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Rajesh Exports पर सेबी का बड़ा एक्शन! LIC के 10.8% निवेश का क्या होगा?

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इस घटनाक्रम का असर कंपनी के बड़े शेयरधारकों पर भी पड़ सकता है। एलआईसी (भारतीय जीवन बीमा निगम) के पास कंपनी में 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है

Last Updated- June 04, 2026 | 3:35 PM IST
LIC

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर के खिलाफ कथित 15.15 लाख करोड़ रुपये की राजस्व (रेवेन्यू) बढ़ाकर दिखाने की जांच के बीच कार्रवाई किए जाने से कंपनी के निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे कंपनी में “भरोसे का संकट” पैदा हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस घटनाक्रम का असर कंपनी के बड़े शेयरधारकों पर भी पड़ सकता है। एलआईसी (भारतीय जीवन बीमा निगम) के पास कंपनी में 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

निवेशकों को सावधान रहने की सलाह

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और रिसर्च प्रमुख जी चोक्कालिंगम ने कहा कि सेबी द्वारा प्रमोटर पर कथित फंड डायवर्जन (धन के गलत इस्तेमाल) के आरोप गंभीर हैं। उनका मानना है कि खुद बाजार नियामक की कार्रवाई से निवेशकों का भरोसा प्रभावित होगा।

उन्होंने कहा कि खुदरा निवेशकों (रिटेल निवेशकों) को मौका मिलने पर शेयर से बाहर निकलने पर विचार करना चाहिए।

हालांकि, उनका मानना है कि एलआईसी के शेयर पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि राजेश एक्सपोर्ट्स में उसकी हिस्सेदारी उसके कुल निवेश पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा है। ऐसे में एलआईसी का शेयर सीमित दायरे में ही रह सकता है।

शेयर में लगा लोअर सर्किट

गुरुवार को राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट के साथ 104.65 रुपये पर पहुंच गया।

स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अंबरीश बालिगा का कहना है कि एलआईसी के शेयर पर दबाव लंबे समय तक नहीं रहेगा। उनके मुताबिक, राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर दिसंबर 2025 से लगातार गिरावट में है और एलआईसी का कुल निवेश काफी बड़ा है, इसलिए इसका असर सीमित रहेगा।

किसके पास कितनी हिस्सेदारी?

मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार:

  • एलआईसी : 10.8 प्रतिशत
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) : 14.19 प्रतिशत
  • खुदरा निवेशक : 14.55 प्रतिशत
  • एनआरआई और अन्य निवेशक : 4.81 प्रतिशत
  • प्रमोटर समूह : 54.55 प्रतिशत

एफपीआई निवेशकों में ब्रिज इंडिया फंड (8.46 प्रतिशत) और श्वाब फंडामेंटल इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी ईटीएफ (2.7 प्रतिशत) प्रमुख हैं।

कंपनी ने आरोपों को नकारा

राजेश एक्सपोर्ट्स ने कहा है कि वह सेबी के अंतरिम आदेश से जुड़े नकारात्मक मीडिया रिपोर्टों को खारिज करती है।

कंपनी का कहना है कि:

  • सेबी का आदेश अभी अंतरिम है।
  • सेबी ने अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है।
  • कंपनी द्वारा घोषित राजस्व सही है।
  • राजस्व को बढ़ाकर दिखाने का कोई मामला नहीं है।
  • सेबी और कंपनी के बीच किसी तरह का संचार संबंधी भ्रम हो सकता है।
  • कंपनी जल्द ही इस मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करेगी।

‘Z’ ग्रुप में ट्रेड होता है शेयर

राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर शेयर बाजार के ‘Z’ ग्रुप में शामिल है। इस श्रेणी में वे कंपनियां आती हैं जो एक्सचेंज के कुछ नियमों का पालन नहीं कर पातीं या जिनके खिलाफ निवेशकों की शिकायतें लंबित रहती हैं।

इस ग्रुप के शेयरों में केवल ट्रेड-फॉर-ट्रेड (T2T) आधार पर कारोबार होता है। यानी इंट्राडे ट्रेडिंग की अनुमति नहीं होती और खरीदे गए शेयरों की डिलीवरी लेना जरूरी होता है।

52 हफ्तों में 56% टूटा शेयर

राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर 22 दिसंबर 2025 के 239 रुपये के 52-सप्ताह के उच्च स्तर से अब तक करीब 56 प्रतिशत गिर चुका है। वहीं, इसने 2 अप्रैल 2026 को 80.11 रुपये का 52-सप्ताह का निचला स्तर भी छुआ था।

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First Published - June 4, 2026 | 3:28 PM IST

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