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IPO में और सुधार करेगा सेबी, पारदर्शिता और निवेशकों की सुविधा पर रहेगा फोकस

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इसमें आईपीओ लाने वाली कंपनियों के शेयरों को गिरवी रखने की प्रक्रिया को सहज बनाना और पेशकश दस्तावेजों में खुलासे की अनिवार्यताओं को औचित्यपूर्ण बनाना शामिल है

Last Updated- November 06, 2025 | 9:43 PM IST
Tuhin Kanta Pandey

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए सुधारों की नई पहल तैयार कर रहा है। इसमें आईपीओ लाने वाली कंपनियों के शेयरों को गिरवी रखने की प्रक्रिया को सहज बनाना और पेशकश दस्तावेजों में खुलासे की अनिवार्यताओं को औचित्यपूर्ण बनाना शामिल है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

एसबीआई बैंकिंग ऐंड इकनॉमिक्स कॉन्क्लेव 2025 में पांडेय ने कहा, सेबी आईपीओ पेशकश दस्तावेजों के सारांश वाले हिस्से को सरल बनाने और निवेशकों को उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए उन्हें अलग से उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा, आईपीओ से जुड़ी जिन कंपनियों के प्री-आईपीओ शेयर गिरवी रखे गए हैं, उनके लिए प्रक्रिया को सहज बनाया जा रहा है। प्रस्तावित ढांचा यह सुनिश्चित करेगा कि गिरवी रखे गए शेयरों को भुनाने या वापस लेने पर भी लॉक-इन की ज़रूरतें स्वतः लागू हो जाएं, जिससे लिस्टिंग में देरी को रोका जा सके। इन प्रस्तावों पर परामर्श पत्र जल्द ही जारी किए जाएंगे।

नए उपाय सार्वजनिक धन जुटाने को आसान बनाने के मकसद से हाल में की गई पहलों पर आधारित होंगे। इनमें बड़े आईपीओ को सुविधाजनक बनाने के लिए उठाए गए कदम और न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंडों को पूरा करने की समयसीमा बढ़ाना शामिल है।

पांडेय ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हालिया कदमों की भी सराहना की, जैसे आईपीओ फाइनैंसिंग लिमिट बढ़ाना और रीट्स व इनविट्स यूनिटों के बदले बैंक ऋण में वृद्धि आदि में इजाफा। ऋण के संबंध में उन्होंने कहा कि सेबी कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में कुछ निवेशक श्रेणियों को प्रोत्साहन पर विचार कर रहा है और बॉन्ड डेरिवेटिव शुरू करने के लिए आरबीआई के साथ बातचीत कर रहा है।

नियामक कमोडिटी सेगमेंट में सुधारों को भी प्राथमिकता दे रहा है। इनमें बैंक, बीमा और पेंशन फंडों की भागीदारी की संभावना तलाशना शामिल है। पांडेय ने कहा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को गैर-नकद निपटान वाले, गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव अनुबंधों में कारोबार की अनुमति देने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सेबी सोशल मीडिया और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्मों की निगरानी बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा, हमारे इन-हाउस सिस्टम हेरफेर वाले ट्रेडिंग पैटर्न का पता लगाने के लिए एआई और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करते हैं। हम निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एल्गोरिदम और हाई-फ़्रीक्वेंसी ट्रेडिंग के अपने ढांचे को अपडेट करते रहेंगे।

पांडेय ने एसएमई आईपीओ पर कड़ी निगरानी और प्रतिभूति बाजार में विश्वास बढ़ाने के लिए मजबूत अंतर-संस्थागत सहयोग का भी आह्वान किया। इससे पहले, एक्सीलेंस इनेबलर्स के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर एक शिखर सम्मेलन में सेबी चेयरमैन ने आईपीओ मूल्यांकन से जुड़ी चिंताओं का जवाब दिया।

पांडेय ने कहा, सेबी पारदर्शिता का पक्षधर है। हम मूल्यांकन तय नहीं करते, यह निवेशकों को तय करना है। बाजार को अवसर के आधार पर शेयरों की कीमत तय करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। हमारा काम यह सुनिश्चित करना है कि खुलासे मजबूत हों और जारी करने वाले दस्तावेज़ में पर्याप्त तुलनात्मक जानकारी हो।

उनकी यह टिप्पणी कुछ स्टार्टअपों और बहुराष्ट्रीय सहायक कंपनियों के महंगे मूल्यांकन और बाजार में उनके सुस्त आगाज की चिंताओं के बीच आई है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा स्वतंत्र निदेशक के मानदंडों को पूरा करने में चूक पर पांडेय ने कहा कि सेबी सरकार से नियुक्तियों में तेजी लाने का आग्रह किया।

उन्होंने सूचीबद्ध कंपनियों के बोर्ड को वित्तीय मानकों के साथ-साथ संगठनात्मक संस्कृति और आचरण पर नज़र रखने के लिए गवर्नेंस स्कोरकार्ड अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, नियामक ऐसे लोकाचार की तलाश करते हैं, जहां कदाचार दुर्लभ अपवाद हो, न कि व्यवसाय का एक स्वीकार्य जोखिम।

पांडेय ने कहा कि सेबी उद्योग के हितधारकों के साथ परामर्श करके कई नियमों की समीक्षा करेगा ताकि उन्हें सरल और प्रासंगिक बनाया जा सके। उन्होंने कहा, बोर्डों को न केवल वित्तीय जोखिमों बल्कि डेटा नैतिकता, साइबर लचीलेपन और एल्गोरिदम संबंधी निष्पक्षता पर भी नजर रखनी चाहिए। आज गवर्नेंस की व्यवस्था बोर्डरूम से लेकर क्लाउड तक फैली हुई है।

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First Published - November 6, 2025 | 9:38 PM IST

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