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Buyback पर Sebi का बड़ा प्लान! अब 66 दिनों में पूरी होगी प्रक्रिया, शेयरधारकों को मिलेगा फायदा

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सेबी ने शेयर बायबैक नियमों में बड़े बदलावों का प्रस्ताव दिया है, जिसमें प्रमोटर शेयर फ्रीज, नई समयसीमा और निवेशकों को तेज सूचना देने जैसे कदम शामिल हैं।

Last Updated- May 09, 2026 | 11:11 AM IST
SEBI
Representative image

मार्केट रेगुलेटर Securities and Exchange Board of India ने शेयर बायबैक प्रक्रिया को और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त प्रस्ताव पेश किए हैं। रेगुलेटर ने यह कदम प्राइमरी मार्केट एडवाइजरी कमेटी (PMAC) के साथ चर्चा और आंतरिक विचार-विमर्श के बाद उठाया है।

सेबी ने अप्रैल में ओपन मार्केट के जरिए स्टॉक एक्सचेंज पर बायबैक को दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव रखा था। अब नए सुझावों में कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से ओपन मार्केट बायबैक करने की अनुमति देने की बात कही गई है। इसके लिए अधिकतम 66 कार्य दिवस की समयसीमा तय करने का प्रस्ताव है।

रेगुलेटर ने यह भी सुझाव दिया है कि बायबैक ऑफर की अवधि के पहले आधे हिस्से में कम से कम 40 फीसदी बायबैक राशि का उपयोग करना जरूरी होगा।

हालांकि, प्राइमरी मार्केट एडवाइजरी कमेटी ने बायबैक पूरा करने की समयसीमा छह महीने रखने और उपयोग स्तर 50 फीसदी तय करने की सिफारिश की थी। इस पर सेबी का कहना है कि फाइनेंस एक्ट 2026 के तहत कंपनियों के लिए दो बायबैक ऑफर के बीच तय अंतराल से जुड़े नियमों में बदलाव हो रहे हैं, इसलिए संतुलित व्यवस्था जरूरी है।

सेबी के मुताबिक, अगर बायबैक प्रक्रिया छह महीने तक लंबी चलेगी तो बदलते बाजार हालात में इसका महत्व कम हो सकता है। साथ ही लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया शेयरधारकों के लिए भी ट्रैक करना मुश्किल बना सकती है।

बायबैक अवधि में प्रमोटर शेयर हो सकते हैं फ्रीज

सेबी ने शेयर बायबैक नियमों में कई अहम बदलावों का प्रस्ताव दिया है, ताकि प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और निवेशकों के हित में बनाया जा सके। प्रस्ताव के मुताबिक, बायबैक अवधि के दौरान कंपनी के प्रमोटर्स और उनसे जुड़े लोगों के पास मौजूद शेयरों और अन्य निर्दिष्ट सिक्योरिटीज को ISIN स्तर पर फ्रीज किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रमोटर समूह बायबैक के दौरान किसी तरह की खरीद-फरोख्त न कर सके। फिलहाल नियमों के तहत बोर्ड द्वारा बायबैक मंजूरी दिए जाने से लेकर प्रक्रिया पूरी होने तक प्रमोटर्स और उनके सहयोगियों को कंपनी के शेयरों में लेनदेन की अनुमति नहीं होती।

अलग ट्रेडिंग विंडो खत्म करने का प्रस्ताव

सेबी ने बायबैक ट्रांजैक्शन के लिए अलग ट्रेडिंग विंडो की अनिवार्यता खत्म करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके तहत अब ऐसे सौदे सामान्य मार्केट मैकेनिज्म के जरिए किए जा सकेंगे। साथ ही ट्रेडिंग स्क्रीन पर कंपनी की पहचान खरीदार के रूप में दिखाने की बाध्यता भी हटाई जा सकती है।

रेगुलेटर ने यह भी स्पष्ट प्रावधान जोड़ने का सुझाव दिया है कि किसी भी बायबैक के कारण न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

इसके अलावा, दो बायबैक ऑफर्स के बीच अंतराल को कंपनियां अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अनुरूप करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। सेबी ने मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति को वैकल्पिक बनाने की भी बात कही है। मौजूदा समय में मर्चेंट बैंकर जिन जिम्मेदारियों को संभालते हैं, उन्हें कंपनी, स्टॉक एक्सचेंज और सेक्रेटेरियल ऑडिटर्स के बीच बांटा जा सकता है।

शेयरधारकों को जल्दी देनी होगी सूचना

निवेशकों तक जानकारी तेजी से पहुंचाने के लिए सेबी ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि पब्लिक अनाउंसमेंट के एक कार्यदिवस के भीतर कंपनी संबंधित शेयरधारकों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से बायबैक ऑफर की सूचना भेजे। अभी कंपनियां विशेष प्रस्ताव के लिए पोस्टल बैलेट के नतीजे आने के दो कार्यदिवस के भीतर सार्वजनिक घोषणा करती हैं।

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First Published - May 9, 2026 | 10:59 AM IST

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