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तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई का खतरा… लेकिन इन सेक्टरों की निकल सकती है लॉटरी

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तेल महंगा होने से महंगाई और आयात बिल बढ़ने का खतरा, लेकिन कुछ कमोडिटी और कृषि से जुड़े सेक्टरों को मिल सकता है फायदा

Last Updated- March 10, 2026 | 12:03 PM IST
Crude Oil

दुनिया में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक ही नहीं रहता। इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार तेल महंगा होने से एक तरफ महंगाई और आयात बिल बढ़ सकता है, वहीं दूसरी तरफ कुछ सेक्टर और कंपनियों को इससे फायदा भी हो सकता है।

महंगा तेल बढ़ा सकता है महंगाई और घाटा

ब्रोकरेज फर्म एक्सिस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से देश का आयात बिल लगभग 1.5 से 2 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है। अगर तेल की कीमतें 10 डॉलर तक बढ़ जाती हैं तो चालू खाते का घाटा जीडीपी का करीब 0.35 से 0.5 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक तेल महंगा होने का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक ही नहीं रहता। इससे परिवहन, फैक्ट्री में उत्पादन, माल ढुलाई और खाने-पीने की चीजों की सप्लाई की लागत भी बढ़ जाती है। इससे महंगाई बढ़ सकती है और ऐसी स्थिति में आरबीआई के लिए ब्याज दरें घटाना मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा भारत तेल डॉलर में खरीदता है। जब तेल महंगा होता है तो ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आ सकता है।

तेल की तेजी से खेती और कमोडिटी बाजार पर असर

वहीं केडिया एडवाइजरी के अनुसार कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर खेती और उससे जुड़े उद्योगों पर भी पड़ता है। तेल महंगा होने से बायोफ्यूल की मांग बढ़ सकती है, जिससे सोयाबीन, पाम ऑयल और गन्ना जैसी फसलों की मांग बढ़ती है। साथ ही उर्वरक और परिवहन महंगे होने से गेहूं, चावल और मक्का जैसी फसलों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। माल ढुलाई महंगी होने से मसाले और दालों की लागत बढ़ती है, जबकि कपास की कीमतों में भी तेजी आ सकती है। इस तरह तेल की कीमत बढ़ने से खेती से जुड़ी महंगाई भी बढ़ सकती है।

इन भारतीय कंपनियों को हो सकता है फायदा

केडिया एडवाइजरी के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है तो कुछ भारतीय कंपनियों को इसका फायदा मिल सकता है। खाद्य तेल सेक्टर में एडब्ल्यूएल एग्री, पतंजलि फूड्स और गोदरेज एग्रोवेट को लाभ हो सकता है।

चीनी और एथेनॉल से जुड़ी कंपनियों जैसे बलरामपुर चीनी, त्रिवेणी इंजीनियरिंग और रेनुका शुगर्स को भी फायदा मिलने की संभावना है।

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इसके अलावा उर्वरक कंपनियां जैसे कोरोमंडल इंटरनेशनल, चंबल फर्टिलाइजर्स और दीपक फर्टिलाइजर्स के लिए भी यह स्थिति अच्छी मानी जा रही है। वहीं टेक्सटाइल और कपास से जुड़ी कंपनियां जैसे वर्धमान टेक्सटाइल्स, केपीआर मिल और अरविंद लिमिटेड को भी इसका फायदा मिल सकता है।

कुछ सेक्टरों पर पड़ सकता है दबाव

एक्सिस सिक्योरिटीज के मुताबिक तेल की कीमतें बढ़ने से कई उद्योगों की लागत बढ़ जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर एविएशन सेक्टर पर पड़ सकता है, क्योंकि एयरलाइन कंपनियों के खर्च का बड़ा हिस्सा फ्यूल पर होता है। इसके अलावा पेंट, केमिकल, टायर, लॉजिस्टिक्स और सीमेंट जैसे उद्योगों की लागत भी बढ़ सकती है, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव आ सकता है।

हालांकि तेल की खोज और उत्पादन करने वाली कंपनियों जैसे ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को तेल महंगा होने से फायदा हो सकता है, क्योंकि तेल की कीमत बढ़ने पर प्रति बैरल उनकी कमाई भी बढ़ जाती है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।

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First Published - March 10, 2026 | 12:03 PM IST

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