दुनिया में चल रहे युद्ध और तनाव का असर अब भारत के कई अहम सेक्टरों पर साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, सप्लाई चेन में रुकावट और माल ढुलाई (फ्रेट) के बढ़ते खर्च ने कंपनियों की लागत को तेजी से बढ़ा दिया है। इससे प्रोडक्शन महंगा हो रहा है और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है। एक्सिस डायरेक्ट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्थिति सिर्फ एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि बिल्डिंग मटेरियल और कंज्यूमर सेक्टर तक इसका असर फैल चुका है।
रिपोर्ट बताती है कि कच्चे तेल के महंगे होने से प्लास्टिक, रेजिन, पैकेजिंग और इंसुलेशन जैसे कच्चे माल महंगे हो गए हैं। साथ ही ईंधन और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी बढ़ गया है। ऊपर से सप्लाई चेन में रुकावट और एयर फ्रेट महंगा होने से सामान पहुंचाने में देरी हो रही है और कंपनियों का खर्च और बढ़ रहा है। इससे कंपनियों को ज्यादा स्टॉक रखना पड़ रहा है, जिससे उनका पैसा फंस रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगर मिडिल ईस्ट का एयरस्पेस बंद रहता है तो Q1FY27 में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों के एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है। हालांकि समुद्री रास्ते अभी चालू हैं, लेकिन एयर फ्रेट महंगा होने से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है। कंपनियां तुरंत कीमत नहीं बढ़ा पा रही हैं क्योंकि ग्राहकों की मांग कमजोर पड़ सकती है। इससे कम समय में मुनाफा (EBITDA) घटने का खतरा है।
रूम एयर कंडीशनर (RAC) सेक्टर को सबसे ज्यादा झटका लग सकता है। मार्च का समय इस इंडस्ट्री के लिए पीक प्रोडक्शन सीजन होता है, लेकिन LPG की कमी के कारण प्रोडक्शन प्रभावित हो रहा है। कुछ कंपनियों ने वैकल्पिक ईंधन जैसे PNG और oxyacetylene का इस्तेमाल शुरू किया है, लेकिन लागत फिर भी बढ़ रही है। कच्चे माल की कीमत बढ़ने से कंपनियों को कीमत बढ़ानी पड़ सकती है, जिससे मांग पर असर पड़ सकता है।
इस सेक्टर में भी लागत बढ़ने का असर साफ दिख रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर कच्चे तेल से जुड़े खर्च में 10% की बढ़ोतरी होती है, तो कंपनियों का मार्जिन 0.3% से 0.6% तक घट सकता है। हालांकि Greenply और Century जैसी मजबूत ब्रांड्स कीमत बढ़ाकर कुछ हद तक लागत का असर संभाल सकती हैं। लेकिन कच्चे माल जैसे phenol और melamine की सप्लाई पर खतरा बना हुआ है।
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता टाइल्स और सैनिटरीवेयर सेक्टर को लेकर जताई गई है। यह सेक्टर गैस पर ज्यादा निर्भर है, इसलिए ईंधन महंगा होने से लागत तेजी से बढ़ रही है। साथ ही यह सेक्टर एक्सपोर्ट पर भी निर्भर है, इसलिए फ्रेट महंगा होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा घट सकती है। छोटी कंपनियों के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल हो सकती है।
प्लास्टिक पाइप कंपनियां कच्चे तेल पर निर्भर होती हैं क्योंकि उनका कच्चा माल पेट्रोकेमिकल से आता है। लेकिन इस सेक्टर की खासियत यह है कि कंपनियां कीमत बढ़ाकर लागत का असर जल्दी ग्राहकों पर डाल सकती हैं, खासकर B2B सेगमेंट में। फिर भी, अगर कीमतें ज्यादा बढ़ती हैं तो हाउसिंग और कृषि सेक्टर में मांग प्रभावित हो सकती है।
रिपोर्ट में Astral, Cera Sanitaryware, Greenply, LG Electronics और Prince Pipes जैसी कंपनियों पर सकारात्मक नजरिया (BUY रेटिंग) रखा गया है। इन कंपनियों की कमाई और ग्रोथ मजबूत रहने की उम्मीद जताई गई है, लेकिन मौजूदा हालात में इन पर भी लागत का दबाव बना रह सकता है।
| कंपनी का नाम | मौजूदा रेटिंग | टारगेट प्राइस |
|---|---|---|
| एस्ट्रल लिमिटेड | खरीदें | 1,750 |
| सेरा सैनिटरीवेयर | खरीदें | 7,000 |
| ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज | खरीदें | 330 |
| एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स | खरीदें | 1,815 |
| प्रिंस पाइप्स एंड फिटिंग्स | खरीदें | 400 |
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)