 175 मेगावॉट/700 MWh की बैटरी स्टोरेज भी शामिल है। यह प्रोजेक्ट भी 25 साल के लिए है, जिसमें टैरिफ ₹3.33 प्रति यूनिट तय हुआ है।

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विदेशी कर्ज चुका कर बेहतर किया फाइनेंशियल स्ट्रक्चर

31 दिसंबर 2024 को कंपनी की सब्सिडियरी Sasan Power ने IIFCL, UK को $150 मिलियन (करीब ₹1,250 करोड़) का भुगतान किया। कंपनी ने बताया कि इससे उनकी लिक्विडिटी बेहतर हुई है और क्रेडिट रेटिंग में सुधार आने की उम्मीद है। भारत सरकार 2032 तक 80 गीगावॉट नई कोल बेस्ड थर्मल पावर कैपेसिटी जोड़ने की योजना बना रही है। रिलायंस पावर ने FY24 की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह थर्मल पावर कंपनियों के लिए एक बड़ा अवसर है।

बढ़ती बिजली की मांग, इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती संख्या और गांवों तक बिजली पहुंचाने की कोशिशों से पावर कंपनियों को फायदा होगा। वहीं भारत 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन-फॉसिल फ्यूल पावर क्षमता हासिल करना चाहता है, जिससे रिलायंस पावर जैसी कंपनियों को दोनों तरफ से ग्रोथ के मौके मिल सकते हैं।

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First Published - June 10, 2025 | 2:26 PM IST

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