भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एलीटकॉन इंटरनैशनल, उसके प्रवर्तक और प्रबंध निदेशक विपिन शर्मा और चार अन्य को कथित तौर पर कीमतों और वॉल्यूम में हेरफेर, वित्तीय विवरणों में अनियमितता और गुमराह करने वाले डिस्क्लोजर के कारण प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है।
30 मार्च के एक अंतरिम आदेश में सेबी ने शर्मा और चार अन्य संस्थाओं को हुए 51.3 करोड़ रुपये के अवैध लाभ को जब्त करने का निर्देश दिया। साथ ही, नियामक की पूर्व मंज़ूरी के बिना उनके खातों से किसी भी तरह की निकासी पर रोक लगा दी।
सेबी का आरोप है कि कंपनी ने अपने वित्तीय और परिचालन की स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए निवेशकों से जरूरी जानकारी छिपाई। उसने कहा कि केवल सकारात्मक या गुमराह करने वाली घोषणाएं ही सार्वजनिक की गईं जबकि जीएसटी से जुड़े कारण बताओ नोटिस, जीएसटी अधिकारियों द्वारा रजिस्टर्ड दफ्तर को सील किया जाना, निरीक्षण के दौरान एफडीए द्वारा इन्वेंट्री जब्त किया जाना और अदालत की अवमानना के नोटिस जैसी अहम घटनाओं की जानकारी निवेशकों को नहीं दी गई।
नियामक ने पाया कि कंपनी ने शेयर में निवेशकों की दिलचस्पी जगाने और प्रवर्तक व संबंधित संस्थाओं के लिए बाहर निकलने की राह आसान बनाने के मकसद से सनसनीखेज अपडेट जारी करने की यह रणनीति अपनाई थी।
पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने 83 पृष्ठों के आदेश में कहा, नियामक के लिए सही समय पर हस्तक्षेप करना और अंतरिम निर्देश जारी करना और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो भोले-भाले निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
सेबी ने कहा कि वह इस मामले की विस्तृत जांच करेगा और एक फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त करेगा। यह कंपनी तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों के क्षेत्र में काम करती है और इसने पैकेज्ड फूड, खाने के तेल और पेय पदार्थों जैसे एफएमसीजी सेगमेंट में भी विस्तार किया है।
एलीटकॉन ने कैलेंडर वर्ष 2025 की सितंबर तिमाही में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में अपने वित्तीय प्रदर्शन में ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है। कंपनी का राजस्व 6.38 गुना बढ़कर 79 करोड़ रुपये से 505 करोड़ रुपये पर पहुंच गया जबकि एकल आधार पर शुद्ध लाभ 2.28 गुना बढ़कर 20.2 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
हालांकि, सेबी ने राजस्व में बताई गई बढ़ोतरी और बिजली की खपत में आ रही गिरावट के बीच एक नकारात्मक संबंध की ओर इशारा किया, जिससे इन आंकड़ों की प्रामाणिकता पर संदेह पैदा हो गया। मौके पर किए गए निरीक्षणों से पता चला कि वहां विनिर्माण गतिविधियां बहुत ही कम थीं।
सेबी ने यह भी पाया कि शर्मा ने कृत्रिम रूप से बढ़ाई गई कीमतों पर 50 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। तरजीही आवंटी के लिए अनिवार्य लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद कंपनी ने लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए अपनी प्रमोशनल गतिविधियां तेज कर दी, जिससे इन निवेशकों को ऊंचे स्तरों पर बाहर निकलने का मौका मिल गया।
इससे यह सुनिश्चित हुआ कि जहां एक ओर खुदरा निवेशकों ने विकास की मनगढ़ंत कहानी के आधार पर शेयर में निवेश किया, वहीं प्रवर्तक और उनसे जुड़ी संस्थाएं अपनी हिस्सेदारी अनजान खुदरा शेयरधारकों को ऊंची कीमत पर बेच पाने में सफल रहीं। सेबी (सेबी) अब तरजीही आवंटन की भी जांच कर रहा है।
दिसंबर 2024 और दिसंबर 2025 के बीच यानी सिर्फ एक साल में कंपनी के शेयरधारकों की संख्या 131 गुना बढ़ गई। इससे पता चलता है कि प्रवर्तकों ने बड़े पैमाने पर अपने शेयर खुदरा निवेशकों को बेच दिए।
सोमवार को कंपनी के शेयर 48.4 रुपये पर बंद हुए, जो अगस्त 2025 के अपने अब तक के सर्वोच्च स्तर 422.65 रुपये से करीब 90 फीसदी कम है।